पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'जीवन-रक्षा से बड़ा कोई दान नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 2 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें जीवन-रक्षा को तीनों लोकों का सर्वश्रेष्ठ दान बताया गया है। यह उनकी हालिया दिनों में सुभाषित साझा करने की श्रृंखला की नवीनतम कड़ी है।
बुधवार का सुभाषित
मोदी ने एक्स पर संस्कृत श्लोक — 'अभयस्यैव यो दाता तस्यैव सुमहत्फलम् । न हि प्राणसमं दानं त्रिषु लोकेषु विद्यते ॥' — साझा किया। इस श्लोक का हिंदी अर्थ है: 'जो व्यक्ति लोगों के भय को दूर करता है, वह विशेष पुण्य प्राप्त करता है। तीनों लोकों में जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई मूल्यवान उपहार नहीं।'
पिछले सुभाषितों की श्रृंखला
मंगलवार, 1 सितंबर को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था — 'यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥' — जिसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति के कार्यों, योजनाओं और रणनीतियों का ज्ञान दूसरों को तब तक नहीं होता जब तक वे सफलतापूर्वक पूर्ण न हो जाएँ, ऐसे संयमी और विवेकी व्यक्ति को ही वास्तव में बुद्धिमान कहा जाता है।
सोमवार को साझा श्लोक — 'यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः।।' — का सार यह था कि मनुष्य जिस विषय के बारे में बार-बार सोचता है, उसका मन उसी ओर आकर्षित होने लगता है, इसलिए सदैव शुभ और कल्याणकारी विचारों का चिंतन करना चाहिए।
अगस्त के सुभाषित
28 अगस्त को मोदी ने एक्स पर 'एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥' साझा किया था, जो रक्षा सूत्र के महत्व और उसके जय, सुख, आरोग्य तथा ऐश्वर्य प्रदान करने वाले प्रभावों का वर्णन करता है।
27 अगस्त को प्रधानमंत्री ने लिखा था कि मनुष्य को अपनी परम्पराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए, बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और दिव्य गुणों से सम्पन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।
सुभाषित-श्रृंखला का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित और श्लोकों को सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जो भारतीय शास्त्रीय ज्ञान-परंपरा को समकालीन सार्वजनिक विमर्श से जोड़ने का उनका एक स्थापित तरीका बन चुका है। इस श्रृंखला के माध्यम से वे नागरिकों को प्राचीन नैतिक और दार्शनिक मूल्यों से परिचित कराते हैं।