29 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र: खतरनाक रासायनिक कचरे के अवैध निपटान का मास्टरमाइंड UP से गिरफ्तार, 4 राज्यों में फैला नेटवर्क

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महाराष्ट्र: खतरनाक रासायनिक कचरे के अवैध निपटान का मास्टरमाइंड UP से गिरफ्तार, 4 राज्यों में फैला नेटवर्क

सारांश

छत्रपति संभाजीनगर में खतरनाक रसायनों की अवैध डंपिंग का मास्टरमाइंड UP से दबोचा गया — 4 राज्यों में फैले इस नेटवर्क ने 10-12 महीनों में 100 से अधिक वाहनों से 10,000 से ज़्यादा ड्रम डंप किए। ₹80 लाख के लेन-देन और THF, क्लोरोफॉर्म जैसे ज़हरीले सॉल्वेंट — यह सिर्फ अपराध नहीं, पर्यावरणीय संकट है।

मुख्य बातें

इस्तेकार अहमद निसार खान को 29 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने 1,601 ड्रमों में 3,52,220 लीटर खतरनाक रसायन, 40 टन रासायनिक पाउडर और 50 टन दूषित मिट्टी बरामद की।
गिरोह का नेटवर्क महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान और उत्तर प्रदेश — चार राज्यों में फैला था।
पिछले 10-12 महीनों में 100 से अधिक वाहनों के जरिए कचरा भेजा गया; गिरोह में कुल 12 आरोपी गिरफ्तार।
गिरोह के बीच ₹80 लाख से अधिक का वित्तीय लेन-देन; जब्त ड्रमों में THF, क्लोरोफॉर्म, टोल्यून जैसे ज़हरीले सॉल्वेंट होने की प्रारंभिक जानकारी।
जब्त रसायनों को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मार्गदर्शन में पुणे स्थित टीएसडीएफ भेजा गया।

छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण जिले में खतरनाक औद्योगिक रसायनों की अवैध डंपिंग के मामले में पुलिस ने 29 अगस्त 2026 को बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुख्य सरगना इस्तेकार अहमद निसार खान को उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार किया। सिल्लोड ग्रामीण पुलिस की विशेष टीम ने लगातार निगरानी, तकनीकी जांच और गोपनीय सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। इस्तेकार खान मामला दर्ज होने के बाद से फरार था और पुलिस की भनक लगते ही ठिकाना बदलता रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

जांच में सामने आया कि छत्रपति संभाजीनगर के पालशी, सिल्लोड शहर, फरदापुर, आलंद, शिवुर और तोंडापुर सहित कई स्थानों पर खतरनाक रसायनों से भरे ड्रमों की अवैध डंपिंग की गई थी। पुलिस ने अब तक 1,601 ड्रमों में भरे करीब 3,52,220 लीटर खतरनाक औद्योगिक रसायन, 40 टन रासायनिक पाउडर और 50 टन रासायनिक रूप से दूषित मिट्टी बरामद की है। इसके अलावा तीन ट्रक, एक हाइड्रा मशीन और करीब ₹80.35 लाख मूल्य के सात मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।

बहुराज्यीय गिरोह का खुलासा

जांच की कड़ियाँ जोड़ने पर इस नेटवर्क के तार महाराष्ट्र के अलावा तेलंगाना, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक फैले होने का खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, इस्तेकार खान के संपर्क हैदराबाद के सादिक और हुसैन से थे। सादिक के माध्यम से वह तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के मुनिपल्ली स्थित वीबीआर ग्रीन एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा, जबकि हुसैन के जरिए राजस्थान के निम्बाहेड़ा स्थित 3आर एनवायरो कंपनी से संपर्क हुआ। आरोप है कि इन कंपनियों से निकलने वाले खतरनाक औद्योगिक रसायनों का वैज्ञानिक निपटान करने के बजाय उन्हें अवैध रूप से डंप किया जाता रहा।

