करीमपुर विधानसभा 2026: भाजपा के समरेंद्रनाथ घोष ने टीएमसी के सोहम चक्रवर्ती को 10,185 वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करीमपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार समरेंद्रनाथ घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार सोहम चक्रवर्ती को 10,185 वोटों के अंतर से पराजित कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 4 मई 2026 को आए मतगणना परिणामों के अनुसार, नादिया जिले की इस सीट पर भाजपा ने दशकों पुराने राजनीतिक समीकरण को पलट दिया।
मतगणना के प्रमुख आँकड़े
विजेता उम्मीदवार समरेंद्रनाथ घोष को कुल 1,05,234 वोट प्राप्त हुए, जबकि टीएमसी के सोहम चक्रवर्ती को 95,049 वोट मिले। जीत का अंतर 10,185 वोट रहा। इस बार करीमपुर सीट पर कुल 8 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) से पूजा परजीता रॉय चौधरी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम से प्रभास मजूमदार भी शामिल थे।
करीमपुर सीट की पृष्ठभूमि
करीमपुर, नादिया जिले के तेहट्टा उपमंडल में स्थित एक ब्लॉक-स्तरीय जनगणना कस्बा है। यह 1951 से सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र रहा है। 2010 में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा किए गए परिसीमन के बाद इसकी वर्तमान सीमाओं में पूरा करीमपुर-1 ब्लॉक और करीमपुर-2 ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
राजनीतिक इतिहास: वामपंथ से टीएमसी तक
राजनीतिक रूप से करीमपुर लंबे समय तक सीपीआईएम का मजबूत गढ़ रहा है। 1977 से 2006 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम ने नौ बार जीत दर्ज की। कांग्रेस ने यहाँ चार बार जीत हासिल की, जबकि बांग्ला कांग्रेस और किसान मजदूर प्रजा पार्टी को एक-एक बार सफलता मिली।
तृणमूल कांग्रेस के उदय के साथ सीपीआईएम का वर्चस्व कमजोर पड़ने लगा। सीपीआईएम के समरेंद्रनाथ घोष ने 2011 में टीएमसी के रामेन सरकार को 5,085 वोटों से हराकर आखिरी बार जीत दर्ज की थी। 2016 में टीएमसी की महुआ मोइत्रा ने घोष को 15,989 वोटों से पराजित कर समीकरण बदल दिए। 2019 में मोइत्रा के लोकसभा जाने के बाद बिमलेंदु सिन्हा रॉय ने भाजपा के जयप्रकाश मजूमदार को 23,910 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी। 2021 में भी सिन्हा रॉय ने दोबारा जीत हासिल की और भाजपा उम्मीदवार समरेंद्रनाथ घोष को 23,575 वोटों से हराया।
लोकसभा रुझान और भाजपा की बढ़ती ताकत
लोकसभा चुनावों में भी इस क्षेत्र के रुझान लगभग समान रहे हैं। 2019 में टीएमसी ने पहली बार इस क्षेत्र में 14,340 वोटों की बढ़त बनाई और भाजपा दूसरे स्थान पर रही। 2024 में यह बढ़त घटकर 12,323 वोट रह गई, जो भाजपा की बढ़ती चुनौती का संकेत था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा लगातार अपनी जड़ें मजबूत कर रही थी।
2026 परिणाम का महत्व
2026 का यह परिणाम करीमपुर की राजनीतिक दिशा में एक निर्णायक मोड़ है। जो उम्मीदवार 2021 में 23,575 वोटों से हारा था, वही समरेंद्रनाथ घोष इस बार 10,185 वोटों से विजयी हुआ — यह बदलाव टीएमसी के लिए गंभीर संकेत है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इस जीत को नादिया जिले में अपनी व्यापक उपस्थिति में कैसे तब्दील करती है।