पीएम ई-ड्राइव योजना: कर्नाटक को मिलेंगे 1,243 नए ईवी चार्जर, ₹123.26 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी

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पीएम ई-ड्राइव योजना: कर्नाटक को मिलेंगे 1,243 नए ईवी चार्जर, ₹123.26 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी

सारांश

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कर्नाटक को ₹123.26 करोड़ में 1,243 नए ईवी चार्जर मिलेंगे। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में यह घोषणा करते हुए देशभर में ₹503.86 करोड़ के 4,874 चार्जर स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी और UPI जैसे एकीकृत चार्जिंग ऐप UBC की भी रूपरेखा साझा की।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 12 मई को कर्नाटक में ₹123.26 करोड़ की लागत से 1,243 ईवी चार्जर स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी।
देशभर में 4,874 ईवी चार्जर के लिए ₹503.86 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत; इसमें एचपीसीएल, आईओसीएल, बीपीसीएल और कई राज्य शामिल।
एफएएमई-द्वितीय के तहत ₹873.5 करोड़ सब्सिडी से देशभर में 8,932 चार्जर लगाए गए, जिनमें कर्नाटक में 721 शामिल।
राष्ट्रीय एकीकृत ईवी चार्जिंग ऐप यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) विकसित किया जा रहा है।
₹10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹2,000 करोड़ विशेष रूप से आवंटित।
भारत का लक्ष्य 2047 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार, 12 मई को बेंगलुरु में आयोजित एक सम्मेलन में घोषणा की कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कर्नाटक में ₹123.26 करोड़ की लागत से 1,243 इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जर स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। यह सम्मेलन देशव्यापी ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

कुल स्वीकृत प्रस्तावों का दायरा

कुमारस्वामी ने बताया कि विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में 4,874 ईवी चार्जर लगाने के लिए अब तक ₹503.86 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इन स्वीकृत प्रस्तावों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ एचपीसीएल, आईओसीएल और बीपीसीएल के साथ-साथ राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के प्रस्ताव शामिल हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि एफएएमई-द्वितीय योजना के अंतर्गत तेल कंपनियों ने भारी उद्योग मंत्रालय से ₹873.5 करोड़ की सब्सिडी सहायता से देशभर में 8,932 ईवी चार्जर स्थापित किए हैं, जिनमें से अकेले कर्नाटक में 721 चार्जर लगाए गए हैं।

बेंगलुरु बना अग्रणी ईवी चार्जिंग हब

कुमारस्वामी ने कहा कि बेंगलुरु भारत के अग्रणी ईवी चार्जिंग हब में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने टाटा पावर, चार्जजोन और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी चार्ज प्वाइंट ऑपरेटर कंपनियों की भारत के ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने में निभाई गई भूमिका की सराहना की।

गौरतलब है कि भारत का ऑटोमोटिव क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, विनिर्माण GDP का लगभग आधा हिस्सा है और लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार है।

यूनिफाइड भारत ई-चार्ज ऐप की तैयारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एक राष्ट्रीय एकीकृत ईवी चार्जिंग ऐप — यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) — पर काम जारी है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ईवी उपयोगकर्ताओं को एकल इंटरफेस के माध्यम से कई ऑपरेटरों के चार्जिंग नेटवर्क को खोजने, उपयोग करने और भुगतान करने में सक्षम बनाना है। कुमारस्वामी ने इसकी तुलना डिजिटल भुगतान में UPI की क्रांति से की।

पीएम ई-ड्राइव और संबद्ध योजनाएँ

₹10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव योजना को भारत के इलेक्ट्रिक वाहन परिवर्तन की आधारशिला बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह पहल इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, बसों और ट्रकों को अपनाने में तेजी ला रही है। पूरे देश में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए विशेष रूप से ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, बैटरी सेल निर्माण के लिए ₹18,100 करोड़ की पीएलआई एसीसी योजना, स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देने वाली ₹25,938 करोड़ की पीएलआई ऑटो योजना और दुर्लभ पृथ्वी चुंबक निर्माण में आत्मनिर्भरता के लिए ₹7,280 करोड़ की आरईपीएम योजना को भी प्रमुख पहलों के रूप में रेखांकित किया गया।

आगे की राह

कुमारस्वामी ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, राज्य सरकारों और उद्योग जगत के हितधारकों के समन्वय से ग्रिड की तैयारी, मानकीकरण और डिजिटल एकीकरण सुनिश्चित करने पर काम हो रहा है। भारत के 2047 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में यह कदम देश की स्वच्छ गतिशीलता यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

243 चार्जर की यह स्वीकृति संख्या में प्रभावशाली लगती है, लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गति का है — एफएएमई-द्वितीय के तहत स्वीकृत हजारों चार्जर वर्षों तक कागज़ों पर ही रहे। बेंगलुरु जैसे महानगरों में ईवी अपनाने की दर तेज़ है, लेकिन टियर-2 और टियर-3 शहरों में चार्जिंग नेटवर्क की कमी अभी भी उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी चिंता है। UBC ऐप की UPI से तुलना महत्वाकांक्षी है, पर UPI की सफलता के पीछे एक खुला इंटरऑपरेबल प्रोटोकॉल था — UBC के लिए ऐसा ढाँचा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। जब तक स्थापना की समयसीमा और उपयोग दर जैसे मापदंड सार्वजनिक नहीं किए जाते, ये आँकड़े महज़ घोषणाओं की सूची बनने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?
पीएम ई-ड्राइव भारत सरकार की ₹10,900 करोड़ की योजना है, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, बसों और ट्रकों को अपनाने में तेजी लाना और देशभर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। इसके तहत सार्वजनिक चार्जिंग के लिए विशेष रूप से ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
कर्नाटक में कितने ईवी चार्जर लगाए जाएँगे और इसकी लागत क्या होगी?
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कर्नाटक में 1,243 नए ईवी चार्जर स्थापित किए जाएँगे, जिनकी कुल लागत ₹123.26 करोड़ है। इन प्रस्तावों को केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 12 मई को मंजूरी दी।
यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (UBC) ऐप क्या है?
UBC एक राष्ट्रीय एकीकृत ईवी चार्जिंग ऐप है जिस पर फिलहाल काम चल रहा है। यह ईवी उपयोगकर्ताओं को एकल इंटरफेस के माध्यम से विभिन्न ऑपरेटरों के चार्जिंग नेटवर्क को खोजने, उपयोग करने और भुगतान करने की सुविधा देगा — जिसे सरकार ने डिजिटल भुगतान में UPI की भूमिका से तुलनीय बताया है।
एफएएमई-द्वितीय योजना के तहत अब तक कितने ईवी चार्जर लगाए गए हैं?
एफएएमई-द्वितीय योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों — बीपीसीएल, आईओसीएल और एचपीसीएल — ने ₹873.5 करोड़ की सब्सिडी सहायता से देशभर में 8,932 ईवी चार्जर स्थापित किए हैं, जिनमें कर्नाटक में 721 चार्जर शामिल हैं।
भारत के ईवी क्षेत्र में ऑटोमोटिव उद्योग की क्या भूमिका है?
भारत का ऑटोमोटिव क्षेत्र GDP में 7 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार है। यही कारण है कि इसे भारत के स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन का केंद्रीय स्तंभ माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस