लद्दाख में 17 नई तहसीलें और 9 नए PWD-PHE डिवीजन, मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने किए बड़े प्रशासनिक ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने 13 जुलाई को लेह में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और सुशासन को गति देने के उद्देश्य से कई अहम घोषणाएँ कीं। इनमें 17 नई तहसीलों में तहसीलदारों की तैनाती, 9 नए इंजीनियरिंग डिवीजनों की स्थापना और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) अधिनियम के लाभों को सभी सात नए जिलों तक विस्तार देने की योजना शामिल है।
नई तहसीलें और प्रशासनिक ढाँचा
मुख्य सचिव कुंद्रा ने बताया कि सात नए जिलों के गठन के बाद 17 नई तहसीलों में अधिकारियों की तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इन तहसीलों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को गाँवों और दूरदराज के इलाकों तक सीधे पहुँचाना है, जो अब तक प्रशासनिक दूरी के कारण वंचित रहे थे।
इसके साथ ही, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) और बाढ़ नियंत्रण विभाग के तहत चार नए डिवीजन तथा लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत पाँच नए डिवीजन स्थापित किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख के दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे की कमी लंबे समय से एक प्रमुख चुनौती रही है।
भर्ती प्रक्रिया की स्थिति
मुख्य सचिव ने सरकारी भर्तियों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से अब तक 4,011 ग्रुप-बी और ग्रुप-सी के गैर-राजपत्रित पदों पर नियुक्तियाँ की जा चुकी हैं। 473 पदों के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जबकि 484 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी है।
इसके अतिरिक्त 648 नए पदों के लिए भर्ती विज्ञापन पहले ही जारी किए जा चुके हैं। 27 ग्रुप-बी राजपत्रित पदों पर भर्ती पूरी हो चुकी है, जबकि 344 पदों का प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा गया है।
शिक्षा और पुलिस विभाग में भर्ती
स्कूल शिक्षा विभाग में 262 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी होने की बात कही गई है। लद्दाख विश्वविद्यालय में 47 फैकल्टी पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस विभाग में 40 सब-इंस्पेक्टर पदों के लिए लगभग 7,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 341 कांस्टेबल और फायरमैन पदों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।
गौरतलब है कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख में सरकारी भर्तियाँ एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रही हैं, और स्थानीय युवाओं में रोज़गार को लेकर अपेक्षाएँ अधिक हैं।
LAHDC अधिनियम और संवैधानिक प्रावधान
कुंद्रा ने बताया कि LAHDC अधिनियम के लाभों को सभी नए जिलों तक पहुँचाने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर तेजी से काम किया जा रहा है। लद्दाख की भूमि, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों पर धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
लंबित पदोन्नतियों (DPC) को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी विभागों को दिए गए हैं। प्रशासन ने पारदर्शी शासन, विकेंद्रीकरण और दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुँचाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।