21 सितंबर 2026
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आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक CM शिवकुमार बोले — 'बेगुनाह नागेंद्र को विपक्ष के दबाव में दिलाया इस्तीफा'

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आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक CM शिवकुमार बोले — 'बेगुनाह नागेंद्र को विपक्ष के दबाव में दिलाया इस्तीफा'

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने विधानसभा में खुद कबूल किया कि आदिवासी कल्याण घोटाले में BJP के दबाव के चलते 'बेगुनाह' बी. नागेंद्र से मंत्री पद छुड़वाना पड़ा। यह बयान ऐसे वक्त आया जब सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर 27 सितंबर की केंद्रीय डेडलाइन से पहले विशेष सत्र बुलाया गया है।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 21 सितंबर 2026 को विधानसभा में स्वीकार किया कि BJP के दबाव में बी.
नागेंद्र को कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिलाना पड़ा।
शिवकुमार ने नागेंद्र को 'बेगुनाह' बताया और कहा कि उन्होंने खुद उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।
अशोक ने विशेष सत्र बुलाने के कानूनी प्रावधान पर सवाल उठाया।
राज्य के 120 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है; 100 और तालुकों की जाँच जारी है।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक सरकार का रुख 27 सितंबर 2026 तक केंद्र को बताना है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 21 सितंबर 2026 को कर्नाटक विधानसभा में स्वीकार किया कि आदिवासी कल्याण घोटाले के चलते कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र को कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिलाना पड़ा, और उन्होंने इसके लिए विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव को सीधे ज़िम्मेदार ठहराया। शिवकुमार ने सदन में कहा कि नागेंद्र 'बेगुनाह' थे, फिर भी उन्हें पद छोड़ना पड़ा। यह बयान ऐसे समय आया है जब विधानसभा में सूखा-स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है।

नागेंद्र इस्तीफे पर शिवकुमार का बड़ा बयान

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने विधानसभा में कहा, 'हमने विपक्ष के दबाव में एक बेगुनाह व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने ही उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।' उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने विपक्ष से पूछा था कि वे नागेंद्र के इस्तीफे की माँग क्यों कर रहे हैं, परंतु BJP विधायक कुछ बोले बिना सदन की कार्यवाही में बाधा डालते रहे।

शिवकुमार ने यह भी कहा कि इस्तीफे की माँग के बाद BJP ने विरोध मार्च भी निकाला। उन्होंने कहा, 'उन्हें करने दीजिए, लोकतंत्र में इसकी इजाजत है।'

विशेष सत्र की ज़रूरत और विपक्ष का विरोध

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने माँग की कि सूखा और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर उनके द्वारा स्पीकर को सौंपे गए 'स्थगन प्रस्ताव' के तहत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से उस कानूनी प्रावधान पर भी सवाल उठाया जिसके तहत विशेष सत्र बुलाया गया था, यह कहते हुए कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

इसके जवाब में बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि विपक्ष ने 'काम रोको प्रस्ताव' ऐसे समय में पेश किया जब सरकार उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला चुकी थी।

पिछले मॉनसून सत्र में भी बाधा का आरोप

शिवकुमार ने याद दिलाया कि पिछले मॉनसून सत्र में भी विपक्ष ने कार्यवाही में बाधा डाली थी और सरकार को एक मिनट भी बोलने का अवसर नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने स्वयं सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए लिखित अनुरोध किया था, फिर भी कार्यवाही में बाधा डाली, जिससे सरकार को सत्र दो दिन कम करना पड़ा।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विधानसभा में चर्चा की वजह

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक सरकार का रुख 27 सितंबर तक केंद्र सरकार को बताना है। उन्होंने बताया कि इस विशेष सत्र से पहले उन्होंने राज्य के चार डिवीजनों — कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग सहित — में विधायकों के साथ बैठकें कीं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सीधे केंद्र को भेजने की बजाय वह चाहते थे कि चुने हुए प्रतिनिधि इस पर विचार-विमर्श करें, ताकि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय न बने। 120 तालुकों को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य 100 तालुकों की जाँच जारी है।

आगे क्या होगा

कर्नाटक सरकार को 27 सितंबर 2026 तक कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर अपना आधिकारिक रुख केंद्र सरकार को सौंपना है, और विशेष सत्र में विधायकों की राय इसी रुख को आकार देगी। गौरतलब है कि आदिवासी कल्याण घोटाले की जाँच अभी जारी है और नागेंद्र के इस्तीफे के बाद मंत्रालय की ज़िम्मेदारी का भविष्य भी अनिश्चित बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसके लिए विपक्ष को दोष दे रहे हैं। यह तर्क जनता में यह सवाल खड़ा करता है कि यदि नागेंद्र वास्तव में निर्दोष थे, तो कांग्रेस सरकार ने उनका बचाव क्यों नहीं किया। आदिवासी कल्याण जैसे संवेदनशील विषय पर जब घोटाले के आरोप हों, तो 'विपक्ष के दबाव' की आड़ में इस्तीफा दिलाना सरकार की कमज़ोरी को उजागर करता है, रणनीतिक दृढ़ता को नहीं। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की 27 सितंबर की डेडलाइन और सूखे की गंभीर स्थिति असली मुद्दे हैं, लेकिन विधानसभा में हंगामे की राजनीति दोनों पक्षों को जवाबदेही से दूर ले जा रही है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदिवासी कल्याण घोटाले में बी. नागेंद्र का इस्तीफा क्यों हुआ?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के अनुसार, BJP के लगातार दबाव और विधानसभा में हंगामे के कारण सरकार को कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र से कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिलाना पड़ा। शिवकुमार ने नागेंद्र को 'बेगुनाह' बताया और कहा कि यह उनका स्वैच्छिक निर्णय नहीं था।
कर्नाटक में विशेष विधानसभा सत्र किसलिए बुलाया गया है?
यह विशेष सत्र दो प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया गया है — राज्य में सूखे की स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट। सरकार को 27 सितंबर 2026 तक कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर अपना आधिकारिक रुख केंद्र सरकार को सौंपना है।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट क्या है और किसानों पर इसका क्या असर होगा?
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक संरक्षण से संबंधित एक केंद्रीय रिपोर्ट है, जिसके प्रावधान कर्नाटक के कई जिलों में कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। शिवकुमार ने बताया कि विधायकों ने उन्हें किसानों पर इसके संभावित गंभीर नतीजों से अवगत कराया है।
कर्नाटक में कितने तालुक सूखा-प्रभावित घोषित किए गए हैं?
अब तक 120 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है और अन्य 100 तालुकों की जाँच की जा रही है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने विशेष सत्र बुलाने से पहले राज्य के चार डिवीजनों में विधायकों के साथ दौरे और बैठकें कीं।
BJP ने कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र पर क्या आपत्ति जताई?
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने दावा किया कि सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा उनके 'स्थगन प्रस्ताव' के तहत होनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस कानूनी प्रावधान के तहत विशेष सत्र बुलाया गया, वह प्रावधान कानून में है ही नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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