27 जुलाई 2026
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कल्याण बनर्जी के बेटे का अभिषेक पर पलटवार: 'हम उनके कर्मचारी नहीं, शर्तें नहीं मानेंगे'

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कल्याण बनर्जी के बेटे का अभिषेक पर पलटवार: 'हम उनके कर्मचारी नहीं, शर्तें नहीं मानेंगे'

सारांश

तृणमूल के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी और TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच खुली जंग छिड़ गई है। कल्याण के बेटे सिरसान्या ने साफ कहा — 'हम उनके कर्मचारी नहीं।' यह टकराव पार्टी की अंदरूनी एकता के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

मुख्य बातें

सिरसान्या बंदोपाध्याय ने 11 जून को अभिषेक बनर्जी के 'दबदबे वाले' रवैये की सार्वजनिक आलोचना की।
कल्याण बनर्जी विधायकों के हस्ताक्षर मेल न खाने के मामले में अभिषेक की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे थे।
बुधवार की रात अभिषेक की टीम ने कल्याण बनर्जी को बिना पूर्व सूचना के हटाकर दूसरे वकील को नियुक्त किया — जिसे सिरसान्या ने 'अपमानजनक' बताया।
कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को खुलेआम चुनाव करने को कहा — 'घमंडी' अभिषेक या वे।
सिरसान्या ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस किसी एक व्यक्ति से बड़ी है — इसमें लाखों कार्यकर्ताओं की आवाज़ है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिरसान्या बंदोपाध्याय ने 11 जून को TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी के 'दबदबे वाले' रवैये पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके पिता अभिषेक के 'कर्मचारी' नहीं हैं और उन पर किसी प्रकार की शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं। यह बयान उस वक्त आया जब कल्याण बनर्जी ने खुद पार्टी नेतृत्व को एक तरह की चुनौती देते हुए कहा था कि उन्हें 'घमंडी' अभिषेक और उनके बीच किसी एक को चुनना होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

सिरसान्या बंदोपाध्याय ने बताया कि उनके पिता कल्याण बनर्जी विधायकों के हस्ताक्षर मेल न खाने से जुड़े एक अदालती मामले में अभिषेक बनर्जी की ओर से पैरवी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया जा रहा था, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट में कई मामलों के लंबित होने के कारण सुनवाई आगे की तारीखों पर टलती रही।

बंदोपाध्याय के अनुसार, बुधवार की रात अभिषेक बनर्जी की टीम की ओर से उन्हें सूचित किया गया कि उनकी कानूनी सेवाओं की अब आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एक अन्य वकील को नियुक्त कर लिया गया है। उन्होंने इस सूचना को अपने पिता के लिए 'अपमानजनक' करार दिया।

सिरसान्या का सीधा हमला

अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में सिरसान्या बंदोपाध्याय ने कहा, 'हम अभिषेक बनर्जी के कर्मचारी नहीं हैं, जिन्हें वह यह बता सकें कि क्या करना है और क्या नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के भरोसे और विश्वास की कमी के कारण ही मामला इस मोड़ पर पहुँचा।

बंदोपाध्याय ने आरोप लगाया कि अभिषेक वकीलों की एक समानांतर टीम तैयार कर रहे थे, जो काम करने का सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा, 'अभिषेक के साथ समस्या यह है कि वह किसी पर भरोसा नहीं कर सकते।'

कल्याण बनर्जी की भूमिका और वफादारी

कल्याण बनर्जी TMC के चार बार के सांसद और पार्टी के वरिष्ठतम चेहरों में से एक हैं। सिरसान्या ने अपने पिता की 'साफगोई' का बचाव करते हुए कहा कि जब कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके थे या मुश्किल वक्त में पीछे हट गए थे, तब भी कल्याण बनर्जी ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ी पार्टी है — इसमें लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाज़ शामिल है। यह टिप्पणी अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव पर एक सीधा कटाक्ष मानी जा रही है।

TMC में बढ़ती अंदरूनी दरार

यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर पुरानी और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच तनाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अभिषेक बनर्जी, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं, को पार्टी में दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि उनके कार्यशैली को लेकर वरिष्ठ नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को खुलेआम यह चुनाव करने को कहा कि वे अभिषेक के साथ हैं या उनके साथ — यह स्तर का टकराव TMC में दुर्लभ है और आने वाले दिनों में पार्टी की एकजुटता के लिए एक परीक्षा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी अपने भतीजे की बढ़ती केंद्रीयता को पार्टी की बहुलतावादी संस्कृति के साथ संतुलित कर पाएंगी — खासकर तब जब 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिरसान्या बंदोपाध्याय ने अभिषेक बनर्जी की आलोचना क्यों की?
सिरसान्या बंदोपाध्याय ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने उनके पिता कल्याण बनर्जी को बिना उचित सूचना के कलकत्ता हाई कोर्ट के एक मामले से हटा दिया और दूसरे वकील को नियुक्त कर लिया। उन्होंने इसे 'अपमानजनक' और अभिषेक के 'भरोसे की कमी' का नतीजा बताया।
कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच किस मामले को लेकर विवाद हुआ?
विवाद विधायकों के हस्ताक्षर मेल न खाने से जुड़े एक अदालती मामले को लेकर है, जिसमें कल्याण बनर्जी अभिषेक बनर्जी की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे थे। बंदोपाध्याय के अनुसार, सुनवाई अन्य लंबित मामलों के कारण टल रही थी, लेकिन अभिषेक के दखल के कारण कल्याण बनर्जी ने मामले से हटने का फैसला किया।
कल्याण बनर्जी ने TMC नेतृत्व को क्या चेतावनी दी?
कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को साफ शब्दों में कहा कि उन्हें 'घमंडी' अभिषेक बनर्जी और उनके बीच किसी एक को चुनना होगा, क्योंकि वह अभिषेक का 'अहंकार' बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह TMC में एक वरिष्ठ नेता की ओर से खुली चुनौती मानी जा रही है।
TMC में यह अंदरूनी कलह कितनी गंभीर है?
कल्याण बनर्जी TMC के चार बार के सांसद और पार्टी के संस्थापक चेहरों में से एक हैं। उनका इस स्तर पर खुलकर बोलना पार्टी में अंदरूनी असंतोष की गहराई को दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि यह विवाद वरिष्ठ नेताओं और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के बीच बढ़ती खाई का संकेत है।
सिरसान्या बंदोपाध्याय ने तृणमूल के बारे में क्या कहा?
सिरसान्या बंदोपाध्याय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ी पार्टी है और इसमें लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाज़ शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि जब बड़े नेता मुश्किल वक्त में पार्टी छोड़ गए, तब उनके पिता ममता बनर्जी के साथ डटे रहे।
राष्ट्र प्रेस
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