कर्नाटक: भाजपा का आरोप — कांग्रेस ने एससी/एसटी फंड से ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 16 जून 2026 को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) कल्याण निधि से कथित तौर पर ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी की गई है। पार्टी ने इस मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय और SC/ST कल्याण संबंधी संसदीय समिति को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
मुख्य आरोप और दावे
भाजपा के विधान परिषद सदस्य (MLC) और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने केंद्रीय मंत्रालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने 2023 से 2027 के दौरान अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए SC/ST निधि से कथित तौर पर ₹53,000 करोड़ से अधिक की राशि का गबन किया है। उन्होंने इसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के साथ 'घोर अन्याय' करार दिया।
गौरतलब है कि SC/ST उप-योजना के तहत सरकारी बजट का एक निर्धारित हिस्सा विशेष रूप से इन वर्गों के कल्याण पर व्यय करना संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है। आलोचकों का कहना है कि इस निधि का अन्य योजनाओं में उपयोग संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
भाजपा की माँगें
नारायणस्वामी ने भारत सरकार से चार प्रमुख कदम उठाने का अनुरोध किया है:
पहला — पिछले तीन वित्तीय वर्षों में SC/ST निधि के आवंटन और व्यय का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। दूसरा — कर्नाटक सरकार को इस कथित प्रवृत्ति को तत्काल रोकने का निर्देश दिया जाए। तीसरा — सभी विनियोजित निधियों को बहाल किया जाए। चौथा — सामाजिक कल्याण मंत्रालय, SC/ST प्रतिनिधियों और संवैधानिक निकायों की एक संयुक्त निगरानी समिति गठित की जाए, ताकि उपजीति उप योजना (SCP) और जनजातीय उप आवंटन (TSP) के क्रियान्वयन की समीक्षा हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। राज्य में SC/ST उप-योजना के धन के कथित दुरुपयोग को लेकर यह पहली बार नहीं है कि विपक्ष ने आवाज़ उठाई हो — हालाँकि इस पैमाने पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की माँग अपेक्षाकृत असामान्य है।
कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी इन दावों को राजनीति से प्रेरित बता सकती है।
आम जनता पर असर
SC/ST उप-योजना के तहत आवंटित धन का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आजीविका जैसी योजनाओं में होता है, जो सीधे करोड़ों वंचित नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर कर्नाटक के लाखों SC/ST लाभार्थियों पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
अब यह देखना होगा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय और संसदीय समिति इस पत्र पर क्या कार्रवाई करते हैं। यदि ऑडिट का आदेश दिया जाता है, तो यह कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।