झारखंड शराब घोटाला: एसीबी ने पूर्व उत्पाद आयुक्त समेत तीन अधिकारियों को 4 अगस्त को पूछताछ के लिए तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जाँच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने उत्पाद विभाग और झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) से जुड़े तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को 4 अगस्त को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। 29 जुलाई को रांची से मिली जानकारी के अनुसार, इन अधिकारियों से पहले दर्ज बयानों, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर स्पष्टीकरण माँगा जाएगा।
किन अधिकारियों को भेजा गया समन
एसीबी ने जिन तीन अधिकारियों को तलब किया है, उनमें तत्कालीन उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त (उत्पाद) गजेंद्र सिंह और जेएसबीसीएल के तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास शामिल हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार, शराब नीति, आपूर्ति व्यवस्था, जेएसबीसीएल की कार्यप्रणाली और उससे जुड़ी कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है।
जाँच का दायरा और तरीका
एसीबी फिलहाल पहले दर्ज बयानों का दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही है। जहाँ भी किसी तथ्य को लेकर संदेह या अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता महसूस हो रही है, संबंधित अधिकारियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत टेंडर प्रक्रिया की पूरी शृंखला — निविदा की शर्तें, उनमें किए गए संशोधन, संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं की भूमिका तथा टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों की प्रक्रिया — की जाँच की जा रही है।
वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल
जाँच एजेंसी के अनुसार, बैंक गारंटी, भुगतान, सरकारी राजस्व की वसूली और अन्य वित्तीय दायित्वों से जुड़े रिकॉर्ड भी जाँच के दायरे में हैं। एसीबी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं प्रक्रिया में किसी स्तर पर हुई कथित अनियमितता के कारण सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं पहुँचा। इसके अतिरिक्त शराब की आपूर्ति, खुदरा दुकानों के संचालन, नकद संग्रह, बैंक में राशि जमा कराने की प्रक्रिया, ऑडिट रिपोर्ट और राजस्व वसूली से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला झारखंड में शासन और पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस के केंद्र में है। 4 अगस्त को होने वाली पूछताछ के नतीजे यह तय करेंगे कि जाँच आगे किस दिशा में बढ़ती है और क्या अन्य अधिकारियों या संस्थाओं को भी एसीबी के दायरे में लाया जाएगा।