जोधपुर बहन आत्महत्या कांड: एनसीडब्ल्यू ने लिया स्वतः संज्ञान, राजस्थान पुलिस को 7 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने मंगलवार, 19 मई को राजस्थान के जोधपुर जिले की दो बहनों के साथ कथित तौर पर वर्षों तक हुए गैंगरेप, ब्लैकमेल और यौन शोषण के बाद दोनों की आत्महत्या से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने सात दिनों के भीतर राजस्थान पुलिस से विस्तृत 'की गई कार्रवाई रिपोर्ट' (एटीआर) तलब की है।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायत के अनुसार, जोधपुर के एक ग्रामीण इलाके की बड़ी बहन को स्थानीय 'ई-मित्र' सेवा केंद्र संचालक महिपाल ने अपने जाल में फँसाया। महिपाल ने कथित तौर पर उसकी आपत्तिजनक वीडियो गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड कीं और फिर उन्हीं वीडियो के ज़रिए उसे ब्लैकमेल किया। छोटी बहन द्वारा 11 अप्रैल को दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत में महिपाल, शिवराज, गोपाल, विजराम, दिनेश, मनोज और पुखराज सहित आठ लोगों पर गैंगरेप, ब्लैकमेल और बार-बार धमकाने के आरोप लगाए गए थे।
छोटी बहन के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता का करीब चार साल तक शोषण किया और उससे लगातार पैसे ऐंठे। इस लंबे उत्पीड़न और मानसिक आघात को सहन न कर पाने के कारण बड़ी बहन ने कथित तौर पर 20 मार्च को आत्महत्या कर ली। उसने पुलिस को पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि न्याय नहीं मिला तो वह कोई चरम कदम उठा लेगी।
पुलिस निष्क्रियता के आरोप
परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अगले एक महीने में मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कथित निष्क्रियता से क्षुब्ध होकर छोटी बहन ने भी — बड़ी बहन की मृत्यु के लगभग दो महीने बाद — अपनी जान दे दी। यह ऐसे समय में हुआ जब वह न्याय के लिए बार-बार पुलिस के दरवाज़े खटखटा रही थी। इस घटनाक्रम ने जोधपुर के ग्रामीण इलाके में व्यापक आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया।
एनसीडब्ल्यू की कार्रवाई
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया राहटकर ने राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर 'तत्काल, निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर कार्रवाई' सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा है:
एफआईआर में लागू की गई कानूनी धाराएँ; सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति; जाँच की मौजूदा प्रगति; डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की स्थिति; और पीड़ितों के परिवार को दी जा रही कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, सुरक्षा एवं पुनर्वास सहायता का ब्यौरा।
आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि पूर्व में की गई शिकायतों पर पुलिस की कथित निष्क्रियता के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है या नहीं।
आयोग का कड़ा रुख
एनसीडब्ल्यू ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह के जघन्य अपराध और जाँच या प्रतिक्रिया के किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने यह भी पूछा है कि भविष्य में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों और ब्लैकमेल के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
राजस्थान पुलिस को सात दिनों के भीतर एनसीडब्ल्यू को विस्तृत एटीआर सौंपनी होगी। मामले में स्थानीय सामाजिक संगठन और नागरिक समूह न्याय की माँग को लेकर सक्रिय हैं। गौरतलब है कि यह मामला राजस्थान में महिला सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही को लेकर पहले से चल रही बहस को और तीखा कर देता है।