काशी का प्राचीन आदि केशव मंदिर: भगवान विष्णु के पहले कदमों का स्थल
सारांश
Key Takeaways
- आदि केशव मंदिर काशी का प्राचीनतम मंदिर है।
- यहां भगवान विष्णु के पहले कदमों का इतिहास है।
- मंदिर के परिसर में कई अन्य मंदिर भी हैं।
- मंदिर का प्रबंधन और जीर्णोद्धार ग्वालियर के सिंधिया वंश ने किया।
- यहां धार्मिक त्योहारों की धूम रहती है।
वाराणसी, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महादेव की नगरी काशी को देवों का निवास स्थान भी कहा जाता है। यहां के हर मंदिर की अपनी एक कथा और भक्तिभाव से भरी मान्यता है। गंगा और वरुणा नदी के संगम पर एक प्राचीन मंदिर है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने काशी में सबसे पहले यहीं पर कदम रखा था।
हम चर्चा कर रहे हैं आदि केशव मंदिर की, जो काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के केशव स्वरूप को समर्पित है और इसका गहन आध्यात्मिक महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार, यही वह पवित्र स्थल है, जहां से भगवान विष्णु ने सबसे पहले काशी में प्रवेश किया था।
मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है। कहा जाता है कि भगवान शिव एक बार मंदार पर्वत पर चले गए थे, जिसके कारण काशी खाली हो गई। ब्रह्माजी के आदेश पर धर्मात्मा राजा दिवोदास ने काशी पर शासन किया। राजा दिवोदास इतने अच्छे शासक थे कि काशी में कोई दुख या समस्या नहीं रह गई। भगवान गणेश ने एक ब्राह्मण के रूप में राजा को प्रभावित करते हुए काशी का भ्रमण किया और यहीं पर रह गए। जब वह कैलाश नहीं लौटे, तो भगवान शिव नारायण से सहायता मांगने पहुंचे। अंत में, भगवान विष्णु लक्ष्मी और गरुड़ के साथ काशी पहुंचे। उन्होंने वरुणा और गंगा नदी के संगम पर स्नान किया और उसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित कर पूजा की। तभी से इसे आदि केशव मंदिर कहा जाने लगा। इस संगम को पदोदक तीर्थ भी कहा जाता है।
आदि केशव मंदिर काशी के 16 केशव मंदिरों में सबसे प्रमुख है। यहां की मूर्ति स्वयं भगवान विष्णु द्वारा स्थापित मानी जाती है। यह मंदिर सदियों से आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद, अंग्रेजों ने इसे सैन्य चौकी बना दिया था। बाद में, ग्वालियर के सिंधिया वंश ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। मंदिर परिसर में आदि केशव के अलावा ज्ञान केशव, संगमेश्वर शिव और पंचदेव मंदिर भी स्थित हैं। संगमेश्वर शिवलिंग की स्थापना खुद भगवान विष्णु ने की थी।
मंदिर सुबह 6 बजे से 12 बजे तक और शाम 4 बजे से 10 बजे तक खुला रहता है। आदि केशव मंदिर वाराणसी के पुराने शहर में स्थित है, जो राजघाट के पास वरुण-गंगा संगम पर है। स्थानीय लोग इसे आदि केशव घाट या राजघाट के नाम से जानते हैं।
अन्य शहरों से निजी वाहन से यात्रा की जा सकती है या टैक्सी किराए पर ली जा सकती है। कई सामान्य बसें नियमित रूप से चलती हैं, जिससे मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। रिक्शा या ऑटो वाले को राजघाट या आदि केशव घाट बताने पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर में वारुणी मेला, अंतग्रही मेला, महाबरनी मेला और वामन द्वादशी जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।