22 जुलाई 2026
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केदारनाथ पैदल मार्ग पर बोल्डर-मलबा गिरा, गौरीकुण्ड के पास यात्रा रोकी; SDRF टीमें मौके पर

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केदारनाथ पैदल मार्ग पर बोल्डर-मलबा गिरा, गौरीकुण्ड के पास यात्रा रोकी; SDRF टीमें मौके पर

सारांश

केदारघाटी में मंगलवार देर रात हुई भारी बारिश के बाद गौरीकुण्ड से एक किलोमीटर आगे छौड़ी क्षेत्र में बोल्डर और मलबा पैदल मार्ग पर आ गया। यात्रा रोकी गई, SDRF और जेसीबी मलबा हटाने में जुटी हैं। प्रशासन ने निर्धारित मार्ग और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

मुख्य बातें

केदारनाथ पैदल मार्ग पर गौरीकुण्ड से लगभग 1 किलोमीटर आगे छौड़ी क्षेत्र में बोल्डर और मलबा गिरने से यात्रा अवरुद्ध हुई।
22 जुलाई की देर रात हुई भारी बारिश के कारण पहाड़ी से बड़े पत्थर और मलबा पैदल मार्ग पर खिसका।
जिला प्रशासन , पुलिस और SDRF की टीमें मौके पर पहुँचीं; जेसीबी से मलबा हटाने का कार्य जारी।
यात्रियों को गौरीकुण्ड और विभिन्न पड़ावों पर सुरक्षित स्थानों पर रोका गया।
प्रशासन ने मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही यात्रा पुनः शुरू करने की बात कही; केदारघाटी में भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।

केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर मंगलवार देर रात भारी बारिश के बाद गौरीकुण्ड से लगभग एक किलोमीटर आगे छौड़ी क्षेत्र में अचानक बड़े बोल्डर और मलबा खिसककर मार्ग पर आ गया, जिससे केदारघाटी में यात्रा पूरी तरह अवरुद्ध हो गई। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने तत्काल यात्रियों की आवाजाही रोककर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराया और राहत दल मलबा हटाने में जुट गए।

मुख्य घटनाक्रम

केदारघाटी में 22 जुलाई की देर रात हुई लगातार भारी बारिश के कारण पहाड़ी से बड़े पत्थर और मलबा खिसककर केदारनाथ पैदल मार्ग पर आ गया। छौड़ी क्षेत्र में यह अवरोध इतना गंभीर था कि मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और श्रद्धालुओं की आवाजाही ठप पड़ गई।

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुँचीं। जेसीबी मशीन और अन्य संसाधनों की सहायता से बोल्डर और मलबा हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम

प्रशासन ने गौरीकुण्ड और मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम तथा मार्ग की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल जिला प्रशासन तथा मौसम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करें। यात्रा के दौरान केवल निर्धारित मार्ग का उपयोग करने और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है।

बारिश और भूस्खलन का खतरा

केदारघाटी में मानसून के दौरान भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी बारिश का दौर जारी है और कई मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि केदारनाथ यात्रा मार्ग पर मानसून के दौरान इस तरह की घटनाएँ पहले भी देखी जाती रही हैं।

क्या होगा आगे

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम सामान्य होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे जाने की अनुमति दी जाएगी। राहत और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और यात्रियों से धैर्य बनाए रखने तथा प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए मानसून के दौरान यात्रा प्रबंधन की नीति पर गंभीर पुनर्विचार आवश्यक है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केदारनाथ पैदल मार्ग कहाँ और क्यों बाधित हुआ?
गौरीकुण्ड से लगभग एक किलोमीटर आगे छौड़ी क्षेत्र में 22 जुलाई की देर रात हुई भारी बारिश के कारण पहाड़ी से बड़े बोल्डर और मलबा खिसककर पैदल मार्ग पर आ गया, जिससे मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
केदारनाथ यात्रा कब दोबारा शुरू होगी?
प्रशासन के अनुसार मौसम सामान्य होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही यात्रा पुनः शुरू की जाएगी। जेसीबी और SDRF टीमें मलबा हटाने में जुटी हैं।
फँसे यात्रियों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
जिला प्रशासन ने गौरीकुण्ड और मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका है। अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
यात्रियों को प्रशासन की क्या सलाह है?
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल निर्धारित मार्ग का उपयोग करें और जिला प्रशासन तथा मौसम विभाग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करें।
केदारघाटी में भूस्खलन का खतरा कितना है?
मानसून के दौरान केदारघाटी में भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। इस घटना के बाद प्रशासन मौसम की परिस्थितियों पर कड़ी नजर रख रहा है और स्थिति के अनुसार निर्णय लिए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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