बेलगावी एसआईआर विवाद: स्कूली बच्चों से मतदाता सूची पुनरीक्षण कराने का आरोप, डीसी मोहम्मद रोशन ने जांच बिठाई
सारांश
मुख्य बातें
बेलगावी जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर नया विवाद उठ खड़ा हुआ है, जहाँ गोकाक तालुक के मरादिमठ गाँव स्थित एक सरकारी स्कूल में बच्चों से जनगणना-संबंधी कार्य कराने के आरोप सामने आए हैं। बेलगावी के उपायुक्त मोहम्मद रोशन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोकाक तहसीलदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा है और जाँच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
कथित घटना मंगलवार, 7 जुलाई को गोकाक तालुक के मरादिमठ गाँव स्थित सरकारी कन्नड़ उच्च प्राथमिक विद्यालय से सामने आई। आरोपों के अनुसार, बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने एसआईआर प्रक्रिया के अंतर्गत जनगणना प्रपत्र वितरित करने और एकत्र करने के लिए ग्रामीणों को स्कूल परिसर में बुलाया था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्कूली बच्चों का इस्तेमाल कथित तौर पर फॉर्म भरने और फोटो चिपकाने के लिए किया गया। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें कथित तौर पर छात्र इस गतिविधि में भाग लेते दिख रहे हैं — हालाँकि अधिकारियों ने अभी तक इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया
उपायुक्त मोहम्मद रोशन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गोकाक तहसीलदार को नोटिस जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जाँच के दौरान यदि आधिकारिक दिशा-निर्देशों में कोई चूक या उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने अभी तक आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
भाजपा के आरोप और राजनीतिक घमासान
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया पहले से ही राजनीतिक तनाव का केंद्र बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य सीटी रवि ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारियों को मौखिक निर्देश देकर एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाई जा रही है। उनके अनुसार, BJP समर्थक मतदाताओं को जनगणना प्रपत्र नहीं दिए जा रहे, कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को सूची में बनाए रखा जा रहा है, और एसआईआर सामूहिक रूप से मस्जिदों में कराया जा रहा है।
रवि ने यह भी दावा किया कि ऐसे लोगों को जन्म प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं जिनका जन्म संबंधित स्थान पर नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'हम विस्तार से बताएंगे कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियाँ की जा रही हैं।'
गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और BJP सांसद गोविंद करजोल ने भी दावा किया कि एसआईआर के कारण कांग्रेस नेता भयभीत हैं। हालाँकि इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
एसआईआर विवाद का व्यापक संदर्भ
कर्नाटक में एसआईआर को लेकर विपक्षी दल लगातार क्रियान्वयन की आलोचना करते आए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है। चुनावी प्रक्रिया में नाबालिग छात्रों की कथित संलिप्तता ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या होगा
जाँच के नतीजे आने तक गोकाक तहसीलदार को जवाब देना होगा। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित बीएलओ और अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना है। यह मामला कर्नाटक में एसआईआर की विश्वसनीयता और पारदर्शिता की व्यापक बहस को और तेज कर सकता है।