विश्व आदिवासी दिवस पर MP में सार्वजनिक अवकाश की माँग, कांग्रेस ने CM यादव को सौंपे दो ज्ञापन
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की माँग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के विधायकों ने 31 जुलाई को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में पहुँचे इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे, जिनमें आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश की माँग
पहले ज्ञापन में कांग्रेस ने माँग की है कि 9 अगस्त को मध्य प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि विश्व आदिवासी दिवस, आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, इतिहास, भाषा और प्रकृति संरक्षण में उनके योगदान तथा संवैधानिक अधिकारों के सम्मान का प्रतीक है। राज्य में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाता है। पार्टी ने यह भी माँग की है कि इस अवसर पर राज्यभर में सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थाओं के निजीकरण पर आपत्ति
दूसरे ज्ञापन में कांग्रेस विधायकों ने आदिवासी अंचल में संचालित शासकीय आईटीआई, आदिवासी छात्रावासों और स्वास्थ्य केंद्रों को निजी संस्थानों, कंपनियों, ट्रस्ट या एजेंसियों को सौंपे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि ये संस्थाएँ केवल सरकारी भवन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के आधार स्तंभ हैं।
कांग्रेस का कहना है कि निजीकरण से गरीब एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों, युवाओं और परिवारों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए पार्टी ने माँग की है कि इन संस्थाओं का संचालन सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण एवं जवाबदेही के अंतर्गत ही जारी रहे।
आदिवासी समुदाय की व्यापक पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ आदिवासी आबादी का अनुपात सर्वाधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर देशभर में आदिवासी अधिकारों को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाताओं की संख्या राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इन ज्ञापनों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस के इस कदम से राज्य में आदिवासी मुद्दों पर राजनीतिक सक्रियता के संकेत मिलते हैं, और 9 अगस्त से पहले सरकार के रुख पर सभी की नज़रें टिकी हैं।