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क्या अगिआंव विधानसभा सीट पर सीपीआई (एमएल) की हैट्रिक बनेगी या भाजपा की होगी वापसी?

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क्या अगिआंव विधानसभा सीट पर सीपीआई (एमएल) की हैट्रिक बनेगी या भाजपा की होगी वापसी?

सारांश

बिहार की अगिआंव विधानसभा सीट पर सीपीआई (एमएल) और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। पिछले चुनावों के परिणामों ने इस सीट पर राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। क्या इस बार सीपीआई (एमएल) अपनी हैट्रिक बनाएगी या भाजपा वापसी करेगी? जानें इस महत्वपूर्ण चुनावी दौड़ के बारे में।

मुख्य बातें

अगिआंव विधानसभा सीट पर सीपीआई (एमएल) और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर।
स्थानीय मुद्दों का चुनावी परिणाम पर बड़ा असर।
महिलाओं के रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री की योजनाएँ।
भाजपा और सीपीआई (एमएल) के बीच चुनावी इतिहास का महत्व।
स्थानीय लोगों की समस्याओं को विधानसभा में उठाने वाले उम्मीदवार की आवश्यकता।

नई दिल्ली, २२ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के भोजपुर जिले की अगिआंव विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

सीपीआई (एमएल) और भाजपा के उम्मीदवारों के बीच इस सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस सीट का चुनावी इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा है। २०१० के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी। हालाँकि, २०१५ में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन कर प्रभुनाथ प्रसाद को मैदान में उतारा और सीट जीतने में सफलता प्राप्त की।

बाद में २०२० के विधानसभा चुनाव में एनडीए की ओर से जदयू ने फिर प्रभुनाथ प्रसाद पर भरोसा जताया, लेकिन सीपीआई (एमएल) के मनोज मंजिल ने भारी मतों से जीत दर्ज की। २०२४ के उपचुनाव में भी जदयू के उम्मीदवार को सीपीआई (एमएल) के शिव प्रकाश रंजन ने हराया। इस बार २०२५ के चुनाव में सीपीआई (एमएल) ने फिर शिव प्रकाश रंजन पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने महेश पासवान को अपना उम्मीदवार बनाया है।

इस विधानसभा में रहने वाले ग्रामीण रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की समस्याओं का हल चाहते हैं। हालाँकि, सरकार एनडीए की है और विधायक दूसरी पार्टी के होने का खामियाजा भी यहाँ के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक विकास कार्यों से पल्ला झाड़ लेते हैं, यह कहकर कि हमारी सरकार नहीं है। स्थानीय लोग इस सीट पर ऐसे उम्मीदवार को चुनना चाहते हैं जो उनकी समस्याओं को विधानसभा में उठा सके।

हाल ही में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिले महिलाओं के बैंक खाते में मिले १० हजार रुपए ने महिलाओं को रोजगार करने का एक आत्मविश्वास दिया है। एनडीए के पक्ष में इस सीट पर माहौल बन रहा है। हालाँकि, एसआईआर जैसे मुद्दे भी यहाँ पर हावी हैं।

इस विधानसभा में कुल जनसंख्या ४५८८०३ है, पुरुषों की संख्या २३९४५८ और महिलाएं २१९३४५ हैं। कुल मतदाता २७१८९१ हैं, जिनमें पुरुष मतदाता १४३५८६, महिलाएं १२८३०४ और थर्ड जेंडर- मतदाता हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

आगामी चुनावों में उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर सकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगिआंव विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास क्या है?
अगिआंव विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा है। 2010 में भाजपा ने जीत हासिल की, जबकि 2015 में जदयू ने राजद के साथ मिलकर जीत दर्ज की। 2020 में सीपीआई (एमएल) ने भारी मतों से जीत दर्ज की।
इस सीट पर मुख्य मुद्दे क्या हैं?
इस सीट पर ग्रामीण रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की समस्याएँ प्रमुख मुद्दे हैं। लोग ऐसे उम्मीदवार की तलाश कर रहे हैं जो उनकी समस्याओं को विधानसभा में उठाने में सक्षम हो।
इस बार कौन से उम्मीदवार चुनाव में हैं?
इस बार सीपीआई (एमएल) ने शिव प्रकाश रंजन पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने महेश पासवान को अपना उम्मीदवार बनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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