18 अगस्त 2026
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने केपीएससी अध्यक्ष साहूकार का निलंबन किया रद्द, 7 दिन में बहाली का आदेश

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने केपीएससी अध्यक्ष साहूकार का निलंबन किया रद्द, 7 दिन में बहाली का आदेश

सारांश

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केपीएससी अध्यक्ष साहूकार का निलंबन रद्द कर 7 दिन में बहाली का आदेश दिया — राज्यपाल के आदेश को मंत्रिमंडल की अनुशंसा के बिना असंवैधानिक ठहराया। इसी बीच ईडी ने भर्ती घोटाले में 21 स्थानों पर छापेमारी की।

मुख्य बातें

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार का निलंबन निरस्त एवं शून्य घोषित किया।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत का 10 जुलाई का निलंबन आदेश इसलिए रद्द हुआ क्योंकि राज्य मंत्रिमंडल ने ऐसी कोई सिफारिश नहीं की थी।
अदालत ने 7 दिनों के भीतर बहाली का आदेश दिया, लेकिन साहूकार अपनी बेटियों की नियुक्ति से जुड़े मामलों में कोई निर्णय नहीं लेंगे।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 स्थानों पर पीएमएलए के तहत छापेमारी की।
तलाशी में केपीएससी कार्यालय, साहूकार का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का घर और एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय शामिल रहे।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त 2026 को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा बी. साहूकार के निलंबन को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया और अधिकारियों को सात दिनों के भीतर उन्हें पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। जस्टिस सूरज गोविंदराज की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा 10 जुलाई को जारी निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह निर्णय सुनाया।

अदालत का तर्क: मंत्रिमंडल की अनुशंसा अनिवार्य

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निलंबन आदेश कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि राज्य मंत्रिमंडल ने केपीएससी अध्यक्ष को निलंबित करने की न तो सिफारिश की थी और न ही कोई सुझाव दिया था। अदालत ने रेखांकित किया कि राज्यपाल को मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुरूप कार्य करना संवैधानिक बाध्यता है। इसी आधार पर निलंबन आदेश को निरस्त एवं शून्य घोषित किया गया।

साहूकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने तर्क दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को निलंबित करने से पहले राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भ भेजा जाना अनिवार्य है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया।

बहाली पर शर्त: बेटियों की नियुक्ति में कोई दखल नहीं

हालाँकि अदालत ने बहाली के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी — साहूकार अपनी बेटियों की नियुक्ति से जुड़े किसी भी मामले में कोई निर्णय नहीं लेंगे। यह प्रतिबंध उस विवाद की पृष्ठभूमि में लगाया गया है जिसने उनके निलंबन को जन्म दिया था।

ईडी की छापेमारी: केपीएससी भर्ती घोटाले की जाँच

यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई केपीएससी द्वारा पशु चिकित्सा (वेटरिनरी) अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की गई।

बेंगलुरु जोनल कार्यालय की ईडी टीम ने जिन परिसरों की तलाशी ली उनमें केपीएससी कार्यालय, निलंबित अध्यक्ष साहूकार का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का घर, बिचौलियों के ठिकाने, चयनित अभ्यर्थियों के परिसर और परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन करने वाली कंपनी एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय शामिल हैं।

व्यापक संदर्भ: केपीएससी विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि केपीएससी की भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को लेकर विवाद पहले से जारी है। पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में गड़बड़ियों की अलग जाँच भी चल रही है। यह मामला राज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच संवैधानिक सीमाओं को लेकर एक बड़े तनाव का प्रतीक भी बन गया है, जो हाल के वर्षों में कई राज्यों में उभरा है।

आगे की कार्यवाही पर सभी की निगाहें होंगी — विशेषकर इस पर कि राज्य सरकार बहाली के आदेश का पालन किस रूप में करती है और ईडी की जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हाल के वर्षों में कई विपक्ष-शासित राज्यों में बार-बार उभरी है। अदालत का यह स्पष्ट संदेश कि राज्यपाल मंत्रिमंडल की अनुशंसा के बिना स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर सकते, संवैधानिक परंपरा को पुनः स्थापित करता है। हालाँकि, विडंबना यह है कि जिस अधिकारी को बहाल किया जा रहा है, उसी के कार्यकाल में हुई कथित भर्ती अनियमितताओं की जाँच ईडी कर रही है। बहाली और जाँच का यह समानांतर चलना केपीएससी की विश्वसनीयता के लिए गहरा सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक हाईकोर्ट ने केपीएससी अध्यक्ष साहूकार का निलंबन क्यों रद्द किया?
अदालत ने पाया कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य मंत्रिमंडल की किसी सिफारिश के बिना निलंबन आदेश जारी किया, जो संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है। संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत ऐसी कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भ भेजना अनिवार्य है।
साहूकार को कब तक बहाल किया जाएगा और क्या कोई शर्त है?
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 7 दिनों के भीतर साहूकार को केपीएससी अध्यक्ष पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी बेटियों की नियुक्ति से संबंधित किसी भी मामले में निर्णय नहीं लेंगे।
ईडी ने केपीएससी मामले में कहाँ-कहाँ छापेमारी की?
प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 स्थानों पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली। इनमें केपीएससी कार्यालय, साहूकार का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का घर, बिचौलियों के ठिकाने और एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय शामिल हैं।
केपीएससी भर्ती विवाद क्या है?
केपीएससी पर पशु चिकित्सा (वेटरिनरी) अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप हैं। इस मामले में ईडी धन शोधन के कोण से जाँच कर रही है और अलग से भर्ती गड़बड़ियों की जाँच भी जारी है।
इस फैसले का राज्यपाल की शक्तियों पर क्या असर पड़ता है?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल को मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुरूप कार्य करना संवैधानिक बाध्यता है। यह निर्णय उन राज्यों में राज्यपाल की स्वतंत्र कार्रवाई की सीमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल स्थापित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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