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एमसीडी टोल टैक्स टेंडर में ₹500 करोड़ के घोटाले का आरोप, 'आप' ने तत्काल रद्द करने की मांग की

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एमसीडी टोल टैक्स टेंडर में ₹500 करोड़ के घोटाले का आरोप, 'आप' ने तत्काल रद्द करने की मांग की

सारांश

एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी बैठक में AAP ने BJP पर ₹500 करोड़ के टोल टैक्स टेंडर घोटाले का आरोप लगाया। ₹1,100 करोड़ की सर्वोच्च बोली ठुकराकर ₹936 करोड़ की बोली को आगे बढ़ाने पर सवाल उठे। पार्टी ने तत्काल टेंडर रद्द कर पारदर्शी पुनर्निविदा की माँग की।

मुख्य बातें

एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में 27 जुलाई 2025 को टोल टैक्स और ईसीसी कलेक्शन टेंडर पर तीखा विवाद हुआ।
AAP ने BJP पर ₹500 करोड़ की अनियमितताओं का आरोप लगाया; ₹1,100 करोड़ की उच्चतम बोली सहित चार बोलियाँ अस्वीकार की गईं।
वित्तीय बोली में शामिल तीनों कंपनियाँ मुंबई की बताई गई हैं; कार्टेल बनाने का आरोप।
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग पहले ही एमसीडी आयुक्त को पत्र लिख चुके हैं, फिर भी टेंडर नहीं रुका।
AAP ने 122 लेन से जुड़े विवादित प्रावधान हटाने और पारदर्शी पुनर्निविदा की माँग की।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में 28 जुलाई 2025 को टोल टैक्स और ईसीसी कलेक्शन टेंडर को लेकर तीखा विवाद उभरा, जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर टेंडर प्रक्रिया में करीब ₹500 करोड़ की अनियमितताओं का आरोप लगाया। AAP ने माँग की कि पूरे टेंडर को तत्काल निरस्त कर नए सिरे से पारदर्शी ओपन टेंडर जारी किया जाए।

मुख्य आरोप: क्या है पूरा मामला

एमसीडी में AAP के सह-प्रभारी प्रीति डोगरा और स्टैंडिंग कमेटी सदस्य प्रवीण कुमार राजपूत ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर इस प्रकार संचालित किया गया जिससे BJP से जुड़े व्यक्तियों को लाभ पहुँचाया जा सके। उनके अनुसार, टेंडर के लिए कुल सात कंपनियों ने बोली लगाई थी, जिनमें से ₹1,100 करोड़ की सर्वाधिक बोली सहित चार उच्चतम बोलियाँ अस्वीकार कर दी गईं और ₹936 करोड़ की बोली को आगे बढ़ाया गया।

प्रवीण कुमार राजपूत ने सवाल उठाया कि जब एमसीडी को ₹1,100 करोड़ तक का राजस्व मिल सकता था, तो ₹936 करोड़ पर टेंडर रोकना सार्वजनिक हित के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वित्तीय बोली में शामिल तीनों कंपनियाँ मुंबई की हैं और उनके बीच कार्टेल बनाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

प्रक्रियागत खामियाँ: नियमों की अनदेखी का आरोप

राजपूत ने बताया कि नियमों के अनुसार टोल टैक्स का टेंडर स्टैंडिंग कमेटी के माध्यम से लाया जाना चाहिए था, परंतु इस बार ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च से जुलाई तक पाँच महीने स्टैंडिंग कमेटी की बैठक न होने के दौरान कई महत्त्वपूर्ण निर्णय समिति की मंजूरी के बिना ले लिए गए। साथ ही, टेंडर की शर्तों में भी बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ दिए जाने का आरोप लगाया गया।

गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग पहले ही इस मामले में एमसीडी आयुक्त को पत्र लिख चुके हैं, बावजूद इसके टेंडर प्रक्रिया नहीं रोकी गई।

पूर्व मेयर के निर्देशों की अनदेखी का दावा

AAP का कहना है कि पूर्व मेयर शैली ओबेरॉय ने टेंडर प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे ताकि एमसीडी को अधिकतम राजस्व प्राप्त हो सके, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन सुझावों की पूरी तरह अनदेखी की गई। प्रीति डोगरा ने आरोप लगाया कि BJP ने एमसीडी में सरकार बनाने के बाद लगातार टेंडरों के माध्यम से अपने करीबी लोगों को लाभ पहुँचाने का काम किया है।

AAP की माँगें और आगे की चेतावनी

आम आदमी पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — वर्तमान टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए, 122 लेन से जुड़े विवादित प्रावधान को हटाया जाए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा कराई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई और इसे रद्द नहीं किया गया, तो वह इस मुद्दे को सदन से लेकर जनता के बीच तक उठाती रहेगी। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एमसीडी में सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी AAP के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

100 करोड़ की उच्चतम बोली को नकारकर ₹936 करोड़ की बोली को प्राथमिकता देना — यदि आरोप सच हैं — तो यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सार्वजनिक राजस्व की सुनियोजित क्षति है। एमसीडी जैसी संस्था, जो पहले से वित्तीय संकट से जूझ रही है, के लिए यह अंतर लाखों दिल्लीवासियों की नागरिक सेवाओं पर सीधा असर डालता है। आलोचकों का कहना है कि स्टैंडिंग कमेटी को दरकिनार कर निर्णय लेना जवाबदेही के ढाँचे को कमज़ोर करता है। BJP की ओर से अभी तक कोई विस्तृत खंडन सामने नहीं आया है — जो इस विवाद को और गहरा बनाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमसीडी टोल टैक्स टेंडर विवाद क्या है?
AAP ने आरोप लगाया है कि एमसीडी के टोल टैक्स और ईसीसी कलेक्शन टेंडर में ₹500 करोड़ की अनियमितताएँ हुई हैं। ₹1,100 करोड़ की सर्वोच्च बोली सहित चार उच्चतम बोलियाँ अस्वीकार कर ₹936 करोड़ की बोली को आगे बढ़ाया गया, जिससे एमसीडी को राजस्व का भारी नुकसान होने का दावा है।
AAP ने टेंडर रद्द करने की माँग क्यों की?
AAP का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई, स्टैंडिंग कमेटी को बायपास किया गया और मुंबई की तीन कंपनियों ने कार्टेल बनाकर प्रक्रिया प्रभावित की। पार्टी की माँग है कि मौजूदा टेंडर रद्द कर पारदर्शी पुनर्निविदा जारी की जाए ताकि एमसीडी को अधिकतम राजस्व मिल सके।
टेंडर में स्टैंडिंग कमेटी की क्या भूमिका होनी चाहिए थी?
नियमों के अनुसार टोल टैक्स टेंडर स्टैंडिंग कमेटी के माध्यम से लाया जाना चाहिए था। AAP का आरोप है कि मार्च से जुलाई तक पाँच महीने कमेटी की बैठक न होने का फायदा उठाकर कई बड़े फैसले बिना समिति की मंजूरी के ले लिए गए।
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग की क्या भूमिका है?
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग पहले ही एमसीडी आयुक्त को पत्र लिखकर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। हालाँकि, उनके पत्र के बावजूद टेंडर प्रक्रिया नहीं रोकी गई, जिसे AAP ने गंभीर लापरवाही करार दिया है।
क्या BJP ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BJP की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। AAP ने चेतावनी दी है कि वह इस मुद्दे को सदन से लेकर जनता के बीच तक उठाती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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