झारखंड अग्निशमन विभाग को मिले 58 मिस्ट टेक्नोलॉजी फायर टेंडर, CM हेमंत सोरेन ने दिखाई हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के अग्निशमन विभाग को 6 अगस्त 2026 को बड़ी मजबूती मिली, जब मिस्ट टेक्नोलॉजी से लैस 58 नए मिनी फायर टेंडर राज्य के दमकल बेड़े में शामिल किए गए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में आयोजित समारोह में इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य के विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया। सरकार के अनुसार, इन अत्याधुनिक वाहनों से आगजनी की घटनाओं पर तेज़ी से काबू पाना और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुँचाना पहले से कहीं अधिक आसान होगा।
मिस्ट टेक्नोलॉजी: क्या है खासियत
नए फायर टेंडर पारंपरिक दमकल वाहनों की तुलना में आकार में छोटे हैं, जिससे ये शहरों की संकरी गलियों, घनी आबादी वाले इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों तक आसानी से पहुँच सकते हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मिस्ट टेक्नोलॉजी कम पानी में भी आग पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाने में सक्षम है — यह उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहाँ पानी की आपूर्ति सीमित होती है।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बदलते समय के साथ अग्निशमन सेवाओं को भी आधुनिक बनाना ज़रूरी है। उन्होंने गैस सिलेंडर विस्फोट, शॉर्ट सर्किट और बहुमंजिला इमारतों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 'आपदा के समय अपनी जान जोखिम में डालने वाले अग्निशमन कर्मियों को बेहतर उपकरण और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।'
आगे और आधुनिकीकरण की योजना
अग्निशमन विभाग एवं होमगार्ड के महानिदेशक एम.एस. भाटिया ने कहा कि यह विभाग के आधुनिकीकरण की महज शुरुआत है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ऊँची इमारतों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, फोम टेंडर और आर्टिकुलेटिंग टावर जैसे उपकरण भी बेड़े में जोड़े जाएँगे। इसके साथ ही अग्निशमन कर्मियों के प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरणों और आम जनता में अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आगजनी की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। छोटे और फुर्तीले मिनी फायर टेंडर का मतलब है कि घटनास्थल तक पहुँचने में लगने वाला समय घटेगा — जो आग नियंत्रण में सबसे निर्णायक कारक माना जाता है। समारोह में गृह, पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य सरकार का यह कदम झारखंड की आपदा प्रबंधन क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।