30 जुलाई 2026
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कष्टभंजन हनुमानजी ट्रेडमार्क विवाद: विश्व ब्राह्मण संगठन ने किया कड़ा विरोध, PIL की चेतावनी

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कष्टभंजन हनुमानजी ट्रेडमार्क विवाद: विश्व ब्राह्मण संगठन ने किया कड़ा विरोध, PIL की चेतावनी

सारांश

सारंगपुर के कष्टभंजन हनुमानजी के नाम और प्रतीकों पर कथित ट्रेडमार्क की खबर ने गुजरात में धार्मिक-कानूनी टकराव को जन्म दिया है। विश्व ब्राह्मण संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

विश्व ब्राह्मण संगठन के अध्यक्ष हेमांग रावल ने 13 जून 2026 को बनासकांठा में कष्टभंजन हनुमानजी के नाम व प्रतीकों पर ट्रेडमार्क का कड़ा विरोध किया।
आरोप है कि सारंगपुर स्थित स्वामीनारायण संगठन ने हनुमानजी के नाम, प्रसाद और प्रतिमा तक को बौद्धिक संपदा के रूप में दर्ज कराने का प्रयास किया।
रावल ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 का हवाला देते हुए इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
संगठन ने चेतावनी दी कि ट्रेडमार्क वापस न लिए जाने पर चैरिटी कमिश्नर, ट्रेडमार्क रजिस्ट्री, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
अब तक स्वामीनारायण संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विश्व ब्राह्मण संगठन के अध्यक्ष हेमांग रावल ने 13 जून 2026 को बनासकांठा, गुजरात में यह स्पष्ट किया कि कष्टभंजन हनुमानजी के नाम, प्रतीकों, प्रसाद और प्रतिमा पर ट्रेडमार्क व कॉपीराइट दर्ज कराने की कथित कोशिश सनातन धर्म की मूल भावना के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संबंधित पक्ष इन दावों को वापस नहीं लेता, तो संगठन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जनहित याचिका दायर करेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

रावल के अनुसार, सारंगपुर स्थित स्वामीनारायण संगठन — जो वहाँ के प्रसिद्ध हनुमानजी मंदिर का संचालन करता है — ने कथित तौर पर 'हनुमानजी', 'कष्टभंजन हनुमानजी' के नाम, उनसे जुड़े प्रसाद और धार्मिक प्रतीकों को अपनी बौद्धिक संपदा के रूप में दर्ज कराने का प्रयास किया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि हनुमानजी की प्रतिमा तक का ट्रेडमार्क और कॉपीराइट कराया गया है।

गौरतलब है कि सारंगपुर का कष्टभंजन हनुमानजी मंदिर गुजरात के सर्वाधिक श्रद्धेय धार्मिक स्थलों में से एक है और लाखों श्रद्धालु यहाँ प्रतिवर्ष दर्शन के लिए आते हैं।

संवैधानिक तर्क और कानूनी आधार

हेमांग रावल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ, आराधना और धार्मिक अनुष्ठान करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार, किसी धार्मिक प्रतीक या परंपरा पर निजी स्वामित्व का दावा करना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि बौद्धिक संपदा के मूल सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सनातन धर्म किसी एक संस्था या व्यक्ति की संपत्ति नहीं है।'

संगठन की चेतावनी और अगला कदम

विश्व ब्राह्मण संगठन ने घोषणा की है कि यदि ट्रेडमार्क और कॉपीराइट वापस नहीं लिया गया, तो वे चैरिटी कमिश्नर, ट्रेडमार्क रजिस्ट्री, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का विकल्प अपनाएंगे। रावल ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद बढ़ते जा रहे हैं।

व्यापक सामाजिक संदर्भ

आलोचकों का कहना है कि धार्मिक नामों और प्रतीकों पर व्यावसायिक स्वामित्व का दावा करना एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक संस्था पर ऐसे आरोप लगे हों — इससे पहले भी अन्य राज्यों में मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संगठनों के बीच बौद्धिक संपदा को लेकर विवाद सामने आए हैं।

फिलहाल स्वामीनारायण संगठन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्व ब्राह्मण संगठन ने संकेत दिया है कि यदि संवाद का रास्ता नहीं निकला, तो कानूनी कार्रवाई अवश्यंभावी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस विवाद की एकतरफा तस्वीर को अधूरा बनाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि ट्रेडमार्क रजिस्ट्री में वास्तव में क्या दर्ज हुआ है — आरोप और वास्तविक पंजीकरण में फर्क महत्वपूर्ण है। जब तक दोनों पक्षों के दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं होते, यह विवाद कानूनी से अधिक राजनीतिक बना रहेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कष्टभंजन हनुमानजी ट्रेडमार्क विवाद क्या है?
यह विवाद गुजरात के सारंगपुर स्थित कष्टभंजन हनुमानजी मंदिर से जुड़े नाम, प्रतीकों, प्रसाद और प्रतिमा पर कथित ट्रेडमार्क व कॉपीराइट दर्ज कराने की खबरों से उपजा है। विश्व ब्राह्मण संगठन ने इसे धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध किया है।
विश्व ब्राह्मण संगठन ने क्या कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है?
संगठन के अध्यक्ष हेमांग रावल ने कहा है कि यदि ट्रेडमार्क और कॉपीराइट वापस नहीं लिया गया तो वे चैरिटी कमिश्नर, ट्रेडमार्क रजिस्ट्री, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे।
हेमांग रावल ने किन संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया?
रावल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन अधिकारों के तहत हर नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना का अधिकार है, जिसे निजी स्वामित्व के दावे से नहीं छीना जा सकता।
स्वामीनारायण संगठन ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
अब तक सारंगपुर स्थित स्वामीनारायण संगठन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विवाद के दूसरे पक्ष का बयान अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
क्या भारत में धार्मिक नामों या प्रतीकों पर ट्रेडमार्क कराना कानूनी है?
भारतीय ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत धार्मिक नामों और प्रतीकों पर ट्रेडमार्क दर्ज कराना एक जटिल कानूनी प्रश्न है। ऐसे मामलों में संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता और बौद्धिक संपदा कानून के बीच टकराव होता है, जिसका अंतिम निर्णय न्यायालय ही करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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