16 जुलाई 2026
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ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भोर 4 बजे भस्म आरती में उमड़े देश-विदेश के भक्त

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ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भोर 4 बजे भस्म आरती में उमड़े देश-विदेश के भक्त

सारांश

ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भोर 4 बजे कपाट खुले। पंचामृत अभिषेक, दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। अधिकमास के दुर्लभ संयोग में देश-विदेश से श्रद्धालु देर रात से ही कतारों में खड़े रहे।

मुख्य बातें

31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भोर 4 बजे बाबा महाकाल के कपाट खोले गए।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों संग कपाट खुले और पंचामृत अभिषेक व भस्म आरती संपन्न हुई।
देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में दर्शन के लिए खड़े रहे।
अधिकमास लगभग तीन वर्षों में एक बार आता है; इस दौरान महाकाल दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' स्वरूप की अवधारणा शैव दर्शन के अनुसार भक्त-कल्याण हेतु परमात्मा के साकार प्रकटीकरण को दर्शाती है।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर बाबा महाकाल के पट भोर 4 बजे खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा।

कपाट खुलने का क्रम

मान्यता के अनुसार, भोर में सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई, जिसके बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर पवित्र वातावरण में डूब गया।

अभिषेक और भस्म आरती

कपाट खुलने के उपरांत सर्वप्रथम बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से निर्मित पंचामृत से दिव्य अभिषेक संपन्न हुआ। आकर्षक शृंगार के बाद मंदिर के पुजारी ने भस्म आरती और महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस दुर्लभ आरती के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया।

देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु

अपने आराध्य के दर्शन की अभिलाषा लिए देश के कोने-कोने तथा विदेशों से आए भक्त देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। अधिकमास के इस पावन संयोग में बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिसके कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या असाधारण रूप से अधिक रही। आम जनमानस के साथ-साथ कई著名 हस्तियाँ भी मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचती रही हैं।

निराकार से साकार का आध्यात्मिक अर्थ

बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' स्वरूप की अवधारणा शैव दर्शन की गहरी जड़ों से जुड़ी है। इसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण हेतु एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं। यह दार्शनिक रूपांतरण ही महाकालेश्वर की आराधना को विशिष्ट बनाता है।

अधिकमास का विशेष महत्व

ज्येष्ठ अधिकमास हिंदू पंचांग में एक दुर्लभ संयोग है जो लगभग तीन वर्षों में एक बार आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में किए गए दर्शन, पूजन और दान का फल कई गुना अधिक होता है। यही कारण है कि महाकालेश्वर मंदिर में इस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ती है और आगामी दिनों में भी यह सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। यह ऐसे समय में और प्रासंगिक हो जाता है जब मध्य प्रदेश सरकार महाकाल लोक परियोजना के विस्तार पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था की पर्याप्तता पर सवाल उठते रहे हैं — जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर मौन रहती है। आस्था और अवसंरचना के इस संगम को संतुलित करना ही उज्जैन के दीर्घकालिक धार्मिक पर्यटन की असली कसौटी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर महाकाल मंदिर के कपाट कितने बजे खुले?
31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर बाबा महाकाल के कपाट भोर 4 बजे खोले गए। भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ यह परंपरागत प्रक्रिया संपन्न हुई।
महाकाल भस्म आरती में क्या होता है?
भस्म आरती में सर्वप्रथम बाबा महाकाल को हरिओम जल, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद दिव्य शृंगार और भस्म आरती संपन्न होती है, जिसे मंदिर के पुजारी महाआरती के साथ पूर्ण करते हैं।
ज्येष्ठ अधिकमास में महाकाल दर्शन का क्या महत्व है?
अधिकमास हिंदू पंचांग में लगभग तीन वर्षों में एक बार आने वाला दुर्लभ संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में किए गए दर्शन, पूजन और दान का फल कई गुना अधिक होता है, इसीलिए इस अवधि में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़ उमड़ती है।
बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' स्वरूप का क्या अर्थ है?
यह शैव दर्शन की अवधारणा है जिसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण के लिए एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं। यही दार्शनिक रूपांतरण महाकालेश्वर की आराधना को विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान देता है।
महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कहाँ से श्रद्धालु आते हैं?
बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। विशेष धार्मिक अवसरों पर वे देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े होकर प्रतीक्षा करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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