कर्नाटक हाईकोर्ट ने केपीएससी अध्यक्ष साहूकार का निलंबन किया रद्द, 7 दिन में बहाली का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त 2026 को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा बी. साहूकार के निलंबन को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया और अधिकारियों को सात दिनों के भीतर उन्हें पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। जस्टिस सूरज गोविंदराज की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा 10 जुलाई को जारी निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह निर्णय सुनाया।
अदालत का तर्क: मंत्रिमंडल की अनुशंसा अनिवार्य
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निलंबन आदेश कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि राज्य मंत्रिमंडल ने केपीएससी अध्यक्ष को निलंबित करने की न तो सिफारिश की थी और न ही कोई सुझाव दिया था। अदालत ने रेखांकित किया कि राज्यपाल को मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुरूप कार्य करना संवैधानिक बाध्यता है। इसी आधार पर निलंबन आदेश को निरस्त एवं शून्य घोषित किया गया।
साहूकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण श्याम ने तर्क दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को निलंबित करने से पहले राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भ भेजा जाना अनिवार्य है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया।
बहाली पर शर्त: बेटियों की नियुक्ति में कोई दखल नहीं
हालाँकि अदालत ने बहाली के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी — साहूकार अपनी बेटियों की नियुक्ति से जुड़े किसी भी मामले में कोई निर्णय नहीं लेंगे। यह प्रतिबंध उस विवाद की पृष्ठभूमि में लगाया गया है जिसने उनके निलंबन को जन्म दिया था।
ईडी की छापेमारी: केपीएससी भर्ती घोटाले की जाँच
यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई केपीएससी द्वारा पशु चिकित्सा (वेटरिनरी) अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की गई।
बेंगलुरु जोनल कार्यालय की ईडी टीम ने जिन परिसरों की तलाशी ली उनमें केपीएससी कार्यालय, निलंबित अध्यक्ष साहूकार का आवास, केपीएससी सदस्य शांता होसमनी का घर, बिचौलियों के ठिकाने, चयनित अभ्यर्थियों के परिसर और परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन करने वाली कंपनी एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय शामिल हैं।
व्यापक संदर्भ: केपीएससी विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि केपीएससी की भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को लेकर विवाद पहले से जारी है। पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में गड़बड़ियों की अलग जाँच भी चल रही है। यह मामला राज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच संवैधानिक सीमाओं को लेकर एक बड़े तनाव का प्रतीक भी बन गया है, जो हाल के वर्षों में कई राज्यों में उभरा है।
आगे की कार्यवाही पर सभी की निगाहें होंगी — विशेषकर इस पर कि राज्य सरकार बहाली के आदेश का पालन किस रूप में करती है और ईडी की जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है।