सावन शिवरात्रि 2025: झंडेवालन और दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर में उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
सारांश
मुख्य बातें
सावन की शिवरात्रि पर 11 अगस्त को नई दिल्ली के झंडेवालन देवी मंदिर और गाजियाबाद के ऐतिहासिक दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल की कावड़ लाए कावड़ियों ने झंडेवालन मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विधिवत जलाभिषेक किया। श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि पर दोनों मंदिरों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
महंत ने बताया कावड़ परंपरा का पौराणिक महत्व
झंडेवालान मंदिर के महंत अंबिका प्रसाद पंत ने बताया कि शास्त्रों में सावन की शिवरात्रि को परम फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा, 'श्रावण का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, और इस महीने के सोमवार उनके लिए विशेष महत्व रखते हैं।' महंत के अनुसार कावड़ियों द्वारा गंगाजल लाकर शिव का अभिषेक करने की परंपरा समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ी है।
महंत पंत ने विस्तार से बताया कि समुद्र मंथन के दौरान उत्पन्न हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका शरीर जलने लगा। तब माँ गंगा ने आकर अभिषेक किया और देवताओं ने भारी वर्षा से भगवान शिव को शीतलता प्रदान की। मान्यता है कि उसी अवसर पर भगवान शिव ने वरदान दिया था कि जो भी उनका गंगाजल से अभिषेक करेगा, उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी।
झंडेवालन मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह
मंदिर पहुँचे श्रद्धालु रणजीत कुमार झा ने कहा, 'माता के दरबार में आने से असीम ऊर्जा मिलती है और सारे दुख भूल जाते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तर भारत में सावन के महीने में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। गौरतलब है कि झंडेवालन मंदिर दिल्ली के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहाँ सावन के दौरान विशेष रूप से बड़ी संख्या में भक्त पहुँचते हैं।
दूधेश्वर नाथ मठ में रात 12 बजे से शुरू हुआ जलाभिषेक
गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में रात 12 बजे से ही जलाभिषेक का क्रम आरंभ हो गया था। सुबह होते-होते मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और श्रद्धालु घंटों प्रतीक्षा करते हुए दर्शन के लिए उत्सुक दिखे। मान्यता है कि इस मंदिर की महानता त्रेता युग से जुड़ी है और यहाँ दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं।
मंदिर पहुँचे एक श्रद्धालु ने बताया, 'हम पैदल चलकर यहाँ पवित्र जल लाए हैं और हममें से कुछ के पैरों में छाले भी पड़ गए हैं। इस मंदिर का बहुत धार्मिक महत्व है और लोग यहाँ अटूट श्रद्धा और भक्ति के साथ आते हैं।' यह समर्पण इस बात का प्रमाण है कि सावन शिवरात्रि पर कावड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लाखों भक्तों के लिए आस्था की परीक्षा भी है।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
सावन शिवरात्रि के अवसर पर दिल्ली-NCR के प्रमुख शिव मंदिरों में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतज़ाम किए। कावड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से दिल्ली और गाजियाबाद तक के मार्गों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सावन मास में शिव आराधना की यह परंपरा उत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
आने वाले दिनों में सावन के शेष सोमवारों पर भी इन मंदिरों में भक्तों की बड़ी संख्या उमड़ने की संभावना है, और मंदिर प्रबंधन ने विशेष पूजा-अर्चना के कार्यक्रम निर्धारित किए हैं।