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एमसीडी का तबादला कांड: मृत और निलंबित जेई के नाम ट्रांसफर सूची में, आप ने उठाए सवाल

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एमसीडी का तबादला कांड: मृत और निलंबित जेई के नाम ट्रांसफर सूची में, आप ने उठाए सवाल

सारांश

दिल्ली नगर निगम ने एक मृत और एक निलंबित जेई का तबादला कर दिया — और आदेश पर अतिरिक्त उपायुक्त के हस्ताक्षर भी थे। आप के सार्वजनिक विरोध के बाद एमसीडी ने आदेश वापस लिया, लेकिन सवाल बना है: क्या निगम के पास अपने कर्मचारियों का सटीक रिकॉर्ड भी है?

मुख्य बातें

एमसीडी इंजीनियरिंग विभाग ने 5 जून 2025 को पत्र संख्या 165 में दो जेई के तबादले का आदेश जारी किया।
जेई अपूर्व भटनागर का सात महीने पहले निधन हो चुका था; उनका नाम ट्रांसफर सूची में दर्ज था।
जेई अतुल कुमार सुमन नौ महीनों से निलंबित हैं, फिर भी उनका तबादला आदेश जारी हुआ।
आदेश पर अतिरिक्त उपायुक्त (इंजीनियरिंग) के हस्ताक्षर मौजूद थे।
आप द्वारा मामला उजागर करने के बाद एमसीडी ने तत्काल आदेश वापस ले लिया।
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 5 जून 2025 को जारी पत्र संख्या 165 में दो ऐसे जूनियर इंजीनियरों (जेई) के तबादले का उल्लेख किया गया, जिनमें से एक की सात महीने पहले मृत्यु हो चुकी है और दूसरा नौ महीने से निलंबित चल रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा इस मामले को सार्वजनिक किए जाने के बाद एमसीडी प्रशासन ने तत्काल उक्त आदेश वापस ले लिया और ट्रांसफर सूची निरस्त कर दी।

मुख्य घटनाक्रम

एमसीडी के इंजीनियरिंग विभाग की ओर से जारी तबादला आदेश में जेई अपूर्व भटनागर का नाम शामिल था, जिनका करीब सात महीने पहले निधन हो चुका है। इसी सूची में जेई अतुल कुमार सुमन का नाम भी दर्ज किया गया, जो पिछले नौ महीनों से निलंबन की स्थिति में हैं। आप के अनुसार, इस आदेश पर अतिरिक्त उपायुक्त (इंजीनियरिंग) के हस्ताक्षर भी मौजूद थे।

आप की प्रतिक्रिया और मांगें

एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने इस घटना को भाजपा शासित निगम की प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या निगम को अपने कर्मचारियों की वर्तमान सेवा स्थिति तक की जानकारी नहीं है।

नारंग ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए और मृत तथा निलंबित कर्मचारियों के नाम ट्रांसफर सूची में शामिल करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही आप ने यह मामला उजागर किया, एमसीडी प्रशासन ने तत्काल आदेश वापस ले लिया।

विभागीय रिकॉर्ड पर सवाल

नारंग के अनुसार, जब मृत, निलंबित और सेवा में सक्रिय नहीं रहने वाले कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हों, तो यह स्पष्ट संकेत है कि विभागीय रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था में भारी खामियाँ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी सत्यापन के आदेश जारी होना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।

आप नेता ने यह भी दावा किया कि एमसीडी में गलत वरिष्ठता सूची, विवादित पदोन्नतियाँ और कथित तौर पर पैसे लेकर तबादले किए जाने जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

सुधार की माँग

नारंग ने माँग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एमसीडी में डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू की जाए, जिससे कर्मचारियों की सेवा स्थिति की वास्तविक समय में जाँच हो सके। साथ ही उन्होंने महापौर और इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले पर जवाबदेही तय करने की भी माँग की।

आगे की स्थिति

एमसीडी प्रशासन ने विवादित ट्रांसफर आदेश वापस ले लिया है, लेकिन अब तक किसी अधिकारी के विरुद्ध औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। आप ने स्पष्ट किया है कि यदि जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हुई तो वह इस मुद्दे को आगे उठाती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दिल्ली के लाखों नागरिकों को सेवाएँ देती है, यदि अपने स्वयं के कर्मचारी रिकॉर्ड को सत्यापित नहीं कर सकती, तो उसके बड़े प्रशासनिक निर्णयों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आप का विरोध राजनीतिक ज़रूर है, लेकिन माँग — डिजिटल सत्यापन प्रणाली — तकनीकी रूप से उचित और लंबे समय से लंबित है। असली जवाबदेही तब बनेगी जब आदेश वापस लेने के साथ-साथ हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी के विरुद्ध भी कार्रवाई हो।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमसीडी के मृत जेई तबादला मामले में क्या हुआ?
एमसीडी इंजीनियरिंग विभाग ने 5 जून 2025 को एक ऐसे जेई अपूर्व भटनागर का तबादला आदेश जारी किया जिनका सात महीने पहले निधन हो चुका था। इसी सूची में नौ महीने से निलंबित जेई अतुल कुमार सुमन का नाम भी था। आप के विरोध के बाद एमसीडी ने आदेश वापस ले लिया।
आम आदमी पार्टी ने एमसीडी से क्या माँगें की हैं?
आप के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने मामले की निष्पक्ष जाँच, दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और एमसीडी में डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू करने की माँग की है। उन्होंने महापौर और इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाबदेही तय करने को भी कहा है।
एमसीडी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
आप द्वारा मामला सार्वजनिक किए जाने के बाद एमसीडी प्रशासन ने तत्काल विवादित तबादला आदेश वापस लेते हुए ट्रांसफर सूची निरस्त कर दी। हालाँकि, अब तक किसी अधिकारी के विरुद्ध औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
इस तबादला आदेश पर किसके हस्ताक्षर थे?
आप नेता अंकुश नारंग के अनुसार, विवादित आदेश पर एमसीडी के अतिरिक्त उपायुक्त (इंजीनियरिंग) के हस्ताक्षर मौजूद थे। उन्होंने इसे बिना सत्यापन के आदेश जारी करने की प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया।
एमसीडी में कर्मचारी रिकॉर्ड की खामियाँ पहले भी सामने आई हैं?
आप नेता के अनुसार, एमसीडी में गलत वरिष्ठता सूची, विवादित पदोन्नतियाँ और कथित तौर पर पैसे लेकर तबादले किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। यह घटना उन्हीं प्रशासनिक खामियों की एक और कड़ी बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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