12 अगस्त 2026
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मेरठ की नन्ही बहनें महक-अनन्या की कांवड़ यात्रा: हरिद्वार से पैदल चलकर मम्मी-पापा के लिए जलाभिषेक

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मेरठ की नन्ही बहनें महक-अनन्या की कांवड़ यात्रा: हरिद्वार से पैदल चलकर मम्मी-पापा के लिए जलाभिषेक

सारांश

छह साल की उम्र, कंधों पर 11 लीटर गंगाजल की कांवड़ और दिल में मम्मी-पापा की लंबी उम्र की दुआ — मेरठ की नन्ही बहनें महक और अनन्या ने हरिद्वार से पैदल चलकर जो मिसाल कायम की, वह आस्था और निश्छल प्रेम की अनूठी कहानी है।

मुख्य बातें

मेरठ की सगी बहनें महक और अनन्या की उम्र महज छह साल है।
दोनों ने हरिद्वार से 11 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर पैदल यात्रा की।
एक सप्ताह की पदयात्रा के बाद 11 अगस्त, सोमवार को मेरठ पहुँचीं।
मंगलवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक कर माता-पिता की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।
रास्ते में स्थानीय लोगों ने दोनों बहनों का उत्साहवर्धन किया और आशीर्वाद दिया।

मेरठ की दो सगी बहनें — महक और अनन्या — ने महज छह साल की उम्र में वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े श्रद्धालुओं को भी प्रेरित कर दे। दोनों ने हरिद्वार से 11 लीटर गंगाजल की कांवड़ कंधों पर उठाकर पैदल यात्रा शुरू की और एक सप्ताह की अथक पदयात्रा के बाद सोमवार, 11 अगस्त को मेरठ पहुँचीं। उनका एकमात्र संकल्प था — बाबा भोलेनाथ के चरणों में जल अर्पित कर अपने माता-पिता की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करना।

यात्रा का आरंभ और संकल्प

नन्ही बहनों ने हरिद्वार से कांवड़ यात्रा का श्रीगणेश किया। 11 लीटर गंगाजल से भरी कांवड़ का भार उनके नन्हे कंधों पर था, लेकिन उनके चेहरे पर थकान की जगह उत्साह और आस्था की चमक थी। पूरे रास्ते 'बोल बम' के जयकारों के साथ वे आगे बढ़ती रहीं। महक और अनन्या ने बताया कि उन्होंने यह यात्रा अपने मम्मी-पापा की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना लेकर शुरू की थी।

मार्ग में मिला जनसमर्थन

जब दोनों बहनें सोमवार को मेरठ पहुँचीं, तो रास्ते में जिसने भी उन्हें देखा, वह उनकी आस्था और हौसले के आगे नतमस्तक हो गया। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह रुककर दोनों का उत्साहवर्धन किया और आशीर्वाद दिया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि सच्ची श्रद्धा की कोई उम्र नहीं होती।

जलाभिषेक और प्रार्थना

मंगलवार, 12 अगस्त को दोनों बहनों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। कांवड़ से लाए गंगाजल को शिवलिंग पर अर्पित करते समय उनकी एकमात्र प्रार्थना थी कि उनके मम्मी-पापा सदा स्वस्थ रहें और उनकी आयु दीर्घ हो। यह क्षण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रति बच्चों के निश्छल प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति बन गया।

आस्था और प्रेम की मिसाल

नन्ही बहनों की यह कांवड़ यात्रा मेरठ में चर्चा का विषय बन गई है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था की कहानी नहीं है — यह उस निश्छल पारिवारिक प्रेम की भी मिसाल है जो बचपन में सबसे शुद्ध रूप में दिखता है। महक और अनन्या की यह यात्रा आने वाले वर्षों में भी कांवड़ यात्रा की परंपरा में एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में याद की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रेम और आस्था पर टिका है। यह घटना यह भी रेखांकित करती है कि धार्मिक परंपराएँ किस तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती हैं — और बचपन में उनकी जड़ें कितनी गहरी होती हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महक और अनन्या कौन हैं और उन्होंने कांवड़ यात्रा क्यों की?
महक और अनन्या मेरठ की दो सगी बहनें हैं, जिनकी उम्र महज छह साल है। उन्होंने अपने माता-पिता की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए हरिद्वार से कांवड़ यात्रा की।
दोनों बहनों ने कहाँ से कहाँ तक की यात्रा की?
दोनों बहनों ने हरिद्वार से 11 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर पैदल यात्रा शुरू की और एक सप्ताह में मेरठ पहुँचीं।
जलाभिषेक कब और कहाँ किया गया?
दोनों बहनों ने मंगलवार, 12 अगस्त को मेरठ में शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। यह उनकी कांवड़ यात्रा का समापन था।
रास्ते में लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
मेरठ पहुँचने पर रास्ते में जिसने भी नन्ही बहनों को देखा, वह उनकी आस्था और हौसले से प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह उनका उत्साहवर्धन किया और आशीर्वाद दिया।
इस कांवड़ यात्रा को खास क्यों माना जा रहा है?
केवल छह साल की उम्र में 11 लीटर कांवड़ उठाकर हरिद्वार से मेरठ तक एक सप्ताह की पैदल यात्रा करना अपने आप में असाधारण है। यह यात्रा आस्था के साथ-साथ माता-पिता के प्रति बच्चों के निश्छल प्रेम की मिसाल बन गई है।
राष्ट्र प्रेस
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