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क्या 'जिहाद' को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है? : मोहम्मद अदीब

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क्या 'जिहाद' को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है? : मोहम्मद अदीब

सारांश

क्या 'जिहाद' शब्द को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है? जानें मोहम्मद अदीब के विचार, जो जिहाद की पवित्रता को उजागर करते हैं। उन्होंने समाज में फैली भ्रांतियों और राजनीतिक बयानबाजियों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। यह लेख महत्वपूर्ण जानकारियों से भरा हुआ है।

मुख्य बातें

जिहाद का सही अर्थ समझना जरूरी है।
मीडिया और राजनीति में जिहाद को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
जिहाद एक पवित्र संकल्पना है।
मोहम्मद अदीब ने इसे सही तरीके से परिभाषित किया है।
आवाज उठाना और लड़ाई लड़ना सभी का कर्तव्य है।

नई दिल्ली, १३ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के 'जिहाद' पर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गई हैं। इस बीच, शनिवार को इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स के चेयरमैन और पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने जिहाद को जानबूझकर बदनाम करने का आरोप लगाया।

मोहम्मद अदीब ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "गीता में भगवान कृष्ण ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर आप अन्याय के खिलाफ नहीं लड़ते हैं, तो आपको लड़ना चाहिए। जीतने पर इनाम मिलेगा, हारने पर कुछ नहीं होगा, लेकिन यदि आप नहीं लड़ते हैं, तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। मुझे लगता है कि 'जिहाद' शब्द को जानबूझकर बदनाम किया गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "समस्या यह है कि इस देश में 'जिहाद' के अर्थ का जानबूझकर गलत इस्तेमाल किया गया है। मीडिया और सरकार ने एक ऐसा नैरेटिव बनाया है कि जिहाद का तात्पर्य हत्या और हिंसा से है। मौलाना महमूद मदनी ने अपने तर्कों के साथ जिहाद का सही अर्थ समझाया है और इसे बदनाम करने के प्रयासों का जवाब दिया है।"

अदीब ने कहा, "जिहाद एक पवित्र संकल्पना है, जिसका अर्थ है अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और पीड़ितों की सहायता करना। हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण ने अर्जुन से क्या कहा था? 'उन्हें मारो, उन्हें रोको।' क्या इसका अर्थ यह है कि हिंदू धर्म में अपने रिश्तेदारों को मारना उचित है? हमने कभी ऐसा नहीं कहा।"

'उम्मीद' पोर्टल के संबंध में 'ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड' (एआईएमपीएलबी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन से मुलाकात की थी। इंडियन मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स के चेयरमैन और पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब भी इस प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे, जिन्होंने चर्चा को सकारात्मक बताया।

उन्होंने कहा, "मैं भी उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था। हमने अपनी समस्याएँ और शिकायतें विस्तार से बताईं। मुझे खुशी है कि मंत्री ने हमारी बात ध्यान से सुनी और हमें विश्वास दिलाया कि वह इस दिशा में प्रयास करेंगे। डेडलाइन बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यह हमारी पहली मुलाकात थी। बिल पेश होने से पहले हमने कई प्रयास किए, लेकिन बहुमत के कारण हमारी चिंताओं को अनसुना किया गया। इस कानून से हमें पालन करना होगा।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिहाद का असली अर्थ क्या है?
जिहाद का अर्थ है अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और पीड़ितों की सहायता करना।
क्या जिहाद को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है?
हां, मीडिया और सरकार के माध्यम से जिहाद को हत्या और हिंसा के रूप में पेश किया जा रहा है।
मोहम्मद अदीब का इस विषय पर क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि जिहाद को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है और इसका सही अर्थ समझाया जाना चाहिए।
क्या मौलाना महमूद मदनी ने जिहाद का सही अर्थ बताया है?
हां, उन्होंने अपने तर्कों के साथ जिहाद का सही अर्थ समझाया है।
क्या 'जिहाद' एक पवित्र संकल्पना है?
जी हां, जिहाद का अर्थ है अन्याय के खिलाफ लडऩा और पीड़ितों की मदद करना।
राष्ट्र प्रेस
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