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जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: राहुल गांधी के समर्थन पर भाजपा-जदयू का पलटवार, 'सुविधा की राजनीति' का आरोप

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जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: राहुल गांधी के समर्थन पर भाजपा-जदयू का पलटवार, 'सुविधा की राजनीति' का आरोप

सारांश

राहुल गांधी के 14 दिन बाद वीडियो संदेश ने झारखंड आंदोलन को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया। भाजपा और जदयू ने पूछा — जब झारखंड में आपकी सरकार है, तो जमीन पर क्यों नहीं आए? जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों की सीबीआई जांच की मांग अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए परीक्षा बन चुकी है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए 13-14 दिन बाद वीडियो संदेश जारी किया।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर 'सुविधा की राजनीति' का आरोप लगाया; कहा — वर्चुअल सहानुभूति नहीं, जमीनी समर्थन चाहिए।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि कांग्रेस के 4 मंत्री झारखंड सरकार में हैं, फिर भी कोई छात्रों से नहीं मिला।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उपसमिति बनाकर मामला उलझाया।
अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग पर अडिग हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा झारखंड के जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन देने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) ने 7 अगस्त को कांग्रेस पर 'सुविधा की राजनीति' करने का सीधा आरोप लगाया। अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

भाजपा का तीखा हमला

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, 'राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी एक्सपोज हो गई है। ये सुविधा की राजनीति करते हैं। छात्रों और आंदोलन के प्रति इनका रवैया इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस राज्य का है।' उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के छात्र 12-13 दिनों से राहुल गांधी से मैदान में आने की अपील कर रहे थे, लेकिन 13 दिन बाद केवल एक वीडियो संदेश जारी किया गया।

शाहदेव ने सवाल उठाया कि 'राहुल गांधी की वर्चुअल सहानुभूति बच्चों को नहीं चाहिए। बच्चे चाहते हैं कि आप जमीन पर आकर उनका समर्थन करें क्योंकि यहां आपकी सरकार है।'

बिहार भाजपा अध्यक्ष की चुनौती

पटना में बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि कांग्रेस के 4 मंत्री झारखंड सरकार में हैं, फिर भी उनमें से कोई छात्रों से मिलने नहीं गया। उन्होंने कहा, 'अगर वे इस मुद्दे को लेकर थोड़े भी गंभीर होते तो झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दबाव बनाते कि सीबीआई जांच का आदेश दिलाएं।' सरावगी ने यह भी जोड़ा कि 'पीएम मोदी छात्र हित की बात करते हैं लेकिन राहुल गांधी केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम करते हैं।'

जदयू का सवाल — 14वें दिन क्यों जागे?

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने तीखे शब्दों में पूछा, 'पहला सवाल यही है कि ये लोग 14वें दिन गहरी नींद से क्यों जागे हैं।' उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से यह मांग उठा रहे हैं कि मेरिट और योग्यता के बजाय 'मोटी कीमत' चुकाकर नौकरियां मिल रही हैं।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को सुलझाने की बजाय एक उपसमिति बनाकर उलझा दिया, जबकि छात्र सीधे मुख्यमंत्री से बात करना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'अब राहुल गांधी और हेमंत सोरेन की नींद टूटी है क्योंकि इन्हें पता है आने वाले समय में युवाओं का गुस्सा इन दोनों पर कितना भारी पड़ेगा।'

बिहार मंत्री की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि झारखंड में छात्र बिना किसी राजनीतिक दल के समर्थन के लगातार भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'राज्य सरकार को उनकी पीड़ा को स्वीकार करना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए।'

आंदोलन की पृष्ठभूमि

जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी कथित तौर पर लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग और भर्ती में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं। यह आंदोलन ऐसे समय में राजनीतिक रंग ले रहा है जब झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार है और विपक्ष इसे सत्तापक्ष की विफलता के रूप में पेश कर रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों पर राज्य सरकारें राजनीतिक दबाव में आई हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे में 'वर्चुअल समर्थन' की सीमाएं स्पष्ट हैं। असली सवाल यह है कि क्या जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों की सीबीआई जांच की मांग पर कोई भी दल ठोस कदम उठाएगा, या यह आंदोलन भी अगले चुनाव तक एक राजनीतिक मोहरा बना रहेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन किस मांग पर है?
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी कथित तौर पर झारखंड में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और भर्ती में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। वे शांतिपूर्ण भूख हड़ताल और प्रदर्शन के ज़रिए यह मांग उठा रहे हैं कि मेरिट के बजाय पैसे से नौकरियां मिल रही हैं।
राहुल गांधी ने झारखंड आंदोलन पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने आंदोलन शुरू होने के लगभग 13-14 दिन बाद एक वीडियो संदेश जारी कर जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया। वे मैदान में नहीं गए, जिस पर भाजपा और जदयू ने तीखी आलोचना की है।
भाजपा ने कांग्रेस पर 'सुविधा की राजनीति' का आरोप क्यों लगाया?
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का कहना है कि कांग्रेस का छात्र आंदोलनों के प्रति रवैया इस बात पर निर्भर करता है कि सत्ता किस राज्य में किसके पास है। झारखंड में खुद इंडिया गठबंधन की सरकार होने के बावजूद राहुल गांधी ने केवल वीडियो संदेश से काम चलाया, जिसे भाजपा 'वर्चुअल सहानुभूति' बता रही है।
जदयू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर क्या आरोप लगाए?
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामला सुलझाने की बजाय एक उपसमिति बनाकर उसे उलझा दिया। उन्होंने कहा कि छात्र सीधे मुख्यमंत्री से बात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें उचित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
जदयू और भाजपा दोनों का मानना है कि युवाओं का यह गुस्सा आने वाले समय में राहुल गांधी और हेमंत सोरेन दोनों पर भारी पड़ सकता है। झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार होने के कारण यह आंदोलन सत्तापक्ष के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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