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कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग का छापा: साइबर ठगों ने वरिष्ठ नागरिक से ठगे थे ₹30 लाख

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कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग का छापा: साइबर ठगों ने वरिष्ठ नागरिक से ठगे थे ₹30 लाख

सारांश

क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर बुजुर्गों को डराने और ₹30 लाख ठगने वाले गिरोह के खिलाफ कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने श्रीनगर और गांदरबल में एक साथ छापेमारी की। यह मामला देशभर में फैलते 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।

मुख्य बातें

कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने 20 जुलाई को श्रीनगर और गांदरबल में साइबर ठगों के ठिकानों पर छापे मारे।
आरोपी गिरोह क्राइम ब्रांच व एसीबी अधिकारी बनकर वरिष्ठ नागरिकों को गिरफ्तारी की धमकी देता था।
श्रीनगर के एक बुजुर्ग से ₹30 लाख से अधिक की ठगी की गई।
तलाशी में मुबाशिर अहमद यट्टो , नसीर मकबूल बिचू , मुदस्सिर सादिक नजर और मुनीर अहमद मीर के घर शामिल।
नोएडा में भी इससे पहले 2 फर्जी कॉल सेंटर सील किए गए और 4 आरोपी गिरफ्तार हुए।
जाँच में 2,500 मोबाइल नंबर और 159 संदिग्ध बैंक खाते खँगाले गए।

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच के कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने 20 जुलाई को श्रीनगर और गांदरबल जिलों में एक साथ कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उस मामले में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में की गई, जिसमें साइबर ठगों के एक संगठित गिरोह ने श्रीनगर के एक वरिष्ठ नागरिक से ₹30 लाख से अधिक की धोखाधड़ी की थी।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच के अनुसार, आरोपी गिरोह के सदस्य क्राइम ब्रांच और एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) के अधिकारी बनकर वरिष्ठ नागरिकों को फ़ोन करते थे। वे झूठी शिकायतों का हवाला देकर और गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़ितों से पैसे वसूलते थे। इस बार गिरोह ने श्रीनगर शहर निवासी एक बुजुर्ग को निशाना बनाकर ₹30 लाख से अधिक की रकम ऐंठ ली।

किन-किन के घरों पर पड़े छापे

स्पेशल क्राइम विंग ने मुबाशिर अहमद यट्टो (वानी), निवासी गांदरबल, तथा नसीर मकबूल बिचू, मुदस्सिर सादिक नजर और मुनीर अहमद मीर — तीनों निवासी श्रीनगर — के आवासों पर तलाशी ली। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान दर्ज एफआईआर में उल्लिखित संदिग्धों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से चलाया गया।

नोएडा कनेक्शन: फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़

इससे पहले उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था। वहाँ पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी कॉल सेंटरों के ज़रिये बीमा पॉलिसी परिपक्व कराने, कम ब्याज पर ऋण दिलाने, क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने और इंडिगो एयरलाइंस में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगते थे। कार्रवाई में दो कॉल सेंटर सील किए गए और लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड तथा पेन ड्राइव सहित साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया।

जाँच के दौरान लगभग 2,500 मोबाइल नंबरों और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों का विश्लेषण किया गया। थाना स्तर पर चिन्हित 159 संदिग्ध बैंक खातों और 19 रेड ज़ोन की निगरानी भी की जा रही थी, जिसके बाद दोनों फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा संभव हुआ।

आम जनता से अपील

कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने नागरिकों से अपील की है कि वे धोखाधड़ी, जालसाजी, साइबर अपराध और किसी सरकारी अधिकारी का रूप धरने जैसी आपराधिक गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जाली दस्तावेज़ों, झूठे वादों या गैर-कानूनी फायदे की किसी भी योजना के झाँसे में न आएँ। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन या क्राइम ब्रांच को दें।

क्या होगा आगे

अधिकारियों के अनुसार तलाशी अभियान से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के मामले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और इस प्रकार के संगठित गिरोहों के विरुद्ध बहु-राज्यीय समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन गिरोहों को बैंकिंग प्रणाली के ज़रिये धन हस्तांतरण की सुविधा कौन दे रहा है — और उन पर कार्रवाई कब होगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने किस मामले में छापे मारे?
कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने उस मामले में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में यह छापेमारी की, जिसमें साइबर ठगों ने श्रीनगर के एक वरिष्ठ नागरिक से ₹30 लाख से अधिक की ठगी की थी। आरोपी क्राइम ब्रांच और एसीबी अधिकारी बनकर बुजुर्गों को गिरफ्तारी की धमकी देते थे।
इस साइबर ठगी में कौन-से आरोपी संदिग्ध हैं?
तलाशी अभियान में मुबाशिर अहमद यट्टो (वानी) निवासी गांदरबल, तथा नसीर मकबूल बिचू, मुदस्सिर सादिक नजर और मुनीर अहमद मीर — तीनों निवासी श्रीनगर — के घरों पर छापे मारे गए।
डिजिटल अरेस्ट घोटाला क्या होता है?
इस घोटाले में ठग सरकारी अधिकारी बनकर फोन करते हैं और पीड़ित को बताते हैं कि उनके नाम पर कोई आपराधिक मामला दर्ज है। गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर वे मोटी रकम माँगते हैं। बुजुर्ग और कानूनी प्रक्रिया से अनजान लोग इनका सबसे आसान शिकार बनते हैं।
नोएडा में साइबर ठगी के मामले में क्या हुआ?
नोएडा में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जो फर्जी कॉल सेंटरों के ज़रिये बीमा, लोन, क्रेडिट कार्ड और नौकरी के नाम पर ठगी करते थे। दो कॉल सेंटर सील किए गए और लगभग 2,500 मोबाइल नंबरों तथा 159 संदिग्ध बैंक खातों की जाँच की गई।
साइबर ठगी की शिकायत कहाँ दर्ज कराएँ?
साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर या नज़दीकी पुलिस स्टेशन व क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई जा सकती है। कश्मीर स्पेशल क्राइम विंग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
राष्ट्र प्रेस
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