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मध्य प्रदेश विधानसभा का अगला सत्र होगा पेपरलेस, नेवा प्रशिक्षण में बोले अध्यक्ष तोमर

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मध्य प्रदेश विधानसभा का अगला सत्र होगा पेपरलेस, नेवा प्रशिक्षण में बोले अध्यक्ष तोमर

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा डिजिटल क्रांति की दहलीज पर है। अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार अगला सत्र पूरी तरह पेपरलेस होगा। नेवा के ज़रिये प्रश्नों की संख्या 700 से 4,000 तक पहुँची — यह सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, विधायी जवाबदेही में छह गुना उछाल है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 28 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य विधानसभा का अगला सत्र पेपरलेस होगा।
राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन नेवा (NeVA) के तहत विधायकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद एक सत्र में प्रश्नों की संख्या 700 से बढ़कर 4,000 हो गई है।
तोमर ने बताया कि हाउस कमेटी की सहभागिता के बाद यह परियोजना अंतिम चरण में है।
अब मध्य प्रदेश विधानसभा भी राष्ट्रीय नेवा प्लेटफॉर्म पर दिखाई देगी।

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 28 अक्टूबर 2026 को भोपाल में संकेत दिए कि राज्य विधानसभा का अगला सत्र पूरी तरह पेपरलेस होगा। यह घोषणा राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन नेवा (NeVA) के अंतर्गत विधायकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र के दौरान की गई। डिजिटल रूपांतरण की इस पहल को मध्य प्रदेश विधायिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नेवा प्रशिक्षण और पेपरलेस सत्र की घोषणा

विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने उद्घाटन सत्र में बताया कि ई-विधानसभा व्यवस्था लागू होने के बाद विधायी कार्यों में कुशलता और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि जब भौतिक प्रश्न-पत्र जमा करने की प्रक्रिया थी, तब एक सत्र में औसतन 700 प्रश्न आते थे। ऑनलाइन व्यवस्था के बाद यह संख्या बढ़कर 4,000 प्रश्न प्रति सत्र हो गई है।

तोमर ने कहा, 'ये चार हजार प्रश्न हर सदस्य के क्षेत्र की आवाज हैं। जब इतनी बड़ी संख्या में समस्याएँ सरकार तक पहुँचती हैं, तो सरकार उनके निराकरण के लिए व्यवस्थाओं को अधिक सक्षम बनाती है।' उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटलीकरण की प्रक्रिया 'अब अंतिम चरण में' है।

नेवा योजना की पृष्ठभूमि

विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने बताया कि नेवा परियोजना की परिकल्पना के पीछे यह विचार था कि लोकसभा, राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाएँ एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि केंद्र में संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए उन्होंने इस परियोजना के क्रियान्वयन का दायित्व संभाला था और इसे लॉन्च किया था।

मध्य प्रदेश में हाउस कमेटी के सभी सदस्यों की सहभागिता से इस पर विचार-विमर्श के बाद यह परियोजना मूर्तरूप ले रही है। गौरतलब है कि अब मध्य प्रदेश विधानसभा भी राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन पर दिखाई देगी, जो देश के संसदीय इतिहास में एकीकरण की दिशा में अहम पड़ाव है।

डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता पर जोर

तोमर ने कहा कि तकनीक का उपयोग समय की बचत और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित करता है। उन्होंने किसान सम्मान निधि और लाडली बहना योजना का उदाहरण देते हुए बताया कि डिजिटल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और पात्र हितग्राहियों के खाते में सीधे धनराशि पहुँचती है।

उन्होंने तकनीक के प्रति सतर्क नेतृत्व की भी चर्चा की और कहा कि जब भी कोई नई तकनीक आती है, एक पक्ष उसका विरोध करता है जबकि दूसरा पक्ष उसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करके आगे बढ़ता है।

विधायकों और जनता पर असर

पेपरलेस विधानसभा का सबसे सीधा लाभ विधायकों और उनके मतदाताओं को मिलेगा। 700 से 4,000 प्रश्न तक की वृद्धि यह दर्शाती है कि डिजिटल माध्यम ने विधायकों की जनसमस्याएँ उठाने की क्षमता में करीब छह गुना बढ़ोतरी की है। इससे विधायी जवाबदेही और जन-प्रतिनिधित्व दोनों मजबूत होते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य अपनी विधानसभाओं को नेवा से जोड़ने की प्रक्रिया में हैं। मध्य प्रदेश का यह कदम राज्य को डिजिटल विधायिका की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करता है। आने वाले सत्र में इस पहल का व्यावहारिक परीक्षण होगा और इसके परिणाम अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 प्रश्नों की छह गुना वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये प्रश्न त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उत्तर भी पाते हैं। नेवा की परिकल्पना महत्वाकांक्षी है, किंतु देश की कई विधानसभाओं में तकनीकी प्रशिक्षण और वास्तविक डिजिटल उपयोग के बीच का अंतर अब भी बड़ा है। पेपरलेस सत्र तभी सार्थक होगा जब सभी विधायक — विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधि — समान दक्षता से प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकें। बिना डिजिटल समावेश सुनिश्चित किए, यह पहल केवल कागज़ी क्रांति बनकर रह सकती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश विधानसभा का पेपरलेस सत्र क्या है?
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 28 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य का अगला विधानसभा सत्र पूरी तरह पेपरलेस होगा। इसके तहत प्रश्न, सूचनाएँ और दस्तावेज़ सभी डिजिटल माध्यम से साझा किए जाएंगे।
नेवा (NeVA) एप्लीकेशन क्या है और यह कैसे काम करती है?
नेवा यानी राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं को एकीकृत करता है। इसके ज़रिये विधायक प्रश्न दर्ज कर सकते हैं, दस्तावेज़ देख सकते हैं और सत्र की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं।
पेपरलेस विधानसभा से विधायकों को क्या फायदा होगा?
डिजिटल व्यवस्था के बाद एक सत्र में प्रश्नों की संख्या 700 से बढ़कर 4,000 हो गई है, जो विधायकों की जनसमस्याएँ उठाने की क्षमता में लगभग छह गुना वृद्धि दर्शाती है। इससे जन-प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और विधायी कुशलता में सुधार की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में नेवा प्रशिक्षण अभी किस चरण में है?
अध्यक्ष तोमर के अनुसार डिजिटलीकरण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। 28 अक्टूबर 2026 को भोपाल में विधायकों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण सत्र शुरू किया गया, जिसके बाद अगला विधानसभा सत्र पेपरलेस आयोजित होने की योजना है।
क्या अन्य राज्यों की विधानसभाएँ भी नेवा से जुड़ी हैं?
नेवा एक राष्ट्रीय परियोजना है जिसका उद्देश्य देश की सभी विधानसभाओं को एक डिजिटल मंच पर लाना है। मध्य प्रदेश के इस कदम के बाद वह उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जो नेवा पर सक्रिय रूप से दिखाई देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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