29 अगस्त 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद प्रतिपदा पर भांग से बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भस्म आरती में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु

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महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद प्रतिपदा पर भांग से बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भस्म आरती में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु

सारांश

भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को भांग से अलौकिक रूप में सजाया गया। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म आरती अर्पित की गई और हज़ारों श्रद्धालु बीती रात से कतारबद्ध होकर इस दिव्य दृश्य के साक्षी बने।

मुख्य बातें

29 अगस्त 2026 , शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (सुबह 9:57 बजे तक) पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को भांग से विशेष शृंगार कर अद्‌भुत साकार स्वरूप में सजाया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई।
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस शामिल रहा।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 29 अगस्त 2026, शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (सुबह 9:57 बजे तक) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा को भांग से अलौकिक रूप में सजाया गया और इस दिव्य दर्शन के लिए मंदिर परिसर में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए।

मंदिर के कपाट खुलने का क्रम

शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिपूर्वक खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन प्राप्त हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

अभिषेक और शृंगार की विधि

मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के मध्य जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से बाबा का अभिषेक हुआ। पूजा के प्रथम चरण में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा ने मुकुट धारण किया और तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े तथा शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न की गई। इस अवसर पर बाबा महाकाल को भांग से विशेष शृंगार कर अद्‌भुत साकार स्वरूप प्रदान किया गया।

परंपरा और मान्यता

परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति

मंदिर के पुजारी ने महाआरती विधिवत संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा में थे। उज्जैन की इस पावन नगरी में देशभर से श्रद्धालु बाबा महाकाल की भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पहुँचते हैं। यह परंपरा सदियों से अनवरत रूप से चली आ रही है और हर विशेष तिथि पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है जो हर विशेष तिथि पर देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। भाद्रपद जैसे पर्व-काल में यहाँ की भीड़ और आस्था का यह संगम यह भी दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के लिए यह अवसर जितना आस्था का है, उतना ही व्यवस्था प्रबंधन की परीक्षा का भी है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली एक विशेष आरती है जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में भांग से शृंगार क्यों किया जाता है?
भगवान शिव की उपासना परंपरा में भांग को पवित्र माना जाता है और विशेष तिथियों पर बाबा महाकाल को भांग से शृंगार कर अलौकिक स्वरूप प्रदान किया जाता है। यह सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर प्रशासन द्वारा परंपरा और मर्यादा के पालन हेतु निर्धारित किया गया है।
महाकाल भस्म आरती का आयोजन कौन करता है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है और मंदिर के पुजारी महाआरती संपन्न कराते हैं। भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ही कपाट खोले जाते हैं।
उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए कब जाना उचित है?
भाद्रपद, श्रावण और अन्य पर्व-तिथियों पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं और श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है। भस्म आरती के दर्शन के लिए पूर्व-पंजीकरण की सलाह दी जाती है क्योंकि बड़ी संख्या में भक्त बीती रात से ही कतारबद्ध हो जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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