ईरान के राष्ट्रपति से पीएम मोदी की बातचीत को मौलाना यासुब अब्बास ने सराहा
सारांश
Key Takeaways
- ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है।
- भारत और ईरान के बीच गहरे संबंध हैं।
- केंद्र सरकार ने कई भारतीय नागरिकों को सकुशल वापस लाने में सफलता प्राप्त की है।
- मौलाना यासुब अब्बास ने पीएम मोदी के कदम की सराहना की है।
- संकट के समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है।
लखनऊ, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शिया धर्मगुरु मौलाना यासुब अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईरान के राष्ट्रपति से संवाद स्थापित करने के कार्य की सराहना की है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि ईरान में कई भारतीय नागरिक निवास करते हैं। ऐसे में भारत सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने नागरिकों को सुरक्षित रूप से स्वदेश लाए। इस दिशा में केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाया है, जिसका हम हृदय से स्वागत करते हैं। वर्तमान में वहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग फंसे हुए हैं।
मौलाना यासुब अब्बास ने बताया कि ईरान हमेशा से भारत का एक स्थायी मित्र रहा है। ईरान ने हर कठिन परिस्थिति में भारत का साथ दिया है। ऐसे में भारत के लिए भी यह आवश्यक है कि वह इस संकट के समय में ईरान का समर्थन करे। वर्तमान में ईरान को भारत की मजबूत सहायता की आवश्यकता है। वहीं, इजरायल और अमेरिका के संबंधों की तुलना करें, तो भारत के साथ ईरान के संबंध अधिक गहरे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि गहराई से देखा जाए, तो अमेरिका और ईरान कभी भी भारत के लिए अच्छे मित्र नहीं रहे हैं। ये लोग केवल स्थितियों के अनुसार भारत के साथ आते हैं और जब परिस्थितियां उनके लिए प्रतिकूल हो जाती हैं, तो वे पीछे हट जाते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में, मैं यही कहूंगा कि भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह ईरान का साथ दे, ताकि वहां से आयात और निर्यात का सिलसिला निर्बाध रूप से जारी रहे। इस दिशा में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
मौलाना अब्बास ने कहा कि भारत सरकार ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। अब तक कई लोगों को केंद्र सरकार ने सुरक्षित रूप से वापस लाने में सफलता प्राप्त की है, जिसका हम स्वागत करते हैं।