21 अगस्त 2026
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अभिनेता मनोज जोशी ने उज्जैन में की भस्म आरती, बोले — 'युवाओं को प्रचंड शक्ति दें बाबा महाकाल'

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अभिनेता मनोज जोशी ने उज्जैन में की भस्म आरती, बोले — 'युवाओं को प्रचंड शक्ति दें बाबा महाकाल'

सारांश

श्रावण शुक्ल नवमी पर अभिनेता मनोज जोशी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुँचे और भस्म आरती में भाग लिया। उन्होंने इस अनुभव को 'दिव्य साक्षात्कार' बताया और बाबा से देश के युवाओं को 'प्रचंड शक्ति' देने की प्रार्थना की।

मुख्य बातें

अभिनेता मनोज जोशी ने 21 अगस्त 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में भाग लिया।
यह आयोजन श्रावण शुक्ल पक्ष नवमी तिथि पर हुआ, जो शिव उपासना के लिए विशेष महत्व रखती है।
बाबा महाकाल का विशेष शृंगार भगवान राम के भक्त के रूप में किया गया; माथे पर 'राम' नाम अंकित हुआ।
मनोज जोशी ने भस्म आरती को 'दिव्य साक्षात्कार' बताया और देश के युवाओं के लिए बाबा से प्रचंड शक्ति की प्रार्थना की।
महा निर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती संपन्न हुई; बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से कतारबद्ध रहे।

अभिनेता मनोज जोशी ने 21 अगस्त 2026 को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण शुक्ल पक्ष नवमी के पावन अवसर पर भस्म आरती में भाग लिया और बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने इस दिव्य अनुभव को 'अलौकिक साक्षात्कार' बताते हुए देश के युवाओं के लिए बाबा से शक्ति की प्रार्थना की।

भस्म आरती का दिव्य आयोजन

शुक्रवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने जलाभिषेक किया और दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा का अभिषेक संपन्न कराया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित करने के बाद कपूर आरती हुई, जिसके बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की मधुर ध्वनि के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।

बाबा का विशेष शृंगार

इस अवसर पर बाबा महाकाल को रजत मुकुट और चंद्र-त्रिशूल से सुसज्जित किया गया तथा पुष्पमाला अर्पित की गई। विशेष रूप से बाबा का शृंगार भगवान राम के भक्त के रूप में किया गया — उनके माथे पर 'राम' नाम अंकित किया गया और 'राम' नाम लिखे बेलपत्र भी अर्पित किए गए। बाबा ने मस्तक पर चंद्रमा धारण किया। आरती संपन्न होते ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

मनोज जोशी का अनुभव और संदेश

भस्म आरती में शामिल हुए अभिनेता मनोज जोशी ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा, 'भस्म आरती के दौरान जो अनुभूति हुई है, वह दिव्य साक्षात्कार है। इस अनुभूति का शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता।' उन्होंने आगे कहा, 'कालों के काल बाबा महाकाल विश्व को आगे बढ़ा रहे हैं और मंगल कर रहे हैं। महाकाल से मेरी प्रार्थना है कि देश के युवाओं को प्रचंड शक्ति दें और युवा राष्ट्र को सर्वोपरि मानें। बाबा महाकाल सभी का कल्याण करें।'

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

बाबा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर प्रतीक्षारत थे। महा निर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाबा को भस्म आरती अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई और श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनकर धन्यता अनुभव की।

श्रावण में महाकाल दर्शन का महत्व

श्रावण माह में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि यह माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। उज्जैन का यह ज्योतिर्लिंग देशभर के शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है और भस्म आरती को देश की सबसे दुर्लभ एवं पवित्र धार्मिक परंपराओं में गिना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मनोज जोशी का 'युवाओं को प्रचंड शक्ति' वाला संदेश उस व्यापक सांस्कृतिक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जिसमें मनोरंजन जगत की हस्तियाँ धार्मिक आस्था को सार्वजनिक राष्ट्रवादी विमर्श से जोड़ती हैं। यह दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन और सेलिब्रिटी भक्ति अब एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। उज्जैन के महाकालेश्वर कॉरिडोर के विस्तार के बाद से मंदिर में आगंतुकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और इस तरह की यात्राएँ उस गति को और बल देती हैं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिनेता मनोज जोशी ने महाकाल मंदिर में क्या किया?
मनोज जोशी 21 अगस्त 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल हुए और बाबा महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने इस अनुभव को 'दिव्य साक्षात्कार' बताया और देश के युवाओं के लिए बाबा से प्रचंड शक्ति की प्रार्थना की।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की एक दुर्लभ और पवित्र धार्मिक परंपरा है जो महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा संपन्न कराई जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
21 अगस्त 2026 को भस्म आरती में बाबा का कैसा शृंगार हुआ?
इस दिन बाबा महाकाल का विशेष शृंगार भगवान राम के भक्त के रूप में किया गया। उनके माथे पर 'राम' नाम अंकित किया गया, 'राम' नाम लिखे बेलपत्र अर्पित हुए, और रजत मुकुट व चंद्र-त्रिशूल से उन्हें सुसज्जित किया गया।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में रात से ही कतारबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं।
श्रावण माह में महाकालेश्वर मंदिर का क्या महत्व है?
श्रावण माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। उज्जैन का यह ज्योतिर्लिंग देशभर के शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
राष्ट्र प्रेस
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