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कर्नाटक के मंत्री ने किया स्पष्ट: वक्फ बोर्ड मंदिर और स्कूलों की संपत्तियों में नहीं करेगा दखल

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कर्नाटक के मंत्री ने किया स्पष्ट: वक्फ बोर्ड मंदिर और स्कूलों की संपत्तियों में नहीं करेगा दखल

सारांश

कर्नाटक के वक्फ मंत्री बी. ज़ेड. ज़मीर अहमद खान ने विधानसभा में कहा कि वक्फ बोर्ड मंदिरों या स्कूलों की संपत्तियों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। जानिए उनकी प्रमुख बातें और वक्फ संपत्तियों की स्थिति।

मुख्य बातें

वक्फ बोर्ड मंदिरों और स्कूलों की संपत्तियों में दखल नहीं देगा।
कर्नाटक में वक्फ संपत्तियां 1.12 लाख एकड़ में फैली हुई हैं।
अतिक्रमण की जांच के लिए लोक अदालतों का गठन किया गया है।

बेंगलुरु, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के वक्फ और आवास मंत्री बी. ज़ेड. ज़मीर अहमद खान ने सोमवार को विधानसभा में यह स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड मंदिरों या स्कूलों से संबंधित किसी भी संपत्ति में दखल नहीं देगा।

मंत्री ने यह बयान विधानसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एम वाई पाटिल के सवाल का उत्तर देते हुए दिया। मंत्री ज़मीर ने कहा, “मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि मंदिरों की किसी भी संपत्ति को नहीं छेड़ा जाएगा। इसी तरह, शैक्षणिक संस्थानों की जमीन को भी नहीं छुआ जाएगा।”

उन्होंने बताया कि सरकार का ध्यान केवल उन व्यक्तियों पर है जिन्होंने वक्फ की जमीन पर अतिक्रमण किया है। उनके अनुसार, कई मामलों में वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाले लोग मुस्लिम समुदाय से हैं।

मंत्री ने कहा कि कर्नाटक में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां लगभग 1.12 लाख एकड़ में फैली हुई हैं, लेकिन वर्तमान में वक्फ बोर्ड के पास केवल 24,054 एकड़ जमीन ही उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि लगभग 17,580 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है, जबकि 47,263 एकड़ जमीन इनाम उन्मूलन के तहत और 23,627 एकड़ भूमि सुधार कानून के तहत चली गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद अतिक्रमित वक्फ संपत्तियों की पहचान और उन्हें पुनः प्राप्त करने के लिए वक्फ लोक अदालतों का गठन किया गया है।

इस पर नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि उनका सवाल अतिक्रमण के बारे में नहीं था, बल्कि वक्फ बोर्ड द्वारा कुछ स्थानों को वक्फ संपत्ति बताने से संबंधित था। उन्होंने कहा कि कलबुर्गी क्षेत्र में कई स्थानों पर ऐसी संपत्तियों को वक्फ की जमीन बताया जा रहा है, जिनमें सरकारी स्कूल और मंदिरों की जमीन भी शामिल हैं।

आर. अशोक ने कहा कि पहले मंदिर और वक्फ की जमीन किसानों को दी गई थी और वे पीढ़ियों से उस पर खेती कर रहे हैं। ऐसे में यदि किसान जमीन पर काबिज हैं, तो उन्हें वहीं रहने दिया जाना चाहिए, चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम।

उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण की जांच होनी चाहिए और बेंगलुरु के मशहूर विंडसर मैनर होटल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह भी ऐसी ही जमीन पर बना हुआ है।

इस पर मंत्री ज़मीर ने कहा कि यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

इससे पहले कांग्रेस विधायक एम.वाई. पाटिल ने सदन में कहा था कि कलबुर्गी जिले के अफजलपुर क्षेत्र में कई संपत्तियों के दस्तावेज वक्फ से जुड़े हुए हैं, लेकिन वर्तमान में वे निजी लोगों के कब्जे में हैं, जिसके कारण सरकार को विकास परियोजनाओं के लिए निजी जमीन तलाशनी पड़ रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वक्फ बोर्ड मंदिरों की संपत्ति में दखल देगा?
नहीं, वक्फ बोर्ड मंदिरों की संपत्तियों में दखल नहीं देगा, जैसा कि मंत्री ज़मीर अहमद खान ने स्पष्ट किया।
कर्नाटक में वक्फ संपत्तियों की स्थिति क्या है?
कर्नाटक में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां लगभग 1.12 लाख एकड़ में फैली हुई हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 24,054 एकड़ जमीन ही उपलब्ध है।
अतिक्रमण के खिलाफ सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने अतिक्रमित वक्फ संपत्तियों की पहचान और उन्हें वापस लेने के लिए वक्फ लोक अदालतों का गठन किया है।
राष्ट्र प्रेस
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