8 अगस्त 2026
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झारखंड में बैकलॉग पदों पर नियुक्ति की मांग, मंत्री चमरा लिंडा ने आदिवासी छात्र संगठनों के साथ की बैठक

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झारखंड में बैकलॉग पदों पर नियुक्ति की मांग, मंत्री चमरा लिंडा ने आदिवासी छात्र संगठनों के साथ की बैठक

सारांश

झारखंड में बैकलॉग पदों पर भर्ती न होना, जनजातीय भाषाओं की उपेक्षा और सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली — ये तीन मुद्दे आदिवासी छात्र संगठनों की सरकार से सीधी टकराहट का केंद्र बन गए हैं। मंत्री चमरा लिंडा के साथ हुई बैठक में उठाई गई मांगें अब मुख्यमंत्री की मेज पर पहुँचेंगी।

मुख्य बातें

8 अगस्त 2026 को रांची में मंत्री चमरा लिंडा की अध्यक्षता में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बैठक हुई।
आदिवासी छात्र संघ और आदिवासी हॉस्टल के प्रतिनिधियों ने बैकलॉग पदों पर तत्काल नियुक्ति की माँग रखी।
सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए इसे रद्द करने और JPSC परीक्षाओं की जाँच की माँग की गई।
थर्ड-फोर्थ ग्रेड नौकरियों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को क्वालिफाइंग पेपर में शामिल करने की माँग उठी।
बैठक में उठाई गई सभी मांगें अब मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएंगी।
सुशील कुमार ने कहा कि झारखंड में अब तक स्पष्ट स्थानीय नीति घोषित नहीं हुई, जिससे स्थानीय युवाओं के रोजगार अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

झारखंड सरकार और छात्र संगठनों के बीच 8 अगस्त 2026 को रांची में एक अहम बैठक हुई, जिसमें मंत्री चमरा लिंडा के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधियों ने आदिवासी छात्र संघ, आदिवासी हॉस्टल और अन्य छात्र संगठनों की मांगें सुनीं। बैठक में सरकारी नियुक्तियों में बैकलॉग, जनजातीय भाषाओं का संरक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताएँ और थर्ड-फोर्थ ग्रेड नौकरियों में क्षेत्रीय भाषाओं को क्वालिफाइंग पेपर बनाने जैसे प्रमुख मुद्दे उठाए गए।

मुख्य मांगें और मुद्दे

छात्र संगठनों ने मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दे सरकार के सामने रखे। पहला — सरकारी नौकरियों में बैकलॉग पदों पर तत्काल नियुक्ति। संगठनों का कहना है कि कई विभागों में आदिवासी एवं अन्य आरक्षित वर्गों के पद वर्षों से रिक्त हैं और संविधानिक प्रावधानों के बावजूद इन पर समय पर भर्ती नहीं हो पाती। दूसरा — झारखंड की जनजातीय भाषाओं को शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं में उचित स्थान दिलाना, ताकि स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर तक छात्रों को अपनी मातृभाषा में अध्ययन का अवसर मिले।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री चमरा लिंडा ने बैठक के बाद कहा कि यह संभवतः छात्र संगठनों के साथ बातचीत का अंतिम चरण था। सरकार की ओर से उपस्थित सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि छात्रों के सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल आईडी जारी की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया या अन्य विषयों पर सुझाव देने वाले छात्रों की बात सरकार अपनी आगे की कार्यवाही में शामिल करेगी। बैठक में उठाई गई सभी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।

छात्र संगठनों का पक्ष

आदिवासी छात्र संघ के संयोजक डॉ. सुशील कुमार ने बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड को सामान्य राज्य की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। डॉ. कुमार ने आरोप लगाया कि झारखंड राज्य गठन के लंबे समय बाद भी स्पष्ट स्थानीय नीति घोषित नहीं हो सकी है, जिसका सीधा असर स्थानीय युवाओं के रोजगार अवसरों पर पड़ रहा है। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हो रही कुछ गतिविधियों पर भी संगठन की आपत्ति दर्ज कराई।

सीजीएल परीक्षा और जेपीएससी पर सवाल

आदिवासी हॉस्टल के प्रतिनिधि कार्तिक उरांव ने बैठक में सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और इसे तत्काल प्रभाव से रद्द करने की माँग की। उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं की भी स्वतंत्र जाँच कराने की माँग रखी। उरांव ने कहा कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड की सरकारी नौकरियों में जिस तरह हिंदी-अंग्रेजी को क्वालिफाइंग पेपर का दर्जा दिया जाता है, उसी तरह झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को भी क्वालिफाइंग पेपर में शामिल किया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा

बैठक में उठाए गए मुद्दों और सुझावों को अब मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा, जिसके बाद सरकार अपनी आगे की नीतिगत कार्यवाही तय करेगी। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये बैठकें महज औपचारिकता बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में बैकलॉग पदों पर नियुक्ति का मुद्दा क्या है?
सरकारी नौकरियों में आदिवासी और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित पद वर्षों से रिक्त हैं और समय पर भर्ती नहीं हो पाती। संविधानिक प्रावधानों के बावजूद इन बैकलॉग पदों को न भरना छात्र संगठनों की प्रमुख शिकायत है।
8 अगस्त को रांची में हुई बैठक में कौन-कौन शामिल था?
बैठक में मंत्री चमरा लिंडा के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधि, आदिवासी छात्र संघ के संयोजक डॉ. सुशील कुमार, आदिवासी हॉस्टल के प्रतिनिधि कार्तिक उरांव और अन्य छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार की ओर से सुदिव्य कुमार सोनू भी उपस्थित रहे।
सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की माँग क्यों की जा रही है?
आदिवासी हॉस्टल के प्रतिनिधि कार्तिक उरांव ने आरोप लगाया कि सीजीएल परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। उन्होंने इसे तत्काल प्रभाव से रद्द करने और JPSC परीक्षाओं की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग रखी।
जनजातीय भाषाओं को क्वालिफाइंग पेपर बनाने की माँग का क्या अर्थ है?
छात्र संगठनों की माँग है कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड की सरकारी नौकरियों में हिंदी-अंग्रेजी की तरह झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को भी क्वालिफाइंग पेपर का दर्जा दिया जाए। इससे स्थानीय आदिवासी युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में समान अवसर मिल सकेगा।
बैठक के बाद सरकार आगे क्या करेगी?
मंत्री चमरा लिंडा ने संकेत दिया कि यह छात्र संगठनों के साथ बातचीत का अंतिम चरण था। बैठक में उठाई गई सभी मांगें और सुझाव अब मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे और उसी के अनुरूप नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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