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महिला आरक्षण बिल पर गीता रॉय बर्मन का समर्थन: महिलाओं को मिलेगा बड़ा लाभ

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महिला आरक्षण बिल पर गीता रॉय बर्मन का समर्थन: महिलाओं को मिलेगा बड़ा लाभ

सारांश

महिला आरक्षण बिल पर पद्म श्री गीता रॉय बर्मन ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण का एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
गीता रॉय बर्मन का समर्थन इस बिल की प्रासंगिकता को दर्शाता है।
यह बिल सामाजिक बदलाव का आधार बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं।

कोलकाता, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल से महिला आरक्षण बिल को लेकर एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। पद्म श्री गीता रॉय बर्मन ने इस बिल को महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'नारी शक्ति' सोच की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं ने कभी भी खुद को पीछे नहीं रहने दिया, न पहले और न ही आज। चाहे घर हो या बाहर, महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। ऐसे में अगर महिलाओं को राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपनी राय रखने का मौका मिलता है, तो यह देश के लिए बेहद सकारात्मक बदलाव होगा।

गीता रॉय बर्मन ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि महिला आरक्षण के तहत 33 प्रतिशत सीटों का प्रावधान एक मजबूत पहल है और इसे जमीन पर उतारने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है। इस फैसले का पूरा समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि इससे देश की हर महिला को फायदा मिलेगा।

गीता रॉय बर्मन ने उम्मीद जताई कि यदि यह बिल पूरी तरह लागू होता है और 2029 से इसका लाभ महिलाओं को मिलना शुरू होता है, तो देश की बेटियां और माताएं आत्ममंथन करेंगी और समाज को एक सकारात्मक संदेश देंगी। उनके अनुसार, यह सिर्फ राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक भूमिका को भी मजबूत करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से लंबित इस महिला आरक्षण को लागू करने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। यह फैसला देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा देगा और आने वाले समय में बड़े बदलाव की नींव रखेगा।

ज्ञात हो कि पद्म श्री गीता रॉय बर्मन पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले की एक प्रख्यात भवैया लोक गायिका, संगीतकार और गीतकार हैं। उन्हें राजबंशी समुदाय के पारंपरिक 'भवैया' लोक संगीत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2024 में पद्म श्री से सम्मानित किया। वह कूचबिहार के मथाभंगा की रहने वाली हैं और वर्तमान में बच्चों को भवैया संगीत सिखाने के लिए एक स्कूल भी चलाती हैं।

वहीं दूसरी ओर, बिहार के मुंगेर से महिला आरक्षण बिल पर मुंगेर के चैंबर ऑफ कॉमर्स की रेखा चौहान ने कहा, "33 प्रतिशत आरक्षण के साथ, संसद में महिलाओं की भागीदारी भी 33 प्रतिशत होगी। इससे महिलाओं को बहुत फायदा होगा, क्योंकि केवल महिलाएं ही चुनी जाएंगी, जिससे विकास के और भी ज्यादा काम होंगे। महिलाएं एक-दूसरे का साथ देंगी, उनकी संख्या बढ़ेगी, और महिलाओं के चुने जाने से संसद का कामकाज बेहतर होगा और विकास आगे बढ़ेगा।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन आएंगे।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महिला आरक्षण बिल का मुख्य उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है, जिससे उन्हें 33 प्रतिशत सीटें मिलेंगी।
गीता रॉय बर्मन कौन हैं?
गीता रॉय बर्मन पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध भवैया लोक गायिका और पद्म श्री पुरस्कार विजेता हैं।
यह बिल कब लागू होगा?
यदि यह बिल पूरी तरह से लागू होता है, तो 2029 से इसका लाभ महिलाओं को मिलने लगेगा।
महिला आरक्षण से समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
महिला आरक्षण से न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि इसका सामाजिक विश्वास और भूमिका पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
क्या यह बिल सिर्फ राजनीतिक भागीदारी तक सीमित है?
नहीं, यह बिल महिलाओं के आत्मविश्वास को भी मजबूत करेगा और उन्हें समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देगा।
राष्ट्र प्रेस
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