केरल बिजली संकट: फ्लोटिंग सोलर और पंप्ड-स्टोरेज से निपटेगी सरकार, मांग-आपूर्ति में 1,000 MW का अंतर
सारांश
मुख्य बातें
केरल में बढ़ते तापमान, जलाशयों में घटते जलस्तर और बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई के चलते उत्पन्न हुए गंभीर बिजली संकट से निपटने के लिए राज्य के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को घोषणा की कि सरकार फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं और पंप्ड-स्टोरेज सुविधाओं पर गंभीरता से विचार करेगी। यह प्रस्ताव तिरुवनंतपुरम में आयोजित तीन दिवसीय 'रीइमेजिनिंग केरलम' कार्यक्रम के अंतिम दिन अक्षय ऊर्जा पर हुई एक गोलमेज बैठक में सामने आया।
मौजूदा संकट की स्थिति
इस महीने की शुरुआत में केरल में बिजली की अधिकतम मांग 5,200 मेगावाट को पार कर गई, जबकि उपलब्धता केवल 4,200 मेगावाट के आसपास रही — यानी 1,000 मेगावाट से अधिक का अंतर। इसी वजह से केरल राज्य बिजली बोर्ड (KSEB) को पीक-टाइम में बिजली आपूर्ति पर पाबंदियाँ लगानी पड़ीं।
यह ऐसे समय में आया है जब एलडीएफ शासन के पिछले एक दशक के दौरान नियमित बिजली कटौती लगभग समाप्त हो गई थी। ऐसे में वर्तमान सतीशन सरकार पर तत्काल समाधान निकालने का दबाव काफी बढ़ गया है।
संकट की जड़ें: जलविद्युत और आयातित बिजली पर निर्भरता
मौजूदा संकट ने केरल की एक बड़ी कमज़ोरी उजागर कर दी है — राज्य बिजली उत्पादन के लिए काफी हद तक जलविद्युत संयंत्रों और दूसरे राज्यों से खरीदी जाने वाली बिजली पर निर्भर है। कम बारिश के कारण जलाशयों का स्तर घटने से जलविद्युत उत्पादन में भारी कमी आई है। वहीं, अधिक तापमान ने घरेलू और व्यावसायिक बिजली खपत को और बढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि अन्य राज्यों से बिजली की खरीद भी आपूर्ति संबंधी व्यापक समस्याओं के कारण बाधित रही, जिससे संकट और गहरा हो गया।
सरकार की प्रस्तावित रणनीति
मंत्री जोसेफ ने स्वीकार किया कि केरल की भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते मौसम के मद्देनज़र राज्य में बड़े पैमाने पर पारंपरिक सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएँ लगाना कठिन है। इसलिए सरकार फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स, पंप्ड-स्टोरेज सुविधाओं और स्थानीय निकायों की भागीदारी से सामुदायिक स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की संभावनाओं पर विचार करेगी।
वायनाड के बाणासुर सागर जलाशय में कंक्रीट आधारित फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की शुरुआत करने वाले एम. आर. नारायणन ने बताया कि राज्य में फ्लोटिंग सोलर के ज़रिए 2,000 मेगावाट तक बिजली पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने ऐसी परियोजनाओं को तेज़ी से मंज़ूरी देने के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था बनाने की माँग भी की।
KSEB की राय और ऊर्जा बचत पर ज़ोर
KSEB के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एम. जी. राजमणिकम ने कहा कि ऊर्जा बचत को सरकारी नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए और यही मौजूदा संकट का सबसे व्यावहारिक व तत्काल समाधान है। उन्होंने रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या को एक सकारात्मक बदलाव बताया।
राजमणिकम ने ऐसी व्यवस्था बनाने की ज़रूरत पर बल दिया जिससे उपभोक्ताओं को उनकी बिजली खपत के बारे में रियल-टाइम जानकारी और अलर्ट मिले, ताकि वे बिजली बचाने के लिए प्रेरित हों।
व्यापक ऊर्जा मिश्रण पर चर्चा
गोलमेज बैठक में सोलर फोटोवोल्टिक, पवन ऊर्जा, छोटे जलविद्युत संयंत्रों, बायोमास और कचरे से बिजली बनाने की परियोजनाओं को एक साझा ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों, समुदायों, संस्थानों और घरों के स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते तापमान के बीच केरल के घरों और कारोबारों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है — और इसका दीर्घकालिक समाधान अक्षय ऊर्जा के विविधीकरण में ही निहित दिखता है।