ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भोर 4 बजे भस्म आरती में उमड़े देश-विदेश के भक्त
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर बाबा महाकाल के पट भोर 4 बजे खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा।
कपाट खुलने का क्रम
मान्यता के अनुसार, भोर में सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई, जिसके बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर पवित्र वातावरण में डूब गया।
अभिषेक और भस्म आरती
कपाट खुलने के उपरांत सर्वप्रथम बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से निर्मित पंचामृत से दिव्य अभिषेक संपन्न हुआ। आकर्षक शृंगार के बाद मंदिर के पुजारी ने भस्म आरती और महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस दुर्लभ आरती के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया।
देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु
अपने आराध्य के दर्शन की अभिलाषा लिए देश के कोने-कोने तथा विदेशों से आए भक्त देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। अधिकमास के इस पावन संयोग में बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिसके कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या असाधारण रूप से अधिक रही। आम जनमानस के साथ-साथ कई著名 हस्तियाँ भी मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचती रही हैं।
निराकार से साकार का आध्यात्मिक अर्थ
बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' स्वरूप की अवधारणा शैव दर्शन की गहरी जड़ों से जुड़ी है। इसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण हेतु एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं। यह दार्शनिक रूपांतरण ही महाकालेश्वर की आराधना को विशिष्ट बनाता है।
अधिकमास का विशेष महत्व
ज्येष्ठ अधिकमास हिंदू पंचांग में एक दुर्लभ संयोग है जो लगभग तीन वर्षों में एक बार आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में किए गए दर्शन, पूजन और दान का फल कई गुना अधिक होता है। यही कारण है कि महाकालेश्वर मंदिर में इस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ती है और आगामी दिनों में भी यह सिलसिला जारी रहने की संभावना है।