महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का पाँचवाँ स्थापना दिवस: 5 वर्षों में 53 पाठ्यक्रम, दो राष्ट्रपति दौरे
सारांश
मुख्य बातें
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) अपनी स्थापना के मात्र पाँच वर्षों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में रोजगारपरक और चिकित्सा शिक्षा का अग्रणी केंद्र बनकर उभरा है। 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों लोकार्पित इस विश्वविद्यालय में अब 53 विशिष्ट और रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जो इसकी स्थापना के समय के 12 पाठ्यक्रमों से कहीं अधिक हैं। 28 अगस्त 2025 (शुक्रवार) को दोपहर 3 बजे से विश्वविद्यालय का पाँचवाँ स्थापना समारोह आयोजित होगा, जिसमें कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे।
शैक्षिक विस्तार और पाठ्यक्रमों की विविधता
वर्ष 2021 में महज 12 पाठ्यक्रमों से शुरू हुई एमजीयूजी की शैक्षिक यात्रा अब 53 पाठ्यक्रमों तक पहुँच चुकी है। इनमें श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस और गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में बीएएमएस प्रमुख हैं। नर्सिंग फैकल्टी में एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग सहित दर्जनभर पाठ्यक्रम पूर्ण क्षमता से चल रहे हैं।
इसके अतिरिक्त बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी फोरेंसिक साइंस, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, बी फार्मा, डी फार्मा, बीबीए लॉजिस्टिक, बीबीए ई-कॉमर्स, एमबीए फार्मा मैनेजमेंट, एमबीए हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, बीसीए, एमसीए और पीएचडी (बायोटेक्नोलॉजी, आयुर्वेद, एग्रीकल्चर, फोरेंसिक साइंस, फार्मेसी सहित कई विषयों में) जैसे कार्यक्रम भी संचालित हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों की और लंबी श्रृंखला जुड़ेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर शोध उपलब्धियाँ
एमजीयूजी के बीएएमएस विद्यार्थियों को प्रति वर्ष औसतन पाँच विशिष्ट अनुसंधान परियोजनाओं के लिए चयनित किया जा रहा है। एमबीबीएस के दो विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के शोध-अनुसंधान के लिए चुना गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि निजी विश्वविद्यालय के रूप में ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला एमजीयूजी उत्तर प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है।
गौरतलब है कि एमजीयूजी देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बताया जाता है, जहाँ छात्र संसद का चुनाव स्वनिर्मित सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन कराया जा रहा है — जो शैक्षिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय पहल है।
संस्थागत साझेदारियाँ और एमओयू
शोध, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एमजीयूजी ने देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ एमओयू किए हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI), लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल, एम्स गोरखपुर, केजीएमयू लखनऊ, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद और इंडो-यूरोपियन चैंबर ऑफ स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज जैसी संस्थाएँ शामिल हैं।
चिकित्सा सेवा का विस्तार
शिक्षा के साथ-साथ एमजीयूजी किफायती दरों पर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद, दोनों की सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है। विश्वविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में जटिल कैंसर सर्जरी तक सफलतापूर्वक की जा रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी मरीज यहाँ उपचार के लिए आ रहे हैं। आयुर्वेद अस्पताल में विश्व स्तरीय 11 कॉटेज वाले पंचकर्म केंद्र ने कम समय में ही विश्वसनीय उपचार की ख्याति अर्जित की है, जहाँ कई दुर्लभ बीमारियों का सफल इलाज हो चुका है।
दो राष्ट्रपति दौरे और 'नॉलेज सिटी' का लक्ष्य
एमजीयूजी निजी क्षेत्र का संभवतः उत्तर प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है, जहाँ पाँच वर्षों में दो बार राष्ट्रपति का आगमन हुआ। 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसका लोकार्पण किया था, जबकि 1 जुलाई 2025 को वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु यहाँ अकादमिक भवन, ऑडिटोरियम और पंचकर्म चिकित्सा केंद्र का लोकार्पण करने पधारी थीं।
कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ की मंशा वर्ष 2032 तक गोरखपुर को 'नॉलेज सिटी' के रूप में स्थापित करने की है। यह आह्वान सर्वप्रथम 10 दिसंबर 2018 को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, विश्वविद्यालय की नींव में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का यह विचार है कि शिक्षा ही स्वावलंबन और सामाजिक विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। पाँचवें स्थापना समारोह के साथ विश्वविद्यालय का अगला पड़ाव और भी महत्वाकांक्षी दिखता है।