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कैलाश मानसरोवर यात्रा: 77 प्रतिभागी व 3 स्वयंसेवक अब भी लापता, ईशा फाउंडेशन ने जारी किया नया अपडेट

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कैलाश मानसरोवर यात्रा: 77 प्रतिभागी व 3 स्वयंसेवक अब भी लापता, ईशा फाउंडेशन ने जारी किया नया अपडेट

सारांश

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के दो सप्ताह बाद भी कैलाश मानसरोवर यात्रा के 77 प्रतिभागी और 3 स्वयंसेवक लापता हैं। ईशा फाउंडेशन 19 देशों के दूतावासों, नेपाली और चीनी अधिकारियों से समन्वय में जुटी है, जबकि घटनास्थल तक पहुँच अभी भी प्रतिबंधित है।

मुख्य बातें

कैलाश मानसरोवर यात्रा के 77 प्रतिभागी और 3 स्वयंसेवक बाढ़ के दो सप्ताह बाद भी लापता हैं।
ईशा फाउंडेशन चीनी, भारतीय, नेपाली अधिकारियों और 19 देशों के दूतावासों के साथ नियमित संपर्क में है।
ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुँच चीनी और नेपाली दोनों अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधित; कोई निजी संगठन घटनास्थल तक नहीं जा सकता।
नेपाल में 25 नेपाली स्वयंसेवकों की टीम अस्पतालों, मुर्दाघरों, पुलिस और डीएनए सेंटर से समन्वय कर रही है।
8 देशों में हॉटलाइन और ईमेल पर 24 घंटे समर्पित टीम काम कर रही है।
फाउंडेशन ने गोपनीयता नीति के तहत प्रभावित लोगों के नाम या फोटो सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया है।

ईशा फाउंडेशन ने 13 सितंबर 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ के दो सप्ताह बाद ताज़ा जानकारी सार्वजनिक की, जिसमें बताया गया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के 77 प्रतिभागी और 3 स्वयंसेवक अभी भी लापता हैं। फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि यह संख्या पिछले अपडेट के बाद से अपरिवर्तित है और पहचान का काम अधिकारियों द्वारा जारी है।

आपदा की पृष्ठभूमि और मौजूदा हालात

नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ को लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं। ईशा सेक्रेड वॉक्स की समन्वयक मां गंभीरी ने बताया कि प्रभावित परिवारों की मदद करना इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है और जैसे ही कोई सत्यापित जानकारी मिलती है, उसे परिजनों तक पहुँचाया जा रहा है। फाउंडेशन ने कहा कि वह इस दुखद आपदा से प्रभावित परिवारों और नेपाल के व्यापक समुदायों के साथ पूरी संवेदना रखता है।

बहुराष्ट्रीय समन्वय प्रयास

ईशा फाउंडेशन चीनी, भारतीय और नेपाली अधिकारियों के साथ-साथ 19 देशों के संबंधित दूतावासों से नियमित संपर्क में है। फाउंडेशन की टीमें इन चैनलों के ज़रिये लापता व्यक्तियों की जानकारी जुटा रही हैं, आधिकारिक प्रक्रियाओं को समझ रही हैं और सरकारी एवं कांसुलर माध्यमों से प्राप्त जानकारी प्रभावित परिवारों तक पहुँचा रही हैं।

फाउंडेशन के स्वयंसेवक अमेरिकी विदेश विभाग और ग्लोबल अफेयर्स कनाडा जैसी सरकारी एजेंसियों के भी संपर्क में रहे हैं। जहाँ चीनी अधिकारियों ने किसी एक राष्ट्रीयता के परिवारों को कोई प्रक्रिया बताई, वहाँ वह जानकारी अन्य सरकारों के साथ भी साझा की गई ताकि वे अपने नागरिकों के लिए उसी जानकारी की माँग कर सकें।

स्थल तक पहुँच पर प्रतिबंध

ग्यिरोंग पोर्ट (चीनी तरफ) तक पहुँच फोरेंसिक और बचाव उद्देश्यों के लिए चीनी अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधित है। नेपाल की तरफ से भी नेपाली अधिकारियों ने पहुँच पर रोक लगाई हुई है। किसी भी निजी व्यक्ति या संगठन को घटनास्थल के नज़दीक जाने की अनुमति नहीं दी गई है। ईशा के स्वयंसेवक पहले ग्यिरोंग टाउन में राहत प्रयासों की जानकारी लेने के लिए तैनात थे, किन्तु चीनी अधिकारियों द्वारा सभी गैर-आधिकारिक कर्मियों को क्षेत्र छोड़ने का निर्देश दिए जाने के बाद वे वहाँ से हट गए।

