ममता बनर्जी ने BJP पर साधा निशाना, पश्चिम बंगाल में फेरीवालों की बेदखली को बताया असंवैधानिक
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार, 26 मई को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा स्ट्रीट वेंडर्स और फेरीवालों के विरुद्ध चलाए जा रहे बेदखली अभियानों की कड़ी निंदा की। अंतर्राष्ट्रीय फेरीवाला दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए बनर्जी ने कहा कि वह इस व्यवहार से 'गुस्से में और बेहद दुखी' हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बनर्जी ने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने सत्ता में आते ही फेरीवालों पर अत्याचार शुरू कर दिया — उनके स्टॉल तोड़े गए और उनकी आजीविका की परवाह किए बिना उन्हें सड़कों पर धकेल दिया गया। उन्होंने कहा, 'अत्याचार करने वालों को निश्चित रूप से परिणाम भुगतने होंगे। मैं आपके साथ थी, हूं और हमेशा रहूंगी।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में BJP और TMC के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की सुरक्षा एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनती जा रही है।
कानूनी और संवैधानिक आधार
बनर्जी ने स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण एवं स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 का हवाला दिया, जो फेरीवालों को मनमानी बेदखली से कानूनी सुरक्षा देता है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का भी उल्लेख किया जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ग) और अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार को मान्यता देते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि बिना किसी समीक्षा या वैकल्पिक व्यवस्था के अवसर दिए आजीविका का अचानक या मनमाना हनन अनुच्छेद 21 (जीवन और आजीविका का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
शहरी नियोजन पर TMC का रुख
बनर्जी ने कहा कि एक सुनियोजित शहर का लक्ष्य फेरीवालों को बेदखल करने के बजाय उन्हें संरचित नगरपालिका बाज़ारों के ज़रिए शहरी व्यवस्था में एकीकृत करना होना चाहिए। उनके अनुसार, फेरीवालों के अधिकारों का प्रबंधन टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) जैसी लोकतांत्रिक संस्था के माध्यम से होना चाहिए, ताकि शहरी नियोजन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
गौरतलब है कि स्ट्रीट वेंडर्स स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं — एक ओर वे आम लोगों की दैनिक ज़रूरतों को उत्पादन प्रणाली से जोड़ते हैं, दूसरी ओर आवश्यक वस्तुएँ किफायती दामों पर घर-घर पहुँचाते हैं।
आम जनता पर असर
पश्चिम बंगाल में लाखों परिवार फेरी व्यापार पर निर्भर हैं। बेदखली अभियानों से न केवल विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित हो रही है, बल्कि उन उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ रहा है जो सस्ती और सुलभ खरीदारी के लिए इन्हीं पर निर्भर हैं।
क्या होगा आगे
बनर्जी की इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे के और गर्माने की संभावना है। TMC के इस रुख को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अनौपचारिक क्षेत्र के मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि BJP सरकार इन आरोपों का जवाब किस तरह देती है और क्या TVC व्यवस्था को बहाल करने की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है।