जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने 50 आतंक पीड़ित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र दिए
सारांश
Key Takeaways
- अनुकंपा नियुक्ति पत्र 50 आतंक पीड़ित परिवारों को प्रदान किए गए।
- उपराज्यपाल ने इस पहल का नाम 'शरणस्थली' रखा।
- यह कदम परिवारों को नौकरी और पुनर्वास में मदद करेगा।
- जम्मू-कश्मीर में अब तक 400 से अधिक परिवारों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।
- सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है।
श्रीनगर, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रविवार को उन्होंने 50 आतंक पीड़ितों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति के पत्र प्रदान किए। यह आयोजन श्रीनगर के लोक भवन ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ, जहां प्रशासन की ओर से यह पहल की गई।
उपराज्यपाल ने इस कार्यक्रम का नाम 'शरणस्थली' रखा और कहा कि इसका उद्देश्य आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को रोजगार देकर उन्हें नई दिशा प्रदान करना और सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता करना है।
इस अवसर पर एलजी मनोज सिन्हा ने बताया कि कई आतंकवाद प्रभावित परिवार लम्बे समय से सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे थे। रोजगार मुहैया कराकर हम उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण लाने का प्रयास कर रहे हैं। यह उन्हें अपने जीवन को फिर से संवारने का मौका देगा।
उन्होंने इसे पीड़ित परिवारों के लिए ईद का तोहफा भी बताया। एलजी ने कहा, "सभी परिवारों को ईद मुबारक। ये नियुक्ति पत्र न्याय, सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक हैं। हमें मिलकर युवाओं का मार्गदर्शन करना होगा और जम्मू-कश्मीर को बेहतर भविष्य की ओर ले जाना होगा।"
उपराज्यपाल ने बताया कि अब तक आतंक पीड़ितों के 400 से अधिक परिवारों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये नियुक्तियां पूरी तरह से वैध और वास्तविक हैं। यदि कहीं कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसे तुरंत ठीक किया जाएगा।
मनोज सिन्हा ने कहा कि कई अन्य मामलों पर भी कार्य चल रहा है और प्रशासन तथा पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। न्याय केवल कागजों पर नहीं, बल्कि दिलों के अंधेरे को दूर कर उम्मीद की नई किरण जगाने का नाम है।
उन्होंने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के दर्द का उल्लेख करते हुए कहा कि 1990 के दशक से आतंकवाद ने कई परिवारों के सपनों और स्थिरता को छीन लिया। उन्होंने कहा कि कई पीड़ित उस समय केवल 12-13 साल के बच्चे थे, जब यह त्रासदी उनके परिवारों पर आई।
उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके पुनर्वास और समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास जारी है। जिन मामलों में अब तक आवाज नहीं उठाई गई, उन्हें भी अप्रैल में समीक्षा के लिए लिया जाएगा।
मनोज सिन्हा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जम्मू-कश्मीर की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। उनके अनुसार आज राज्य में न्याय, समानता और आत्मनिर्भरता पर आधारित एक मजबूत ढांचा विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के 16 युवाओं का चयन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में हुआ है और राज्य की टीम ने रणजी ट्रॉफी में भी जीत
सुरक्षा के मुद्दे पर मनोज सिन्हा ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। आतंक को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और समाज को भी ऐसे तत्वों को पूरी तरह अस्वीकृत करना होगा।