5 नवंबर 2026
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केरल पीएससी भ्रष्टाचार: राजीव चंद्रशेखर ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की माँग, राज्यपाल की अनुच्छेद 317 सिफारिश का हवाला

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केरल पीएससी भ्रष्टाचार: राजीव चंद्रशेखर ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की माँग, राज्यपाल की अनुच्छेद 317 सिफारिश का हवाला

सारांश

BJP केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने KPSC में कथित भ्रष्टाचार और SFI के कथित प्रभाव का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप माँगा। राज्यपाल की अनुच्छेद 317 सिफारिश और सबरीमाला घोटाले पर कांग्रेस के 'दोहरे मापदंड' को निशाना बनाते हुए यह केरल की राजनीति में बड़ा टकराव बन सकता है।

मुख्य बातें

BJP केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 5 नवंबर 2026 को KPSC में कथित भ्रष्टाचार पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की माँग की।
केरल के राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत सर्वोच्च न्यायालय से संदर्भ माँगने की सिफारिश की है।
सदानंदन मास्टर , पीटी उषा और चंद्रशेखर के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रपति से भेंट की।
आरोप है कि SFI (CPI(M) से संबद्ध) के कथित प्रभाव से योग्य युवा उम्मीदवार रोज़गार से वंचित हो रहे हैं।
कांग्रेस सरकार को सत्ता में छह महीने बीतने के बाद भी सबरीमाला स्वर्ण घोटाले में कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) में कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को लेकर राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। उन्होंने बताया कि केरल के राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से संदर्भ माँगने की सिफारिश की है।

राष्ट्रपति से मुलाकात और प्रतिनिधिमंडल

चंद्रशेखर ने बताया कि सदानंदन मास्टर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रपति से भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल में पीटी उषा और स्वयं राजीव चंद्रशेखर भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे राज्यपाल की सिफारिश पर संवैधानिक दायरे में आवश्यक कदम उठाएँ।

युवाओं पर असर और कथित कुप्रबंधन के आरोप

चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि KPSC में कथित कुप्रबंधन के कारण केरल के हज़ारों युवाओं का भविष्य अंधेरे में है। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में युवा पिछले कई महीनों से प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे हैं — इन्होंने परीक्षाएँ दीं, अच्छी रैंक हासिल की, फिर भी नौकरियाँ नहीं मिलीं।

उन्होंने कथित तौर पर आरोप लगाया कि आयोग पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का प्रभाव है, जिससे योग्य उम्मीदवार रोज़गार के अवसरों से वंचित हो रहे हैं। यह आरोप सरकार या आयोग की ओर से अभी तक खंडित नहीं किए गए हैं।

कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केरल में युवाओं के मुद्दों पर कांग्रेस का रवैया उसके राष्ट्रीय स्तर के बयानों से सर्वथा भिन्न है। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस दिल्ली में SIR का विरोध करती है, जबकि केरल में उसका समर्थन — यह उसके दोहरे मापदंड को उजागर करता है।

सबरीमाला स्वर्ण घोटाला: वादे बनाम अमल

चंद्रशेखर ने सबरीमाला स्वर्ण घोटाले को लेकर भी केरल की कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनाव प्रचार शुरू होने से दो दिन पहले राहुल गांधी ने वादा किया था कि सबरीमाला में कथित भ्रष्टाचार के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाएगा। कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए छह महीने बीत चुके हैं, परंतु अभी तक इस मामले में किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि सामने नहीं आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केरल सरकार ने कथित भ्रष्टाचार की जाँच को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकने के प्रयास किए हैं। साथ ही, KPSC के अध्यक्ष के CPI(M) से कथित संबंधों की जाँच भी नहीं कराई गई।

आगे क्या होगा

चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि केरल के युवाओं को न्याय दिलाने और KPSC की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति स्तर पर हस्तक्षेप ज़रूरी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केरल में युवा बेरोज़गारी और सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बहस तेज़ है। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति भवन की प्रतिक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय की संभावित भूमिका पर सबकी नज़रें रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह प्रावधान अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में ही लागू होता है। असली सवाल यह है कि क्या ये आरोप न्यायिक परीक्षण में टिकेंगे, या यह विधानसभा चुनाव से पहले BJP का रणनीतिक दाँव है। कांग्रेस पर 'दोहरे मापदंड' का आरोप तब तक सीमित प्रभाव रखता है जब तक KPSC सुधार की ठोस माँग को वैधानिक साक्ष्यों से नहीं जोड़ा जाता।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) विवाद क्या है?
BJP केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि KPSC में कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर अच्छी रैंक पाने वाले युवाओं को भी नौकरियाँ नहीं मिल रहीं। उनका आरोप है कि CPI(M) से जुड़े SFI का आयोग पर अनुचित प्रभाव है।
संविधान का अनुच्छेद 317 क्या है और इसकी सिफारिश क्यों महत्वपूर्ण है?
अनुच्छेद 317 राष्ट्रपति को किसी राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाने या निलंबित करने का अधिकार देता है, जिसके लिए सर्वोच्च न्यायालय से जाँच का अनुरोध किया जा सकता है। यह प्रावधान अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में उपयोग होता है, इसलिए राज्यपाल की यह सिफारिश संवैधानिक दृष्टि से असाधारण कदम मानी जाती है।
राष्ट्रपति से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन थे?
सदानंदन मास्टर के नेतृत्व में गए इस प्रतिनिधिमंडल में BJP केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और पीटी उषा भी शामिल थीं। प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रपति से भेंट कर राज्यपाल की सिफारिश पर कार्रवाई का अनुरोध किया।
सबरीमाला स्वर्ण घोटाले से इस विवाद का क्या संबंध है?
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि केरल में कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए छह महीने बीत जाने के बाद भी सबरीमाला स्वर्ण घोटाले में कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई, जबकि चुनाव से पहले राहुल गांधी ने कार्रवाई का वादा किया था। उनका तर्क है कि KPSC और सबरीमाला दोनों मामलों में कांग्रेस सरकार ने जाँच को आगे बढ़ाने के बजाय रोकने का प्रयास किया।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
राष्ट्रपति भवन की प्रतिक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय की संभावित भूमिका पर नज़रें टिकी हैं। यदि राष्ट्रपति अनुच्छेद 317 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भित करते हैं, तो KPSC की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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