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उज्जैन: ज्येष्ठ अधिकमास में महाकाल मंदिर में भस्म आरती, भोर 4 बजे खुले पट

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उज्जैन: ज्येष्ठ अधिकमास में महाकाल मंदिर में भस्म आरती, भोर 4 बजे खुले पट

सारांश

ज्येष्ठ अधिकमास की षष्ठी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भोर चार बजे पट खुले और भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। पंचामृत अभिषेक, दिव्य शृंगार और महाआरती के बाद 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से परिसर गूंज उठा। अधिकमास के कारण श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़ देर रात से ही कतारों में खड़ी रही।

मुख्य बातें

6 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष षष्ठी पर महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
मंदिर के पट भोर चार बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ खोले गए।
बाबा महाकाल का हरिओम जल और पंचामृत — दूध, दही सहित — से विधिवत अभिषेक किया गया।
दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों और शंखध्वनि से गुंजायमान रहा।
अधिकमास के विशेष धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े रहे।

उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 6 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की षष्ठी के अवसर पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भोर चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के साक्षात दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

कपाट खुलने की पवित्र प्रक्रिया

सुबह भोर में सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई, तत्पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही घंटियों, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से समूचा मंदिर परिसर पवित्र हो उठा। यह परंपरा सदियों से अनवरत चली आ रही है और भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।

अभिषेक और शृंगार का दिव्य क्रम

कपाट खुलने के पश्चात सर्वप्रथम बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके उपरांत पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से विधिपूर्वक अभिषेक किया गया। आकर्षक एवं दिव्य शृंगार के बाद मंदिर के पुजारियों ने भस्म आरती और महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अधिकमास के पवित्र अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े नज़र आए। भस्म आरती के दर्शन के लिए आए भक्तों ने बाबा महाकाल की जय-जयकार करते हुए अपनी आस्था प्रकट की। गौरतलब है कि अधिकमास में महाकाल दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिसके कारण इस अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है।

निराकार से साकार: आध्यात्मिक दर्शन

बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' रूप की संकल्पना शिव के उस गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक रूपांतरण को दर्शाती है, जिसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा भक्तों के कल्याण हेतु एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप में प्रकट होते हैं। यही भाव महाकाल की उपासना को अन्य तीर्थों से विशिष्ट बनाता है।

आगे का महत्व

ज्येष्ठ अधिकमास की समाप्ति तक महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान जारी रहने की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे व्यवस्थित दर्शन के लिए पूर्व-पंजीकरण का लाभ उठाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का मूल स्तंभ है — जो हर अधिकमास और विशेष तिथि पर लाखों श्रद्धालुओं को खींचती है। यह ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो जाता है जब धार्मिक पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था में तेज़ी से योगदान दे रहा है। मंदिर प्रशासन के सामने असली चुनौती भीड़ प्रबंधन और आस्था के अनुभव को संतुलित रखने की है — क्योंकि देर रात से कतारों में खड़े श्रद्धालु यह बताते हैं कि बुनियादी ढाँचे की माँग आस्था की माँग से पीछे चल रही है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल भस्म आरती क्या है और यह कब होती है?
महाकाल भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन भोर में होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल का भस्म से श्रृंगार कर आरती की जाती है। यह भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों में से एक माना जाता है।
6 जून को महाकाल मंदिर के पट कितने बजे खुले?
6 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष षष्ठी पर मंदिर के पट भोर चार बजे खोले गए। भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ यह परंपरागत प्रक्रिया संपन्न हुई।
ज्येष्ठ अधिकमास में महाकाल दर्शन का क्या महत्व है?
ज्येष्ठ अधिकमास को हिंदू पंचांग में अतिरिक्त पवित्र मास माना जाता है, जो लगभग हर तीन वर्ष में आता है। इस अवधि में महाकाल दर्शन का धार्मिक फल कई गुना अधिक माना जाता है, इसीलिए इस दौरान श्रद्धालुओं की संख्या असाधारण रूप से बढ़ जाती है।
बाबा महाकाल का अभिषेक किन वस्तुओं से किया जाता है?
बाबा महाकाल का अभिषेक हरिओम जल, पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से किया जाता है। इसके बाद दिव्य शृंगार कर भस्म आरती संपन्न की जाती है।
'निराकार से साकार' का महाकाल संदर्भ में क्या अर्थ है?
यह शिव के उस आध्यात्मिक रूपांतरण को दर्शाता है जिसमें अनंत और रूपहीन परमात्मा भक्तों के कल्याण के लिए एक पूजनीय स्वरूप में प्रकट होते हैं। महाकालेश्वर की उपासना में यही दर्शन केंद्रीय भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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