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कर्णप्रयाग मारपीट: चारों निहंग सिख आरोपियों को ₹50,000 के मुचलके पर जमानत

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कर्णप्रयाग मारपीट: चारों निहंग सिख आरोपियों को ₹50,000 के मुचलके पर जमानत

सारांश

कर्णप्रयाग में 16 जून की मारपीट के बाद जेल गए चारों निहंग सिख आरोपियों को 27 जून को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से जमानत मिल गई। ₹50,000 के मुचलके की शर्त पर रिहाई का रास्ता साफ हुआ, जबकि हरिद्वार में जाँच जारी है।

मुख्य बातें

27 जून को जिला एवं सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने चारों निहंग सिख आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार की।
आरोपियों के नाम: सतविन्द्र सिंह , अजय सिंह , जसनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह ।
जमानत की शर्त: ₹50,000 का बंधकपत्र या दो-दो जमानतदार।
तीन आरोपी पुरसाड़ी जेल में थे; एक एम्स ऋषिकेश में न्यायिक अभिरक्षा में उपचाराधीन था।
मामले की विवेचना निष्पक्षता के लिए हरिद्वार जनपद स्थानांतरित की गई थी।
16 जून को हुई मारपीट के बाद पुलिस ने जान से मारने के प्रयास सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

चमोली जिले के कर्णप्रयाग में 16 जून को हुई मारपीट के मामले में जेल में बंद चारों निहंग सिख आरोपियों को 27 जून को अदालत से राहत मिल गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के बाद चारों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए ₹50,000 के बंधकपत्र या दो-दो जमानतियों की शर्त पर रिहाई का आदेश पारित किया।

मुख्य घटनाक्रम

अदालती आदेश के अनुसार सतविन्द्र सिंह, अजय सिंह, जसनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह — इन चारों आरोपियों को जमानत दी गई है। इनमें से तीन पुरसाड़ी जेल में निरुद्ध थे, जबकि एक आरोपी एम्स ऋषिकेश में उपचाराधीन होते हुए न्यायिक अभिरक्षा में था। जमानत की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद चारों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू होगी।

पृष्ठभूमि: कर्णप्रयाग विवाद

16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद मारपीट की घटना सामने आई थी। पुलिस ने निहंगों के खिलाफ जान से मारने का प्रयास करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की थी। गौरतलब है कि जाँच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विवेचना बाद में हरिद्वार जनपद को स्थानांतरित कर दी गई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई विवादित पोस्ट वायरल हुई थीं।

बचाव पक्ष और निहंग प्रतिनिधियों का रुख

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोहन पंत ने अदालत में जमानत का पक्ष रखा। निहंग प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर कहा है कि इस घटना में दोनों पक्षों से गलती हुई और मामले का समाधान आपसी समझौते से होना चाहिए। उनके अनुसार वे कानून-व्यवस्था बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि भाईचारे और प्रेम का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि गिरफ्तार चारों निहंगों की रिहाई तक वे वापस नहीं लौटेंगे।

आगे की स्थिति

जमानत मिलने के बाद अब चारों आरोपियों को निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। मामले की विवेचना हरिद्वार में जारी है और अदालती प्रक्रिया आगे चलती रहेगी। यह घटना उत्तराखंड में तीर्थयात्रा मार्गों पर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की चुनौतियों को एक बार फिर रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला उत्तराखंड के तीर्थ मार्गों पर बढ़ते सामाजिक तनाव का संकेत भी देता है। विवेचना का हरिद्वार स्थानांतरण प्रशासन की सतर्कता दर्शाता है, परंतु निहंग प्रतिनिधियों द्वारा 'दोनों पक्षों की गलती' स्वीकार करना और आपसी समझौते की माँग यह सवाल उठाती है कि क्या स्थानीय समुदाय और यात्री समूहों के बीच संवाद के पर्याप्त तंत्र मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई विवादित पोस्ट ने घटना को स्थानीय से राष्ट्रीय विमर्श में बदल दिया — यह दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था की घटनाएँ अब डिजिटल रूप से भी प्रबंधित करनी होती हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्णप्रयाग निहंग सिख मारपीट मामला क्या है?
16 जून को उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद मारपीट हुई थी। पुलिस ने निहंगों के खिलाफ जान से मारने के प्रयास सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया था।
चारों आरोपियों को जमानत कब और किस शर्त पर मिली?
27 जून को जिला एवं सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने चारों आरोपियों को ₹50,000 के बंधकपत्र या दो-दो जमानतदार की शर्त पर जमानत दी। जमानत की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद रिहाई की प्रक्रिया पूरी होगी।
मामले की जाँच किस जिले में हो रही है?
प्रारंभ में मुकदमा चमोली जिले में दर्ज हुआ था, लेकिन निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए विवेचना हरिद्वार जनपद को स्थानांतरित कर दी गई। हरिद्वार में जाँच अभी जारी है।
निहंग प्रतिनिधियों ने इस मामले पर क्या कहा?
निहंग प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर कहा कि घटना में दोनों पक्षों से गलती हुई और आपसी समझौते से समाधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि गिरफ्तार चारों निहंगों की रिहाई तक वे वापस नहीं लौटेंगे।
क्या इस मामले में सोशल मीडिया पर भी विवाद हुआ?
हाँ, 16 जून की घटना के बाद देशभर में सोशल मीडिया पर कई विवादित पोस्ट वायरल हुईं, जिससे यह मामला स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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