महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद प्रतिपदा पर भांग से बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भस्म आरती में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 29 अगस्त 2026, शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (सुबह 9:57 बजे तक) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा को भांग से अलौकिक रूप में सजाया गया और इस दिव्य दर्शन के लिए मंदिर परिसर में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए।
मंदिर के कपाट खुलने का क्रम
शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिपूर्वक खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन प्राप्त हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अभिषेक और शृंगार की विधि
मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के मध्य जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से बाबा का अभिषेक हुआ। पूजा के प्रथम चरण में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा ने मुकुट धारण किया और तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े तथा शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न की गई। इस अवसर पर बाबा महाकाल को भांग से विशेष शृंगार कर अद्भुत साकार स्वरूप प्रदान किया गया।
परंपरा और मान्यता
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति
मंदिर के पुजारी ने महाआरती विधिवत संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा में थे। उज्जैन की इस पावन नगरी में देशभर से श्रद्धालु बाबा महाकाल की भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पहुँचते हैं। यह परंपरा सदियों से अनवरत रूप से चली आ रही है और हर विशेष तिथि पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।