नेपाल में ज़मीनी राहत कार्य

नेपाल में जमीनी प्रयासों को समर्थन देने के लिए लगभग 25 नेपाली स्वयंसेवकों की एक टीम तैनात की गई है। इनकी स्थानीय भाषा की दक्षता अस्पतालों, मुर्दाघरों, पुलिस, सरकारी कार्यालयों और अन्य स्थानीय अधिकारियों से समन्वय में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हुई है। टीम ने नेपाल पुलिस और नेपाल टूरिस्ट पुलिस दोनों से संपर्क किया है — प्रभावित व्यक्तियों की पूरी सूची साझा की है और नियमित संपर्क बनाए रखा है। स्वयंसेवक नेटवर्क के ज़रिये नेपाली सेना से भी संपर्क स्थापित हुआ है। इसके अलावा, डीएनए सेंटर का भी दौरा किया गया ताकि पहचान प्रक्रिया और आवश्यकताओं को समझा जा सके।

गोपनीयता नीति और आगे की राह

फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि वह प्रभावित परिवारों और स्वयंसेवकों की गुमनामी व निजता की रक्षा के लिए किसी भी सार्वजनिक मंच या मीडिया पर प्रभावित लोगों के नाम, चित्र या व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं करेगा। 8 देशों में ईमेल और हॉटलाइन पर प्राप्त हर संदेश और फोन कॉल का जवाब देने के लिए समर्पित टीम 24 घंटे काम कर रही है। जैसे ही घटनास्थल तक नई पहुँच की अनुमति मिलती है, फाउंडेशन तत्काल अपडेट जारी करने का वचन देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह उन जटिलताओं की ओर भी इशारा करता है जो तब उत्पन्न होती हैं जब घटनास्थल तीन देशों की सीमाओं के संगम पर हो। ईशा फाउंडेशन का बहुराष्ट्रीय समन्वय प्रशंसनीय है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि कैलाश मानसरोवर जैसी संवेदनशील यात्राओं के लिए भारत सरकार के पास कोई केंद्रीकृत आपातकालीन प्रोटोकॉल क्यों नहीं है। पहचान के लिए डीएनए प्रक्रिया का देश-दर-देश अलग होना और सूचनाओं का बिखराव यह दर्शाता है कि ऐसी सीमापारीय आपदाओं के लिए कूटनीतिक तैयारी अभी भी अपर्याप्त है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश मानसरोवर यात्रा में कितने लोग अब भी लापता हैं?
ईशा फाउंडेशन के अनुसार, यात्रा के 77 प्रतिभागी और 3 स्वयंसेवक अभी भी लापता हैं। यह संख्या पिछले अपडेट के बाद से अपरिवर्तित है और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि घटनास्थल पर पहचान का काम जारी है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ कब आई और क्या हुआ था?
नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक बाढ़ आई, जिसे अब लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं। इस आपदा में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री प्रभावित हुए और दर्जनों लोग लापता हो गए।
ईशा फाउंडेशन लापता लोगों की खोज के लिए क्या कर रही है?
ईशा फाउंडेशन चीनी, भारतीय और नेपाली अधिकारियों तथा 19 देशों के दूतावासों से निरंतर संपर्क में है। नेपाल में 25 स्वयंसेवकों की टीम अस्पतालों, मुर्दाघरों और डीएनए सेंटर से समन्वय कर रही है, और 8 देशों में 24 घंटे हॉटलाइन सेवा चल रही है।
घटनास्थल ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुँचने में क्या बाधाएँ हैं?
चीनी अधिकारियों ने फोरेंसिक और बचाव उद्देश्यों के लिए ग्यिरोंग पोर्ट तक सभी निजी व्यक्तियों और संगठनों की पहुँच प्रतिबंधित की हुई है। नेपाल की तरफ से भी नेपाली अधिकारियों ने पहुँच पर रोक लगाई है।
प्रभावित परिवार ईशा फाउंडेशन से जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
ईशा फाउंडेशन 8 देशों में समर्पित हॉटलाइन और ईमेल सेवा के ज़रिये 24 घंटे उपलब्ध है। फाउंडेशन ने वचन दिया है कि कोई भी सत्यापित जानकारी पहले प्रभावित परिवारों को दी जाएगी और जहाँ उचित हो, सार्वजनिक की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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