आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक CM शिवकुमार बोले — 'बेगुनाह नागेंद्र को विपक्ष के दबाव में दिलाया इस्तीफा'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 21 सितंबर 2026 को कर्नाटक विधानसभा में स्वीकार किया कि आदिवासी कल्याण घोटाले के चलते कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र को कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिलाना पड़ा, और उन्होंने इसके लिए विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव को सीधे ज़िम्मेदार ठहराया। शिवकुमार ने सदन में कहा कि नागेंद्र 'बेगुनाह' थे, फिर भी उन्हें पद छोड़ना पड़ा। यह बयान ऐसे समय आया है जब विधानसभा में सूखा-स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है।
नागेंद्र इस्तीफे पर शिवकुमार का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने विधानसभा में कहा, 'हमने विपक्ष के दबाव में एक बेगुनाह व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने ही उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।' उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने विपक्ष से पूछा था कि वे नागेंद्र के इस्तीफे की माँग क्यों कर रहे हैं, परंतु BJP विधायक कुछ बोले बिना सदन की कार्यवाही में बाधा डालते रहे।
शिवकुमार ने यह भी कहा कि इस्तीफे की माँग के बाद BJP ने विरोध मार्च भी निकाला। उन्होंने कहा, 'उन्हें करने दीजिए, लोकतंत्र में इसकी इजाजत है।'
विशेष सत्र की ज़रूरत और विपक्ष का विरोध
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने माँग की कि सूखा और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर उनके द्वारा स्पीकर को सौंपे गए 'स्थगन प्रस्ताव' के तहत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से उस कानूनी प्रावधान पर भी सवाल उठाया जिसके तहत विशेष सत्र बुलाया गया था, यह कहते हुए कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
इसके जवाब में बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि विपक्ष ने 'काम रोको प्रस्ताव' ऐसे समय में पेश किया जब सरकार उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला चुकी थी।
पिछले मॉनसून सत्र में भी बाधा का आरोप
शिवकुमार ने याद दिलाया कि पिछले मॉनसून सत्र में भी विपक्ष ने कार्यवाही में बाधा डाली थी और सरकार को एक मिनट भी बोलने का अवसर नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने स्वयं सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए लिखित अनुरोध किया था, फिर भी कार्यवाही में बाधा डाली, जिससे सरकार को सत्र दो दिन कम करना पड़ा।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विधानसभा में चर्चा की वजह
शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक सरकार का रुख 27 सितंबर तक केंद्र सरकार को बताना है। उन्होंने बताया कि इस विशेष सत्र से पहले उन्होंने राज्य के चार डिवीजनों — कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग सहित — में विधायकों के साथ बैठकें कीं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सीधे केंद्र को भेजने की बजाय वह चाहते थे कि चुने हुए प्रतिनिधि इस पर विचार-विमर्श करें, ताकि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय न बने। 120 तालुकों को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य 100 तालुकों की जाँच जारी है।
आगे क्या होगा
कर्नाटक सरकार को 27 सितंबर 2026 तक कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर अपना आधिकारिक रुख केंद्र सरकार को सौंपना है, और विशेष सत्र में विधायकों की राय इसी रुख को आकार देगी। गौरतलब है कि आदिवासी कल्याण घोटाले की जाँच अभी जारी है और नागेंद्र के इस्तीफे के बाद मंत्रालय की ज़िम्मेदारी का भविष्य भी अनिश्चित बना हुआ है।