झारखंड में एसआईआर से वोटर लिस्ट छंटाई की कोशिश: झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय का केंद्र पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने 13 जून 2026 को रांची में कई राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) के ज़रिए मतदाता सूची सत्यापन का असली मकसद बड़ी संख्या में लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करना है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।
एसआईआर पर झामुमो का आरोप
मनोज पांडेय ने कहा कि एसआईआर की आड़ में झारखंड में मतदाताओं के नाम सूची से काटने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने माँग की कि उत्तराखंड की तर्ज पर झारखंड में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, जिससे नागरिक सरलता से अपना नाम मतदाता सूची में खोज और सत्यापित कर सकें। झामुमो ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मुद्दे पर पूरी तरह सक्रिय है और सरकार पर दबाव बनाए रखेगी।
नीट विवाद पर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की माँग
पांडेय ने नीट पेपर लीक मामले पर भी केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा कब देंगे। उनके अनुसार, लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले में जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। गौरतलब है कि नीट विवाद को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं और मामला न्यायालय तक पहुँचा है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर तीखा सवाल
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के विरुद्ध अमेरिका के समक्ष विरोध दर्ज कराने पर पांडेय ने कहा कि केवल निंदा या विरोध दर्ज कराने से कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने माँग की कि सरकार ठोस कूटनीतिक और राजनीतिक कदम उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरों में इतने व्यस्त रहे हैं कि दुनिया में शायद ही 10-15 देश बचे हों जहाँ उन्होंने यात्रा न की हो — और इस आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री को 'टूरिज्म मोड' में बताया।
भाजपा पर सांप्रदायिक तनाव का आरोप
झामुमो प्रवक्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यदि कोई राजनीतिक दल दो समुदायों के बीच जानबूझकर तनाव पैदा करता है, तो वह भाजपा है। हालाँकि उन्होंने किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई।
आगे क्या
झामुमो के इन बयानों से झारखंड में एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद और गहराने के संकेत हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर बहस का केंद्र बनी रह सकती है।