झारखंड: परीक्षा रद्द होने से नौकरी गँवाए अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन से हटाए, अब कुटे मैदान में धरना
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में 20 अगस्त को नियुक्ति परीक्षाएँ रद्द होने के बाद नौकरी से बेदखल किए गए चयनित अभ्यर्थियों को धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन (झारखंड मंत्रालय) के मुख्य द्वार से हटा दिया गया। सचिवालय सुरक्षा टीम ने निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को धरना समाप्त करने का निर्देश दिया, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने टेंट और सामान उठाकर विधानसभा के निकट कुटे मैदान में आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।
मुख्य घटनाक्रम
सुरक्षा अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट भवन उच्च सुरक्षा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का धरना-प्रदर्शन वहाँ नहीं हो सकता। इसके बाद सुरक्षा टीम ने धरना स्थल पर लगाए गए टेंट हटवा दिए। अभ्यर्थी बिना किसी विवाद के वहाँ से हटने को तैयार हो गए।
प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शन के लिए कुटे मैदान को निर्धारित स्थान बताया। जेएसएससी-सीजीएल के चयनित अभ्यर्थी पहले से ही वहाँ धरने पर बैठे हैं और अब फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों पर चयनित अभ्यर्थी भी वहीं पहुँचेंगे। इस तरह दोनों परीक्षाओं के प्रदर्शनकारियों का आंदोलन एक ही मंच से जारी रहने की संभावना है।
अभ्यर्थियों की माँग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उनका तर्क है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए — न कि उन अभ्यर्थियों को दंडित किया जाए जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी और चयनित हुए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना उनकी किसी गलती के नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। वे पहले ही इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
सरकार का निर्णय
झारखंड सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जाँच के आधार पर कई परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के विरुद्ध चयनित अभ्यर्थी अलग-अलग स्तरों पर विरोध कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि दोनों परीक्षाओं — जेएसएससी-सीजीएल और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती — के अभ्यर्थियों का एकजुट होना आंदोलन को और व्यापक रूप दे सकता है। न्यायालय में लंबित मामलों के नतीजे और सरकार की अगली प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि इन अभ्यर्थियों को राहत मिलती है या नहीं।