एमसीडी टोल टैक्स टेंडर में ₹500 करोड़ के घोटाले का आरोप, 'आप' ने तत्काल रद्द करने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में 28 जुलाई 2025 को टोल टैक्स और ईसीसी कलेक्शन टेंडर को लेकर तीखा विवाद उभरा, जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर टेंडर प्रक्रिया में करीब ₹500 करोड़ की अनियमितताओं का आरोप लगाया। AAP ने माँग की कि पूरे टेंडर को तत्काल निरस्त कर नए सिरे से पारदर्शी ओपन टेंडर जारी किया जाए।
मुख्य आरोप: क्या है पूरा मामला
एमसीडी में AAP के सह-प्रभारी प्रीति डोगरा और स्टैंडिंग कमेटी सदस्य प्रवीण कुमार राजपूत ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर इस प्रकार संचालित किया गया जिससे BJP से जुड़े व्यक्तियों को लाभ पहुँचाया जा सके। उनके अनुसार, टेंडर के लिए कुल सात कंपनियों ने बोली लगाई थी, जिनमें से ₹1,100 करोड़ की सर्वाधिक बोली सहित चार उच्चतम बोलियाँ अस्वीकार कर दी गईं और ₹936 करोड़ की बोली को आगे बढ़ाया गया।
प्रवीण कुमार राजपूत ने सवाल उठाया कि जब एमसीडी को ₹1,100 करोड़ तक का राजस्व मिल सकता था, तो ₹936 करोड़ पर टेंडर रोकना सार्वजनिक हित के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वित्तीय बोली में शामिल तीनों कंपनियाँ मुंबई की हैं और उनके बीच कार्टेल बनाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
प्रक्रियागत खामियाँ: नियमों की अनदेखी का आरोप
राजपूत ने बताया कि नियमों के अनुसार टोल टैक्स का टेंडर स्टैंडिंग कमेटी के माध्यम से लाया जाना चाहिए था, परंतु इस बार ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च से जुलाई तक पाँच महीने स्टैंडिंग कमेटी की बैठक न होने के दौरान कई महत्त्वपूर्ण निर्णय समिति की मंजूरी के बिना ले लिए गए। साथ ही, टेंडर की शर्तों में भी बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ दिए जाने का आरोप लगाया गया।
गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग पहले ही इस मामले में एमसीडी आयुक्त को पत्र लिख चुके हैं, बावजूद इसके टेंडर प्रक्रिया नहीं रोकी गई।
पूर्व मेयर के निर्देशों की अनदेखी का दावा
AAP का कहना है कि पूर्व मेयर शैली ओबेरॉय ने टेंडर प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे ताकि एमसीडी को अधिकतम राजस्व प्राप्त हो सके, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन सुझावों की पूरी तरह अनदेखी की गई। प्रीति डोगरा ने आरोप लगाया कि BJP ने एमसीडी में सरकार बनाने के बाद लगातार टेंडरों के माध्यम से अपने करीबी लोगों को लाभ पहुँचाने का काम किया है।
AAP की माँगें और आगे की चेतावनी
आम आदमी पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — वर्तमान टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए, 122 लेन से जुड़े विवादित प्रावधान को हटाया जाए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा कराई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई और इसे रद्द नहीं किया गया, तो वह इस मुद्दे को सदन से लेकर जनता के बीच तक उठाती रहेगी। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एमसीडी में सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी AAP के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।