केरल हाई कोर्ट ने एंटनी राजू की सजा की याचिका खारिज की, चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य

Click to start listening
केरल हाई कोर्ट ने एंटनी राजू की सजा की याचिका खारिज की, चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य

सारांश

पूर्व विधायक एंटनी राजू को केरल हाई कोर्ट से बड़ा झटका मिला है। उनकी सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज होने से चुनावी संभावनाएं समाप्त हो गई हैं। जानिए इस विवादास्पद मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • केरल हाई कोर्ट ने एंटनी राजू की सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज की।
  • पूर्व विधायक अब चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए हैं।
  • यह मामला 1990 के विवादास्पद 'अंडरवियर केस' से संबंधित है।
  • राजनीतिक हलचल के बीच एंटनी राजू की कानूनी परेशानियाँ बढ़ी हैं।
  • उनके पास अपील करने का विकल्प है।

कोच्चि, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व विधायक एंटनी राजू को एक गंभीर झटका लगा है। केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को उनकी सजा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। तिरुवनंतपुरम सेंट्रल से पूर्व विधायक एंटनी राजू ने अदालत से उस मामले में अपनी सजा पर रोक लगाने की प्रार्थना की थी, जिसमें उन पर अदालत के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। इस हाईकोर्ट के निर्णय से चुनाव के समय उनकी कठिनाइयाँ और बढ़ गई हैं।

इस निर्णय से पूर्व मंत्री के चुनावी प्रयासों पर प्रभावी रूप से रोक लग गई है, जिससे राज्य की राजधानी में राजनीतिक हलचल मच गई है।

४ जनवरी को नेदुमनगाड मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा इस मामले में उन्हें तीन साल की जेल की सज़ा सुनाए जाने के बाद से ही उनकी विधायकी समाप्त हो गई थी, और मंगलवार को उन्हें एक और झटका लगा जब हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

राजू 'जनधिपत्य केरल कांग्रेस' के एकमात्र विधायक हैं और दिसंबर २०२४ तक राज्य के परिवहन मंत्री थे; इसके बाद सत्तारूढ़ 'लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट' के बीच हुए समझौते के तहत उन्होंने एक अन्य सहयोगी दल के लिए यह पद छोड़ दिया था।

जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिसका मतलब है कि 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत उनकी अयोग्यता जारी रहेगी। जब तक सजा पर रोक नहीं लगती, एंटनी राजू अपना नामांकन दाखिल नहीं कर सकते, जिससे चुनाव में उनकी भागीदारी के लिए अंतिम कानूनी रास्ता भी बंद हो गया है।

हालांकि, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि २३ मार्च है, जिससे उन्हें कुछ और दिन मिल जाते हैं, क्योंकि अब वे स्थगन प्राप्त करने के लिए केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ या सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

इस मामले को अक्सर विवादास्पद 'अंडरवियर केस' के रूप में जाना जाता है और यह मामला १९९० का है। उस समय कनिष्ठ वकील रहे एंटनी राजू पर नशीले पदार्थों के एक मामले में आरोपी की मदद करने के लिए भौतिक साक्ष्य, एक अंतर्वस्त्र के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया था। बाद में किए गए वैज्ञानिक जांचों से यह साबित हुआ कि अदालत से ले जाने के बाद साक्ष्यों में हेरफेर किया गया था।

कई स्तरों पर वर्षों तक चली कानूनी कार्यवाही के बाद, निचली अदालत द्वारा दिया गया दोषसिद्धि का फैसला अब एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ पर उनके लिए मुसीबत बन गया है।

गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब इस मामले ने उनकी चुनावी संभावनाओं को पटरी से उतार दिया है। कुछ साल पहले, उन्हें वामपंथी विचारधारा के दिग्गज नेता वी. एस. अच्युतानंदन की कड़ी आपत्तियों के बाद टिकट देने से इनकार कर दिया गया था, जिन्होंने नैतिक चिंताओं को उठाया था।

अदालत के फैसले से अब उन आपत्तियों को और बल मिला है। इस फैसले ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को भी मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। तिरुवनंतपुरम सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में गठबंधन के संभावित उम्मीदवार एंटनी राजू थे।

Point of View

जहाँ एक पूर्व विधायक की कानूनी परेशानियाँ उनके चुनावी भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। इससे राजनीतिक दलों के लिए भी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

एंटनी राजू की सजा क्यों हुई है?
एंटनी राजू को अदालत के सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में सजा सुनाई गई थी।
क्या एंटनी राजू अब चुनाव लड़ सकते हैं?
नहीं, केरल हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी है, जिससे वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए हैं।
अंडरवियर केस क्या है?
यह मामला 1990 का है जिसमें एंटनी राजू पर नशीले पदार्थों के मामले में भौतिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया था।
क्या एंटनी राजू के पास अपील का विकल्प है?
हाँ, वे केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ या सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं।
इस मामले का राजनीतिक प्रभाव क्या है?
इससे एंटनी राजू की चुनावी संभावनाएँ प्रभावित हुई हैं और इससे वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की स्थिति भी कमजोर हुई है।
Nation Press