लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई NSCS में सैन्य सलाहकार नियुक्त, पहले सेवारत अधिकारी बने
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में नया सैन्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। 12 जून को की गई इस नियुक्ति के साथ वह इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने वाले देश के पहले सेवारत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बन गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी का स्थान लिया है, जो NSCS में सैन्य सलाहकार के रूप में सेवा देने के बाद हाल ही में देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल घई सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) के पद पर कार्यरत रहे हैं — एक ऐसी भूमिका जो सैन्य अभियानों की योजना और क्रियान्वयन के केंद्र में होती है।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल घई तब DGMO के पद पर थे और उन्होंने सैन्य अभियानों के संचालन तथा रणनीतिक समन्वय में निर्णायक भूमिका निभाई थी। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था और कई आतंकवादियों को मार गिराया था। इस सफल अभियान के बाद उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (उप प्रमुख रणनीति) के पद पर पदोन्नत किया गया।
NSCS में सैन्य सलाहकार का महत्व
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार का पद रक्षा और सुरक्षा मामलों में सरकार को रणनीतिक परामर्श देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पद सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सैन्य विशेषज्ञता उपलब्ध कराता है। गौरतलब है कि यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत सैन्य आधुनिकीकरण, संयुक्त सैन्य संरचना (Theatre Commands) और समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को पुनर्गठित करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि सक्रिय सेवा में रहते हुए लेफ्टिनेंट जनरल घई का व्यापक परिचालन और रणनीतिक अनुभव NSCS को वास्तविक समय की सैन्य अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा। यह पहली बार है जब किसी सेवारत वरिष्ठ अधिकारी को इस पद पर नियुक्त किया गया है — जो स्वयं में नीतिगत बदलाव का संकेत है। आने वाले समय में उनकी भूमिका भारत की सुरक्षा नीति निर्माण में और अधिक प्रभावशाली होने की उम्मीद है।