24 जुलाई 2026
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जेपीएससी सदस्य जमाल अहमद की संपत्ति पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल, एसीबी जांच की मांग

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जेपीएससी सदस्य जमाल अहमद की संपत्ति पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल, एसीबी जांच की मांग

सारांश

झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी सदस्य जमाल अहमद पर पद का दुरुपयोग कर बेनामी संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है और CM सोरेन से एसीबी जांच की माँग की है — यह मामला ऐसे समय आया है जब 14वीं सिविल सेवा परीक्षा विवाद में जेपीएससी पहले से ही सीआईडी जांच के दायरे में है।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेपीएससी सदस्य जमाल अहमद की संपत्तियों की एसीबी जांच की माँग की।
आरोप है कि जमाल अहमद ने पद का दुरुपयोग कर रांची और हजारीबाग में चल-अचल एवं कथित बेनामी संपत्तियाँ अर्जित की हैं।
वर्ष 2008 में जमाल अहमद की लेक्चरर नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई कर रही है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में नियमों की अनदेखी कर यह नियुक्ति की गई।
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा विवाद को लेकर जेपीएससी की कार्यप्रणाली की जांच सीआईडी पहले से कर रही है।
मरांडी ने माँग की है कि जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए जमाल अहमद को तत्काल जेपीएससी सदस्य पद से हटाया जाए।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के सदस्य जमाल अहमद की कथित आय से अधिक संपत्तियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से विस्तृत जांच कराने की मांग की है। इस संदर्भ में मरांडी ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को औपचारिक पत्र लिखकर आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

मरांडी के आरोप: क्या है पूरा मामला

मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जमाल अहमद ने जेपीएससी सदस्य के पद पर रहते हुए कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग करके चल और अचल संपत्तियाँ अर्जित की हैं। उनके अनुसार, रांची में जमाल अहमद के नाम एक बड़ा फ्लैट है और शहर में एक अन्य फ्लैट खरीदने की तैयारी की सूचना है। इसके अलावा हजारीबाग में भी उनके नाम अथवा बेनामी संपत्तियाँ होने का आरोप लगाया गया है।

नियुक्ति प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में उल्लेख किया है कि जमाल अहमद पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर पद पर हुई थी। उस नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। मरांडी का तर्क है कि जिस व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया ही जांच के दायरे में हो, उसे जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में नियमों की अनदेखी कर यह नियुक्ति की गई, जिससे आयोग की निष्पक्षता और राज्य के युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ।

जेपीएससी की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में

गौरतलब है कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे विवाद के बाद जेपीएससी की कार्यप्रणाली पहले से ही जांच के दायरे में है। मामले की जांच सीआईडी कर रही है और आयोग से जुड़े कई अधिकारियों तथा परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थियों में पहले से असंतोष व्याप्त है।

मरांडी की मुख्यमंत्री से माँग

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से माँग की है कि जमाल अहमद की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के स्रोतों की एसीबी से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उन्हें तत्काल जेपीएससी सदस्य के पद से हटाया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा

अब सबकी नज़र मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया पर है। यदि सरकार एसीबी जांच के आदेश देती है, तो यह जेपीएससी के भीतर पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। झारखंड के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए यह मामला आयोग की साख से सीधे जुड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक भर्ती संस्था की साख का है। जेपीएससी पहले से 14वीं सिविल सेवा परीक्षा विवाद में सीआईडी जांच झेल रही है — ऐसे में एक सदस्य की नियुक्ति प्रक्रिया पर सीबीआई जांच और संपत्ति विवाद एक साथ उभरना आयोग की संस्थागत कमज़ोरी को उजागर करता है। सवाल यह है कि सरकार विपक्ष की माँग को राजनीतिक हमला कहकर खारिज करती है या पारदर्शी जांच से युवाओं का भरोसा बहाल करती है — दोनों विकल्पों के राजनीतिक निहितार्थ स्पष्ट हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने जमाल अहमद के खिलाफ क्या आरोप लगाए हैं?
मरांडी ने आरोप लगाया है कि जेपीएससी सदस्य जमाल अहमद ने अपने पद का दुरुपयोग कर रांची और हजारीबाग में चल-अचल एवं कथित बेनामी संपत्तियाँ अर्जित की हैं, जो उनकी ज्ञात आय से अधिक हैं। उन्होंने एसीबी से इन संपत्तियों, बैंक खातों और आय के स्रोतों की विस्तृत जांच की माँग की है।
जमाल अहमद की नियुक्ति विवादास्पद क्यों है?
जमाल अहमद पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और वर्ष 2008 में उनकी लेक्चरर पद पर नियुक्ति हुई थी। उस नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई कर रही है। मरांडी का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य नहीं बनाया जाना चाहिए था।
जेपीएससी पहले से किस विवाद में घिरी है?
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे विवाद के बाद जेपीएससी की कार्यप्रणाली की जांच सीआईडी कर रही है। आयोग से जुड़े कई अधिकारियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई हो चुकी है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री से क्या माँगें रखी हैं?
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से माँग की है कि जमाल अहमद की संपत्तियों, बैंक खातों और आय के स्रोतों की एसीबी से जांच कराई जाए और जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उन्हें तत्काल जेपीएससी सदस्य पद से हटाया जाए।
इस मामले का झारखंड के प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
जेपीएससी की विश्वसनीयता पर उठते सवाल सीधे तौर पर उन लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित करते हैं जो राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर हैं। यदि एसीबी जांच होती है और आयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है, तो इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता में युवाओं का भरोसा बहाल हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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