कष्टभंजन हनुमानजी ट्रेडमार्क विवाद: विश्व ब्राह्मण संगठन ने किया कड़ा विरोध, PIL की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
विश्व ब्राह्मण संगठन के अध्यक्ष हेमांग रावल ने 13 जून 2026 को बनासकांठा, गुजरात में यह स्पष्ट किया कि कष्टभंजन हनुमानजी के नाम, प्रतीकों, प्रसाद और प्रतिमा पर ट्रेडमार्क व कॉपीराइट दर्ज कराने की कथित कोशिश सनातन धर्म की मूल भावना के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संबंधित पक्ष इन दावों को वापस नहीं लेता, तो संगठन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जनहित याचिका दायर करेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
रावल के अनुसार, सारंगपुर स्थित स्वामीनारायण संगठन — जो वहाँ के प्रसिद्ध हनुमानजी मंदिर का संचालन करता है — ने कथित तौर पर 'हनुमानजी', 'कष्टभंजन हनुमानजी' के नाम, उनसे जुड़े प्रसाद और धार्मिक प्रतीकों को अपनी बौद्धिक संपदा के रूप में दर्ज कराने का प्रयास किया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि हनुमानजी की प्रतिमा तक का ट्रेडमार्क और कॉपीराइट कराया गया है।
गौरतलब है कि सारंगपुर का कष्टभंजन हनुमानजी मंदिर गुजरात के सर्वाधिक श्रद्धेय धार्मिक स्थलों में से एक है और लाखों श्रद्धालु यहाँ प्रतिवर्ष दर्शन के लिए आते हैं।
संवैधानिक तर्क और कानूनी आधार
हेमांग रावल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ, आराधना और धार्मिक अनुष्ठान करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार, किसी धार्मिक प्रतीक या परंपरा पर निजी स्वामित्व का दावा करना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि बौद्धिक संपदा के मूल सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सनातन धर्म किसी एक संस्था या व्यक्ति की संपत्ति नहीं है।'
संगठन की चेतावनी और अगला कदम
विश्व ब्राह्मण संगठन ने घोषणा की है कि यदि ट्रेडमार्क और कॉपीराइट वापस नहीं लिया गया, तो वे चैरिटी कमिश्नर, ट्रेडमार्क रजिस्ट्री, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का विकल्प अपनाएंगे। रावल ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद बढ़ते जा रहे हैं।
व्यापक सामाजिक संदर्भ
आलोचकों का कहना है कि धार्मिक नामों और प्रतीकों पर व्यावसायिक स्वामित्व का दावा करना एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक संस्था पर ऐसे आरोप लगे हों — इससे पहले भी अन्य राज्यों में मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संगठनों के बीच बौद्धिक संपदा को लेकर विवाद सामने आए हैं।
फिलहाल स्वामीनारायण संगठन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्व ब्राह्मण संगठन ने संकेत दिया है कि यदि संवाद का रास्ता नहीं निकला, तो कानूनी कार्रवाई अवश्यंभावी होगी।