मध्य प्रदेश कांग्रेस का 3 दिन का 'मौन सत्याग्रह', टीवी डिबेट बहिष्कार का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 1 जुलाई 2026 को घोषणा की कि उसके सभी अधिकृत नेता, प्रवक्ता और प्रतिनिधि आगामी तीन दिनों तक किसी भी टीवी चैनल की डिबेट में हिस्सा नहीं लेंगे। पार्टी ने इस कदम को 'मौन सत्याग्रह' की संज्ञा दी है और इसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कथित रवैये के विरुद्ध लोकतांत्रिक विरोध बताया है।
बहिष्कार की वजह क्या है
कांग्रेस संगठन के प्रभारी महासचिव संजय कामले ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा कि भूमि घोटाला प्रकरण को लेकर प्रदेशभर में व्यापक जनचर्चा है और बड़ी संख्या में नागरिकों ने सोशल मीडिया पर तथ्य, दस्तावेज और सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इस गंभीर विषय को न तो प्रसारित किया और न ही इस पर सार्थक टीवी बहस आयोजित की।
पार्टी का यह भी कहना है कि जनता का ध्यान अन्य मुद्दों की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की जनता तक महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रभावी रूप से नहीं पहुँच पा रही हैं।
बहिष्कार के दौरान क्या होगा
कामले ने स्पष्ट किया कि इस तीन दिवसीय अवधि में कोई भी अधिकृत नेता या प्रवक्ता किसी भी टेलीविजन बहस में शामिल नहीं होगा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोई व्यक्तिगत आधिकारिक वक्तव्य नहीं दिया जाएगा। हालाँकि, अधिकृत पत्रकार वार्ताएँ इस बहिष्कार से बाहर रहेंगी।
पार्टी के वरिष्ठ नेता संभागीय मुख्यालयों पर निर्धारित तिथियों के अनुसार पत्रकार वार्ताओं को संबोधित करेंगे। विशेष रूप से 3 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष और जिला प्रभारी की संयुक्त उपस्थिति में पत्रकार वार्ता आयोजित की जाएगी।
किन मुद्दों को उठाएगी कांग्रेस
टीवी डिबेट बहिष्कार के बावजूद पार्टी ने पत्रकार वार्ताओं के माध्यम से कई जनसरोकार के विषय प्रमुखता से उठाने की योजना बनाई है। इनमें शामिल हैं — नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में कथित अनियमितताएँ व पेपर लीक, किसानों की समस्याएँ, अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे में कथित अनियमितताएँ, उज्जैन महाकाल लोक निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और भूमि घोटाला प्रकरण।
आगे क्या होगा
यह देखना होगा कि तीन दिन बाद कांग्रेस अपना यह 'मौन सत्याग्रह' समाप्त करती है या इसे आगे बढ़ाती है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस बहिष्कार पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देता है, यह भी मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में एक अहम पहलू बनेगा।