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कर्नाटक: भाजपा का आरोप — कांग्रेस ने एससी/एसटी फंड से ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी की

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कर्नाटक: भाजपा का आरोप — कांग्रेस ने एससी/एसटी फंड से ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी की

सारांश

भाजपा ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर SC/ST कल्याण निधि से ₹14,000 करोड़ की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया है और 2023-2027 के दौरान ₹53,000 करोड़ से अधिक के गबन का दावा किया है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने केंद्र से ऑडिट और निगरानी समिति गठन की माँग की।

मुख्य बातें

भाजपा ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर वित्त वर्ष 2026-27 में SC/ST निधि से कथित तौर पर ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाया।
भाजपा MLC चलवाडी नारायणस्वामी ने दावा किया कि 2023-2027 के दौरान SC/ST फंड से ₹53,000 करोड़ से अधिक का गबन हुआ।
भाजपा ने केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय और SC/ST कल्याण संसदीय समिति को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
पार्टी ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों का स्वतंत्र ऑडिट, विनियोजित निधि की बहाली और संयुक्त निगरानी समिति गठन की माँग रखी।
कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 16 जून 2026 को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) कल्याण निधि से कथित तौर पर ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी की गई है। पार्टी ने इस मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय और SC/ST कल्याण संबंधी संसदीय समिति को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

मुख्य आरोप और दावे

भाजपा के विधान परिषद सदस्य (MLC) और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने केंद्रीय मंत्रालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने 2023 से 2027 के दौरान अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए SC/ST निधि से कथित तौर पर ₹53,000 करोड़ से अधिक की राशि का गबन किया है। उन्होंने इसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के साथ 'घोर अन्याय' करार दिया।

गौरतलब है कि SC/ST उप-योजना के तहत सरकारी बजट का एक निर्धारित हिस्सा विशेष रूप से इन वर्गों के कल्याण पर व्यय करना संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है। आलोचकों का कहना है कि इस निधि का अन्य योजनाओं में उपयोग संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।

भाजपा की माँगें

नारायणस्वामी ने भारत सरकार से चार प्रमुख कदम उठाने का अनुरोध किया है:

पहला — पिछले तीन वित्तीय वर्षों में SC/ST निधि के आवंटन और व्यय का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। दूसरा — कर्नाटक सरकार को इस कथित प्रवृत्ति को तत्काल रोकने का निर्देश दिया जाए। तीसरा — सभी विनियोजित निधियों को बहाल किया जाए। चौथा — सामाजिक कल्याण मंत्रालय, SC/ST प्रतिनिधियों और संवैधानिक निकायों की एक संयुक्त निगरानी समिति गठित की जाए, ताकि उपजीति उप योजना (SCP) और जनजातीय उप आवंटन (TSP) के क्रियान्वयन की समीक्षा हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। राज्य में SC/ST उप-योजना के धन के कथित दुरुपयोग को लेकर यह पहली बार नहीं है कि विपक्ष ने आवाज़ उठाई हो — हालाँकि इस पैमाने पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की माँग अपेक्षाकृत असामान्य है।

कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी इन दावों को राजनीति से प्रेरित बता सकती है।

आम जनता पर असर

SC/ST उप-योजना के तहत आवंटित धन का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आजीविका जैसी योजनाओं में होता है, जो सीधे करोड़ों वंचित नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर कर्नाटक के लाखों SC/ST लाभार्थियों पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय और संसदीय समिति इस पत्र पर क्या कार्रवाई करते हैं। यदि ऑडिट का आदेश दिया जाता है, तो यह कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अक्सर ये चुनावी राजनीति की उपज होते हैं। लेकिन ₹53,000 करोड़ का आँकड़ा — यदि प्रमाणित हो — संवैधानिक दायित्वों के स्तर पर एक गंभीर विफलता होगी। असली सवाल यह है कि क्या भाजपा के पास ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य हैं, या यह विधानसभा चुनावों से पहले की राजनीतिक रणनीति है। केंद्र सरकार यदि ऑडिट का आदेश देती है, तो यह एक परीक्षण होगा — न केवल कर्नाटक सरकार के लिए, बल्कि SC/ST उप-योजना की निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए भी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा ने कर्नाटक कांग्रेस पर SC/ST फंड को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में SC/ST कल्याण निधि से ₹14,000 करोड़ की हेराफेरी की है और 2023-2027 के दौरान कुल ₹53,000 करोड़ से अधिक का गबन किया है। पार्टी ने इसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के साथ 'घोर अन्याय' बताया है।
भाजपा ने इस मामले में केंद्र से क्या माँगें की हैं?
भाजपा ने केंद्र सरकार से पिछले तीन वित्तीय वर्षों का स्वतंत्र ऑडिट कराने, कर्नाटक सरकार को यह प्रवृत्ति तत्काल रोकने का निर्देश देने, विनियोजित निधि बहाल करने और SC/ST प्रतिनिधियों सहित एक संयुक्त निगरानी समिति गठित करने की माँग की है।
SC/ST उप-योजना (SCP/TSP) क्या होती है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
SC/ST उप-योजना के तहत राज्य सरकारों को अपने बजट का एक निर्धारित अनुपात विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SCP) और अनुसूचित जनजाति (TSP) के कल्याण पर खर्च करना होता है। इस निधि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आजीविका योजनाओं में होता है, जिससे करोड़ों वंचित नागरिक सीधे लाभान्वित होते हैं।
इस मामले में कर्नाटक कांग्रेस सरकार का क्या रुख है?
16 जून 2026 तक कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इन दावों को राजनीति से प्रेरित बता सकती है।
इस विवाद में चलवाडी नारायणस्वामी कौन हैं?
चलवाडी नारायणस्वामी भाजपा के विधान परिषद सदस्य (MLC) और कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता हैं। उन्होंने ही केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर SC/ST फंड के कथित दुरुपयोग की जाँच और हस्तक्षेप की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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