केरल पीएससी घोटाला: तीन और परीक्षाओं की आपराधिक जांच, पूर्व राज्यपाल अर्लेकर ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) के भर्ती घोटाले का दायरा और विस्तृत होता दिख रहा है — क्राइम ब्रांच अब तीन और परीक्षाओं में आपराधिक मामले दर्ज करने की तैयारी कर रही है। इसी बीच, 26 अक्टूबर 2026 को यह खुलासा हुआ कि केरल के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर PSC के अध्यक्ष और 15 सदस्यों को उनके पदों से हटाने की सिफारिश की है। यह घटनाक्रम तिरुवनंतपुरम से उभरी उस बड़ी प्रशासनिक संकट की कड़ी है जिसने केरल की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन नई परीक्षाएं जांच के घेरे में
क्राइम ब्रांच जिन तीन परीक्षाओं में नए मामले दर्ज करने की तैयारी कर रही है, वे हैं — असिस्टेंट मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर, फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर और विलेज ऑयल इंस्पेक्टर। इन तीनों भर्तियों में प्रश्न पत्रों, रैंक लिस्ट और नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अब तक की जांच में प्रत्येक परीक्षा में अलग-अलग किस्म की कथित गड़बड़ियाँ सामने आई हैं।
प्रत्येक मामले में क्या-क्या आरोप
असिस्टेंट मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर परीक्षा के संदर्भ में जांचकर्ताओं के सामने यह तथ्य आया है कि PSC की तैयारी कराने वाले एक प्रमुख कोचिंग संस्थान द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों को कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्न पत्र में शामिल कर लिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस प्रक्रिया से कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिला।
फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर की भर्ती में रैंक लिस्ट के शीर्ष 100 उम्मीदवारों में सभी केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज के छात्र होने की बात सामने आई है। अन्य उम्मीदवारों का आरोप है कि उसी विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने न केवल प्रश्न पत्र तैयार किया, बल्कि वे इंटरव्यू बोर्ड में भी शामिल थे — जिससे 'हितों के टकराव' (conflict of interest) की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके साथ ही यह आरोप भी लगे हैं कि इस भर्ती में SFI कार्यकर्ताओं और छात्र संघ नेताओं को लाभ पहुँचाया गया।
विलेज ऑयल इंस्पेक्टर मामले में कथित तौर पर PSC के एक अधिकारी की पत्नी को आवश्यक योग्यताएं न होने के बावजूद नियुक्त किए जाने का आरोप है। इस आरोप ने यह गंभीर प्रश्न खड़ा किया है कि क्या भर्ती नियमों को चुनिंदा तरीके से लागू किया गया।
पूर्व राज्यपाल की कार्रवाई और राष्ट्रपति को पत्र
पूर्व राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने 15 अक्टूबर 2026 को पद छोड़ने से कुछ समय पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक विस्तृत सिफारिश पत्र भेजा था। यह सिफारिश मुख्य रूप से PSC के अपने आंतरिक सतर्कता विभाग की जांच पर आधारित थी, जिसमें परीक्षाओं के आयोजन में गंभीर खामियाँ पाई गई थीं। अर्लेकर ने PSC के अध्यक्ष और सचिव को लोक भवन बुलाकर स्पष्टीकरण भी माँगा था, लेकिन उनके जवाबों से असंतुष्ट होकर उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखना उचित समझा।
गौरतलब है कि अर्लेकर की सिफारिश में PSC के अध्यक्ष सहित 15 सदस्यों को पद से हटाने की माँग शामिल है — एक असाधारण कदम जो इस संवैधानिक संस्था के प्रति गहरे अविश्वास को दर्शाता है।
एसआईटी और केरल हाईकोर्ट की भूमिका
राज्य सरकार ने भर्ती गड़बड़ियों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन पहले ही कर दिया था। हालाँकि, जांच की धीमी गति को लेकर इसकी आलोचना हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल उच्च न्यायालय ने PSC परीक्षाओं में व्यापक गड़बड़ियों के मामले में पहले ही हस्तक्षेप किया है, जिससे जांच पर दबाव और बढ़ा है।
आगे क्या होगा
क्राइम ब्रांच द्वारा तीन नए मामले दर्ज होने के बाद PSC पर दबाव और गहरा होने की संभावना है। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रतिक्रिया और PSC में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना इस मामले की अगली बड़ी कड़ी होगी। विपक्ष और प्रभावित उम्मीदवार जांच में तेज़ी और पारदर्शी परिणाम की माँग कर रहे हैं।