10 अगस्त 2026
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पंचायतें बनें नवाचार और डिजिटल शासन का केंद्र: LG मनोज सिन्हा का श्रीनगर में आह्वान

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पंचायतें बनें नवाचार और डिजिटल शासन का केंद्र: LG मनोज सिन्हा का श्रीनगर में आह्वान

सारांश

श्रीनगर की 'सेवा से समृद्धि' कार्यशाला में LG मनोज सिन्हा ने पंचायतों को डिजिटल शासन का केंद्र बनाने का आह्वान किया। 2020 में 154 ट्रकों में फाइलें ढोने से लेकर तीन वर्षों में 1,100+ सेवाएँ ऑनलाइन करने तक — जम्मू-कश्मीर का यह सफर जमीनी शासन की बदलती तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 23 जून 2026 को श्रीनगर में 'सेवा से समृद्धि' क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित किया।
उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं (PRI) को नवाचार, समान अवसर और जनविश्वास के केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
2020 में जम्मू-कश्मीर का प्रशासन 154 ट्रकों में फाइलें ढोने पर निर्भर था; डिजिटलीकरण के बाद यह तस्वीर बदली।
तीन वर्षों के भीतर 1,100 से अधिक सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं।
कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा SKICC, श्रीनगर में किया गया।
जमीनी शासन को PM नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' दृष्टिकोण से जोड़ा गया।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 23 जून 2026 को श्रीनगर में स्पष्ट संदेश दिया कि पंचायती राज संस्थाओं को महज प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, बल्कि नवाचार, डिजिटल शासन और जनविश्वास के जीवंत केंद्र बनना होगा। उन्होंने शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (SKICC) में आयोजित 'सेवा से समृद्धि: पंचायत-आधारित सेवा वितरण पर क्षेत्रीय कार्यशाला' को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कार्यशाला का उद्देश्य और संदर्भ

केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। उपराज्यपाल सिन्हा ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए जम्मू-कश्मीर में इस आयोजन के लिए केंद्रीय मंत्रालय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पंचायत-आधारित सेवा वितरण उनके दिल के करीब है और यह शासन प्रणाली के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है।

जम्मू-कश्मीर में पंचायती राज का सफर

उपराज्यपाल ने स्वीकार किया कि अतीत में जम्मू-कश्मीर में पूर्णतः कार्यशील त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का अभाव था। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में धन, कार्यों और पदाधिकारियों के हस्तांतरण के ज़रिये स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं। चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त रूप से जिला योजनाएँ तैयार की गईं और जमीनी स्तर पर निर्धारित विकास प्राथमिकताओं को लागू किया गया, जिससे गाँवों में कई प्रभावशाली परियोजनाएँ साकार हो सकीं।

154 ट्रकों से डिजिटल शासन तक का बदलाव

अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों को याद करते हुए सिन्हा ने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा किया। उन्होंने कहा कि जब वे 2020 में जम्मू-कश्मीर आए, तो उन्होंने लगभग 154 ट्रकों को श्रीनगर से जम्मू तक सरकारी फाइलें ले जाते देखा — यह दरबार मूव प्रणाली की विरासत थी। डिजिटल युग में भी फाइलों की इस भौतिक आवाजाही पर प्रशासन की निर्भरता उन्हें चकित कर गई।

इसके बाद प्रशासन ने डिजिटलीकरण को गति दी। परिणामस्वरूप, तीन वर्षों के भीतर 1,100 से अधिक सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं, जिससे जम्मू-कश्मीर डिजिटल सेवा वितरण में देश के अग्रणी क्षेत्रों में शुमार हो गया।

विकसित भारत के दृष्टिकोण से जुड़ाव

उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि जमीनी स्तर का शासन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को और मजबूत करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी नागरिकों को पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से सेवाएँ पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हुई है।

आगे की राह

यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित हुई है जब केंद्र सरकार पूरे देश में पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जम्मू-कश्मीर के डिजिटल शासन के अनुभव को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किए जाने से उम्मीद है कि अन्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी इससे सीख लेकर अपनी पंचायतों को सशक्त बनाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

100 ऑनलाइन सेवाओं तक का सफर प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह है कि ये सेवाएँ दूरदराज के गाँवों तक कितनी पहुँच बना पाई हैं। पंचायती राज का इतिहास बताता है कि संस्थागत ढाँचा और डिजिटल बुनियादी ढाँचा होने के बावजूद, जमीनी सशक्तिकरण तब तक अधूरा रहता है जब तक स्थानीय प्रतिनिधियों को वित्तीय स्वायत्तता न मिले। जम्मू-कश्मीर, जो अभी भी केंद्र शासित प्रदेश है, में निर्वाचित पंचायतों और नियुक्त प्रशासन के बीच का तनाव एक ऐसा पहलू है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

LG मनोज सिन्हा ने पंचायतों के बारे में क्या कहा?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को महज प्रशासनिक इकाइयों से आगे बढ़कर नवाचार, डिजिटल शासन और जनविश्वास के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने इसे PM मोदी के 'विकसित भारत' दृष्टिकोण से जोड़ा।
'सेवा से समृद्धि' कार्यशाला क्या है और यह कहाँ आयोजित हुई?
यह केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला है, जिसका विषय पंचायत-आधारित सेवा वितरण है। इसका आयोजन 23 जून 2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (SKICC) में हुआ।
जम्मू-कश्मीर में डिजिटल शासन में क्या बदलाव आए हैं?
2020 में जम्मू-कश्मीर का प्रशासन दरबार मूव प्रणाली के तहत लगभग 154 ट्रकों में सरकारी फाइलें ढोने पर निर्भर था। डिजिटलीकरण के बाद तीन वर्षों के भीतर 1,100 से अधिक सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं।
जम्मू-कश्मीर में पंचायती राज व्यवस्था को कैसे मजबूत किया गया?
हाल के वर्षों में धन, कार्यों और पदाधिकारियों के हस्तांतरण के माध्यम से स्थानीय निकायों को सशक्त बनाया गया है। चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ मिलकर जिला योजनाएँ तैयार की गईं और जमीनी स्तर पर विकास प्राथमिकताओं को लागू किया गया।
पंचायत-आधारित सेवा वितरण क्यों महत्वपूर्ण है?
पंचायत-आधारित सेवा वितरण नागरिकों तक पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से सरकारी सुविधाएँ पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। यह 'विकसित भारत' के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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