आरोपी की पृष्ठभूमि और कार्यप्रणाली

जांच के अनुसार, इस्तेकार खान का औद्योगिक कचरा निपटान के कारोबार से पुराना नाता रहा है। वर्ष 2005 में मुंबई के धारावी स्थित गोल्डन कैसल कंपनी में काम के दौरान उसने प्लास्टिक कचरा और पेलेट निर्माण का अनुभव हासिल किया। बाद में उसने भाई के साथ मिलकर भोइसर और एमआईडीसी क्षेत्रों में प्लास्टिक निपटान की फर्म चलाई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि पिछले 10 से 12 महीनों में इस्तेकार खान ने 100 से अधिक मालवाहक वाहनों के जरिए रासायनिक कचरा छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण क्षेत्र में भेजा — प्रत्येक वाहन में करीब 200 लीटर क्षमता वाले 100 ड्रम लादे जाते थे। पुलिस के अनुमान के अनुसार, इस अवधि में 10,000 से अधिक रासायनिक ड्रम और सोडियम बाइकार्बोनेट मिश्रित दूषित मिट्टी भेजी गई। गिरोह से जुड़े लोगों के बीच ₹80 लाख से अधिक का वित्तीय लेन-देन होने की बात जांच में सामने आई है।

रासायनिक खतरे की गंभीरता

जब्त ड्रमों पर लगे लेबल के आधार पर प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इनमें टीएचएफ (THF), क्लोरोफॉर्म और टोल्यून जैसे उच्च जोखिम वाले औद्योगिक सॉल्वेंट हो सकते हैं। हालाँकि रसायनों की वास्तविक संरचना की पुष्टि सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच के बाद ही होगी। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मार्गदर्शन में जब्त रसायनों को सुरक्षित निपटान के लिए पुणे स्थित मान्यता प्राप्त टीएसडीएफ (TSDF) भेजा गया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में औद्योगिक कचरे के अवैध निपटान की घटनाएँ पर्यावरण नियामकों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।

आगे की जांच

इस मामले में इस्तेकार खान समेत कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल मुख्य आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस रासायनिक कचरे के मूल स्रोत, ट्रांसपोर्टरों, बिचौलियों, वित्तीय लेन-देन और कचरे के अंतिम निपटान के स्थान एवं तरीके की जांच कर रही है। राजस्थान और हैदराबाद में भी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुँचने में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर ज़हर उगलती हैं। तेलंगाना और राजस्थान की कंपनियों का नाम सामने आना बताता है कि यह नेटवर्क राज्य सीमाओं और नियामकीय दरारों का फायदा उठाकर फला-फूला। असली सवाल यह है कि क्या महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित राज्यों के नियामक इन कंपनियों के लाइसेंस और अनुपालन रिकॉर्ड की जांच करेंगे — या सिर्फ मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी पर मामला बंद हो जाएगा। बिना प्रणालीगत जवाबदेही के, अगला गिरोह बनने में देर नहीं लगेगी।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्रपति संभाजीनगर रासायनिक कचरा मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
मुख्य सरगना इस्तेकार अहमद निसार खान को 29 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार किया गया। इस मामले में अब तक कुल 12 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
इस गिरोह का नेटवर्क कितने राज्यों में फैला था?
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान और उत्तर प्रदेश — चार राज्यों में फैला था। तेलंगाना की वीबीआर ग्रीन एनवायरनमेंट और राजस्थान की 3आर एनवायरो कंपनी के नाम जांच में उभरे हैं।
इस अवैध डंपिंग से पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ?
पुलिस ने 3,52,220 लीटर खतरनाक रसायन, 40 टन रासायनिक पाउडर और 50 टन दूषित मिट्टी बरामद की है। ड्रमों पर लगे लेबल के आधार पर इनमें THF, क्लोरोफॉर्म और टोल्यून जैसे अत्यधिक खतरनाक सॉल्वेंट होने की प्रारंभिक जानकारी है, हालाँकि अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद होगी।
जब्त रासायनिक कचरे का अब क्या होगा?
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मार्गदर्शन में जब्त रसायनों को पुणे स्थित मान्यता प्राप्त टीएसडीएफ (TSDF) में सुरक्षित निपटान के लिए भेजा गया है। रसायनों की वास्तविक संरचना की पुष्टि सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में होगी।
इस्तेकार खान ने यह कारोबार कैसे शुरू किया था?
जांच के अनुसार, इस्तेकार खान ने 2005 में मुंबई के धारावी में काम के दौरान औद्योगिक कचरा निपटान का अनुभव हासिल किया। बाद में भोइसर और एमआईडीसी क्षेत्रों में प्लास्टिक निपटान की फर्म चलाते हुए उसके संपर्क हैदराबाद के कारोबारियों से हुए, जिनके जरिए उसने खतरनाक रासायनिक कचरे की अवैध डंपिंग का नेटवर्क खड़ा किया।
राष्ट्र प्रेस
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