10 अगस्त 2026
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झारखंड बना सरप्लस बिजली राज्य: पीवीयूएनएल की दूसरी 800 मेगावाट यूनिट चालू, अब 3,885 मेगावाट उपलब्ध

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झारखंड बना सरप्लस बिजली राज्य: पीवीयूएनएल की दूसरी 800 मेगावाट यूनिट चालू, अब 3,885 मेगावाट उपलब्ध

सारांश

झारखंड ने बिजली उत्पादन में नया अध्याय लिखा — पीवीयूएनएल की दूसरी 800 मेगावाट इकाई चालू होने के बाद राज्य के पास अब 3,885 मेगावाट उपलब्ध है, जो माँग से 600 मेगावाट अधिक है। अब राज्य अतिरिक्त बिजली बेचकर राजस्व भी कमा सकेगा।

मुख्य बातें

पीवीयूएनएल की 800 मेगावाट क्षमता की दूसरी इकाई ने 25 जून 2026 की दरमियानी रात से व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया।
दोनों इकाइयों से झारखंड को 1,360 मेगावाट बिजली मिलेगी; कुल उपलब्धता 3,885 मेगावाट हुई।
राज्य की औसत माँग 3,000 मेगावाट के मुकाबले अब 600 मेगावाट अधिक बिजली उपलब्ध।
एनटीपीसी (74%) और जेबीवीएनएल (26%) के संयुक्त उपक्रम पीवीयूएनएल का दीर्घकालिक लक्ष्य 4,000 मेगावाट उत्पादन क्षमता।
तीसरी इकाई के अगले कुछ महीनों में चालू होने की संभावना; पहले चरण में कुल 2,400 मेगावाट क्षमता।
सुपरक्रिटिकल तकनीक, एयर-कूल्ड कंडेंसर और 100% ड्राई ऐश हैंडलिंग से पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम।

झारखंड ने 25 जून 2026 को ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार किया — रामगढ़ जिले के पतरातू में स्थित पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की 800 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी इकाई ने बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात से व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया। इस उपलब्धि के साथ झारखंड न केवल बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है, बल्कि अब वह अधिशेष (सरप्लस) बिजली वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

कितनी बिजली मिलेगी झारखंड को

नई इकाई से उत्पादित 800 मेगावाट बिजली में से 85 प्रतिशत यानी 680 मेगावाट झारखंड को आवंटित होगी। इससे पहले नवंबर 2025 में चालू हुई पहली 800 मेगावाट इकाई से भी राज्य को 680 मेगावाट बिजली मिल रही है। दोनों इकाइयों के सक्रिय होने के बाद केवल पतरातू परियोजना से ही झारखंड को 1,360 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी।

ऊर्जा विभाग के आँकड़ों के अनुसार, राज्य की वर्तमान औसत बिजली माँग लगभग 3,000 मेगावाट है। पतरातू की दोनों इकाइयों सहित अन्य स्रोतों को मिलाकर अब झारखंड के पास कुल 3,885 मेगावाट बिजली उपलब्ध है — यानी माँग से करीब 600 मेगावाट अधिक

परियोजना की संरचना और तकनीक

पीवीयूएनएल देश की अग्रणी बिजली कंपनी एनटीपीसी (NTPC) और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) का संयुक्त उपक्रम है। इसमें एनटीपीसी की 74 प्रतिशत और जेबीवीएनएल की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

परियोजना को अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल तकनीक पर विकसित किया गया है। पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए एयर-कूल्ड कंडेंसर और 100 प्रतिशत ड्राई ऐश हैंडलिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। संयंत्र के लिए कोयला लातेहार के बनहर्दीह कोल ब्लॉक से और पानी पतरातू डैम से उपलब्ध कराया जा रहा है।

दीर्घकालिक लक्ष्य और तीसरी इकाई

परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना है। पहले चरण में 2,400 मेगावाट क्षमता की तीन इकाइयाँ बनाई जा रही हैं — जिनमें से दो चालू हो चुकी हैं। तीसरी इकाई के अगले कुछ महीनों में चालू होने की संभावना है।

आम जनता और उद्योगों पर असर

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस परियोजना से राज्य के सभी जिलों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और महँगी दरों पर बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने की जरूरत कम होगी। उद्योगों को स्थिर और निर्बाध बिजली मिलने से निवेश और रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौरतलब है कि विशेषज्ञों के अनुसार, नॉन-पीक आवर में अतिरिक्त 600 मेगावाट बिजली की बिक्री कर राज्य अतिरिक्त राजस्व भी अर्जित कर सकेगा — जो झारखंड के वित्तीय संसाधनों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह अतिरिक्त 600 मेगावाट बिजली वास्तव में आम उपभोक्ताओं तक पहुँचती है या केवल कागजी आँकड़ों में रहती है। झारखंड में वितरण नेटवर्क की कमज़ोरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली चोरी की पुरानी समस्या इस उपलब्धि की व्यावहारिक सीमाएँ तय करती हैं। अतिरिक्त बिजली बेचने से राजस्व अर्जन की संभावना तभी साकार होगी जब राज्य के पास खरीदार राज्यों के साथ दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते (PPA) हों। तीसरी इकाई के चालू होने के बाद पीवीयूएनएल की क्षमता और बढ़ेगी — तब वितरण सुधार की प्राथमिकता उत्पादन से कम नहीं होनी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीवीयूएनएल की दूसरी 800 मेगावाट यूनिट कब चालू हुई?
पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की दूसरी 800 मेगावाट इकाई का व्यावसायिक उत्पादन 25 जून 2026 की बुधवार-गुरुवार दरमियानी रात से शुरू हुआ। इससे पहले पहली 800 मेगावाट इकाई नवंबर 2025 में चालू हुई थी।
झारखंड के पास अब कुल कितनी बिजली उपलब्ध है?
ऊर्जा विभाग के आँकड़ों के अनुसार, पतरातू परियोजना की दोनों इकाइयों सहित अन्य स्रोतों को मिलाकर झारखंड के पास अब लगभग 3,885 मेगावाट बिजली उपलब्ध है। राज्य की औसत माँग करीब 3,000 मेगावाट है, यानी लगभग 600 मेगावाट अधिशेष है।
पीवीयूएनएल परियोजना में एनटीपीसी और जेबीवीएनएल की क्या भूमिका है?
पीवीयूएनएल, एनटीपीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) का संयुक्त उपक्रम है। इसमें एनटीपीसी की 74 प्रतिशत और जेबीवीएनएल की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
पतरातू परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है?
परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना है। पहले चरण में 2,400 मेगावाट की तीन इकाइयाँ बनाई जा रही हैं — दो चालू हो चुकी हैं और तीसरी के अगले कुछ महीनों में शुरू होने की संभावना है।
अतिरिक्त बिजली से झारखंड को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, नॉन-पीक आवर में अतिरिक्त 600 मेगावाट बिजली बेचकर राज्य अतिरिक्त राजस्व कमा सकेगा। साथ ही उद्योगों को स्थिर बिजली मिलने से निवेश और रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है और महँगे बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद की जरूरत कम होगी।
राष्ट्र प्रेस
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